- कानपुर में कचहरी से रजिस्ट्री और तहसील तक काम प्रभावित; पश्चिमी यूपी के 22 जिलों व सभी तहसीलों में अधिवक्ताओं ने किया न्यायिक कार्य का बहिष्कार
भारत 19
कानपुर। प्रदेश के अधिवक्ताओं के हर बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने के फैसले के बाद पहले बुधवार को इसका व्यापक असर दिखाई दिया। कानपुर में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का पूर्ण बहिष्कार किया, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों और सभी तहसीलों में भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। इसके चलते अदालतों के साथ कचहरी से जुड़े दूसरे कामकाज पर भी असर पड़ा।
कानपुर में कचहरी परिसर में पसरा सन्नाटा
बुधवार सुबह कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता एकत्र हुए। इसके बाद अलग-अलग समूहों में अदालतों, रजिस्ट्री कार्यालय और तहसील की ओर जाकर न्यायिक कार्य से विरत रहने की अपील की गई। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार के चलते कचहरी परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां काफी कम रहीं। टाइपिस्ट, स्टांप वेंडर और फोटोकॉपी की ज्यादातर दुकानें भी बंद रहीं।
पश्चिमी यूपी के 22 जिलों में भी बहिष्कार
कानपुर में हुए प्रांतीय सम्मेलन के फैसले के समर्थन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हाईकोर्ट बेंच स्थापना संघर्ष समिति भी सामने आई। समिति के समर्थन के बाद 22 जिलों और उनकी सभी तहसीलों में बुधवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया गया। अदालतों के साथ तहसील और रजिस्ट्री कार्यालयों में भी कामकाज प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
58 जिला बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधि हुए थे शामिल
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में 10 और 11 सितंबर को कानपुर में हुआ दो दिवसीय प्रांतीय अधिवक्ता सम्मेलन है। इसमें प्रदेश की 58 जिला बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। सम्मेलन में मांगें स्वीकार होने तक हर बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
हाईकोर्ट बेंच और अधिवक्ता सुरक्षा समेत कई मांगें
सम्मेलन में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ में हाईकोर्ट बेंच, अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम लागू करने, एडवोकेट एक्ट में प्रस्तावित संशोधनों पर अधिवक्ता संगठनों से व्यापक परामर्श समेत कई मांगों पर चर्चा हुई थी। हड़ताल से जुड़े फैसले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट और बार काउंसिल से जुड़े हड़ताल संबंधी निर्देशों का विरोध भी शामिल है।


