- कानपुर बैराज में तीन दिन में 44 सेंटीमीटर घटा गंगा का जलस्तर, डिस्चार्ज 50 हजार क्यूसेक कम; हरिद्वार-नरौरा से भी घटा पानी, बारिश थमने से राहत के संकेत
भारत 19
कानपुर। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अब गंगा के तेवर नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। कानपुर बैराज और शुक्लागंज के गेज पर पिछले तीन दिनों में जलस्तर लगातार नीचे आया है। इसके साथ ही हरिद्वार और नरौरा बैराज से आने वाला पानी भी घटा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में भी उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तत्काल भारी बारिश का बड़ा संकेत नहीं है। ऐसे में कानपुर में गंगा के बढ़ते पानी से पैदा हुआ बाढ़ का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है। कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 13 सितंबर को 114.740 मीटर था। 14 सितंबर को यह 114.670 मीटर और 16 सितंबर को घटकर 114.300 मीटर रह गया। यानी तीन दिनों में जलस्तर 44 सेंटीमीटर नीचे आया है।
कानपुर बैराज में 50 हजार क्यूसेक घटा पानी
जलस्तर के साथ गंगा के प्रवाह में भी कमी आई है। 13 सितंबर को कानपुर बैराज से डिस्चार्ज 4,20,691 क्यूसेक था। 14 सितंबर को यह 4,12,548 क्यूसेक और 16 सितंबर को घटकर 3,70,392 क्यूसेक रह गया। तीन दिनों में डिस्चार्ज में 50,299 क्यूसेक की कमी दर्ज की गई। कानपुर बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर निर्धारित है। 16 सितंबर सुबह आठ बजे जलस्तर 114.300 मीटर था। यानी पानी चेतावनी स्तर से 30 सेंटीमीटर ऊपर, लेकिन खतरे के स्तर से 70 सेंटीमीटर नीचे था। कानपुर के साथ शुक्लागंज में भी गंगा का पानी लगातार उतर रहा है। यहां 13 सितंबर को जलस्तर 113.120 मीटर दर्ज हुआ था। 14 सितंबर को यह 113.050 मीटर और 16 सितंबर को 112.760 मीटर रह गया। इस तरह तीन दिनों में शुक्लागंज का जलस्तर 36 सेंटीमीटर नीचे आया। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। 16 सितंबर को दर्ज जलस्तर चेतावनी स्तर से भी 24 सेंटीमीटर नीचे रहा।
हरिद्वार-नरौरा से भी कम हो रहा गंगा का प्रवाह
कानपुर में घटते जलस्तर को upstream बैराजों के आंकड़े भी समर्थन दे रहे हैं। हरिद्वार बैराज से डिस्चार्ज 13 सितंबर को 81,135 क्यूसेक था, जो 14 सितंबर को 74,532 और 16 सितंबर को घटकर 71,666 क्यूसेक रह गया। नरौरा बैराज से भी पानी का प्रवाह लगातार कम हुआ है। 13 सितंबर को डिस्चार्ज 67,667 क्यूसेक था। 14 सितंबर को यह 64,283 और 16 सितंबर को 62,398 क्यूसेक दर्ज किया गया। यानी हरिद्वार और नरौरा दोनों जगहों पर तीन दिनों के आंकड़े गंगा के घटते प्रवाह की दिशा दिखा रहे हैं। इसका असर आगे कानपुर के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है।
बारिश थमने से गंगा को मिली नीचे आने की गुंजाइश
गंगा के जलस्तर में आगे बढ़ोतरी होगी या पानी नीचे जाएगा, इसमें upstream क्षेत्रों में होने वाली बारिश की सबसे बड़ी भूमिका रहती है। उत्तराखंड में तेज बारिश होने पर उसका असर कुछ समय बाद गंगा के मैदानी हिस्सों में दिखाई देता है। इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश और स्थानीय जलनिकासी भी नदी के प्रवाह को प्रभावित कर सकती है। मौजूदा स्थिति में उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का तत्काल बड़ा पूर्वानुमान नहीं होने तथा upstream बैराजों से घटते डिस्चार्ज ने कानपुर के लिए राहत की स्थिति बनाई है।
खतरा टला, लेकिन निगरानी अभी भी जरूरी
मौजूदा आंकड़ों से यह जरूर कहा जा सकता है कि कानपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति और बिगड़ने का तत्काल खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि इसे स्थायी राहत मानना जल्दबाजी होगी। गंगा का जलस्तर upstream बारिश, बैराजों से पानी छोड़े जाने और जलग्रहण क्षेत्रों में आने वाले नए प्रवाह के साथ तेजी से बदल सकता है। अगले 24 से 72 घंटे में हरिद्वार और नरौरा के डिस्चार्ज के साथ कानपुर बैराज और शुक्लागंज के गेज पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि upstream से पानी का प्रवाह इसी तरह घटता रहा और भारी बारिश का नया दौर नहीं आया, तो कानपुर में गंगा के जलस्तर में और गिरावट की संभावना बनी रहेगी।


