- नवंबर से फरवरी तक 14 सप्ताह चलेगी पूरक पोषण योजना, हर बच्चे के लिए कम से कम 30 ग्राम सूजी, हलवे पर सात और उपमा पर चार रुपये खर्च, रसोइयों को भी मिलेगा अतिरिक्त पारिश्रमिक
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब नियमित मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त हर शुक्रवार हलवा या उपमा भी परोसा जाएगा। प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत यह व्यवस्था नवंबर 2026 से फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह तक 14 सप्ताह के लिए लागू की जानी है। शुक्रवार को स्कूल बंद होने की स्थिति में अगले कार्यदिवस पर पूरक पोषण आहार वितरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को नियमित भोजन के साथ अतिरिक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
पहले और तीसरे सप्ताह हलवा, बाकी में उपमा
योजना के तहत महीने के पहले और तीसरे सप्ताह में बच्चों को सूजी से बना मीठा हलवा दिया जाएगा, जबकि दूसरे, चौथे और पांचवें सप्ताह में नमकीन उपमा परोसा जाएगा। इसे स्कूल में मध्याह्न भोजन के अतिरिक्त वितरित किया जाएगा। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक बच्चे के लिए कम से कम 30 ग्राम सूजी का इस्तेमाल किया जाएगा। हलवा तैयार करने में सूजी, चीनी और घिसे नारियल का उपयोग होगा। वहीं, उपमा में सूजी के साथ तेल, मौसमी सब्जियां, मूंगफली, मसाले और नमक शामिल किए जाएंगे।
हलवे पर सात, उपमा पर चार रुपये खर्च
निर्धारित लागत के अनुसार मीठा हलवा तैयार करने पर प्रति बच्चा सात रुपये और नमकीन उपमा पर चार रुपये खर्च किए जाएंगे। खाद्य सामग्री की खरीद स्थानीय स्तर पर की जाएगी। सामग्री की गुणवत्ता, पैकिंग और एक्सपायरी डेट का ध्यान रखने के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी होगा।
रसोइयों को मिलेगा अतिरिक्त पारिश्रमिक
पूरक पोषण आहार तैयार करने और बच्चों को वितरित करने की जिम्मेदारी स्कूलों में कार्यरत रसोइयों की होगी। इसके लिए प्रति छात्र, प्रति विद्यालय दिवस दो रुपये अतिरिक्त पारिश्रमिक देने का प्रावधान बताया गया है। यह राशि स्कूल में कार्यरत रसोइयों के बीच समान रूप से बांटी जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी।
सोशल ऑडिट से होगी निगरानी
योजना के प्रभावी संचालन के लिए भोजन वितरण, इस्तेमाल की गई सामग्री और लाभार्थी बच्चों का रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया है। निगरानी में टास्क फोर्स, सोशल ऑडिट, विद्यालय प्रबंध समिति और माता समूह की भूमिका होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अतिरिक्त पोषण आहार तय मानकों के अनुसार तैयार हो और पात्र बच्चों तक पहुंचे। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद भोजन की गुणवत्ता, नियमित वितरण और रसोइयों को अतिरिक्त पारिश्रमिक के भुगतान की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।


