- परिसर का निर्माण लगभग पूरा, पूर्ण स्मृति स्तंभ पर ट्रस्ट का कांस्य लोगो लगना बाकी; राम कथा संग्रहालय, श्रद्धालु सुविधाओं और संचालन व्यवस्था पर अब फोकस
भारत 19
अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण परियोजना अब निर्माण के अंतिम पड़ाव से आगे बढ़कर परिसर के संचालन और अगले विकास चरण में प्रवेश कर रही है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने 19 अगस्त को बताया कि मंदिर परिसर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब पूर्ण स्मृति स्तंभ पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कांस्य लोगो लगाने का काम शेष है, जिसे जल्द पूरा किया जाएगा। मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक में निर्माण कार्य के साथ श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं और आगे की परियोजनाओं की भी समीक्षा की जा रही है। इसका संकेत है कि अब प्राथमिकता केवल निर्माण पूरा करने की नहीं, बल्कि पूरे परिसर को अंतिम रूप देने और उसके व्यवस्थित संचालन की है।
राम कथा संग्रहालय अगले चरण का केंद्र
निर्माण के बाद सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय है। संग्रहालय की 20 दीर्घाओं के लिए पटकथा और कहानी की रूपरेखा तैयार हो चुकी है। अब इन कथाओं को वीडियो और तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा। जुलाई में नृपेंद्र मिश्र ने बताया था कि संग्रहालय की अनुमानित लागत करीब 100 करोड़ रुपये है और काम शुरू होने के बाद इसे छह से आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। संग्रहालय में भगवान राम की जीवन यात्रा और वनगमन से जुड़े प्रसंगों को आधुनिक प्रस्तुति के साथ दिखाने की योजना है।
सुरक्षा ढांचे और परिसर की सुविधाएं
मंदिर परिसर के विकास में करीब चार किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार और निगरानी टावर भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जून में निर्माण समिति ने इन कार्यों को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया था। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े निर्माण और परिसर के अन्य प्रशासनिक ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यानी मंदिर का अगला चरण केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और प्रबंधन भी इसका अहम हिस्सा होंगे।
समयसीमा से संचालन तक बदला फोकस
जुलाई में निर्माण समिति ने मंदिर परिसर के सभी निर्माण कार्य 15 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य बताया था। अब 19 अगस्त को समिति की ओर से परिसर का निर्माण पूरा होने की जानकारी सामने आ चुकी है। इस तरह परियोजना अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां निर्माण एजेंसियों की भूमिका धीरे-धीरे सीमित होगी और मंदिर परिसर के संचालन, रखरखाव, श्रद्धालु प्रबंधन और संग्रहालय जैसी नई सुविधाओं पर ध्यान बढ़ेगा।
मंदिर के साथ विरासत का भी विस्तार
राम मंदिर परियोजना का अगला चरण अयोध्या को केवल दर्शन के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि रामायण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। जनवरी 2026 में संस्कृति मंत्रालय ने 233 वर्ष पुरानी संस्कृत वाल्मीकि रामायण की पांडुलिपि राम कथा संग्रहालय को स्थायी रूप से सौंपे जाने की जानकारी दी थी। इससे संग्रहालय की भूमिका केवल मंदिर परिसर की एक अतिरिक्त इमारत तक सीमित नहीं रहेगी। यहां रामायण से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्रोतों को संरक्षित और प्रदर्शित करने की योजना है।


