- कानपुर की उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा में शिक्षा के भविष्य पर मंथन; भारतीय ज्ञान परंपरा, एआई, कौशल विकास और रोजगार से लेकर प्रदूषण-बाढ़ के पूर्वानुमान तक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
भारत 19
कानपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा में सूचनाओं और सीखने के तरीके को तेजी से बदल रहा है, लेकिन केवल सूचना उपलब्ध होना ज्ञान या प्रज्ञा की गारंटी नहीं है। विवेक, अनुभव और नैतिक निर्णय की क्षमता के लिए मानवीय मार्गदर्शन जरूरी रहेगा। शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा में विशेषज्ञों ने शिक्षा के इसी बदलते स्वरूप पर मंथन किया। दो दिवसीय सभा में शिक्षा में एआई के इस्तेमाल के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा में समान अवसर और टिकाऊ शहरों की चुनौतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने तकनीक को शिक्षा और विकास का साधन बनाने के साथ उसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
एआई पढ़ाएगा, लेकिन निर्णय की भूमिका इंसान की
‘गुरु-परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस : ज्ञान से प्रज्ञा की ओर’ विषय पर चर्चा में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अर्नब भट्टाचार्य की मौजूदगी में एआई के शिक्षा पर प्रभाव को लेकर विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि एआई सूचनाओं को तेजी से उपलब्ध करा सकता है और व्यक्तिगत शिक्षण को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अनुभव, विवेक और नैतिक निर्णय जैसी क्षमताओं के विकास में मानवीय मार्गदर्शन की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। एआई के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के स्वरूप में आने वाले बदलाव और इसके जिम्मेदार उपयोग पर भी चर्चा हुई।

डिग्री से आगे कौशल और रोजगार पर जोर
पीपीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार ने उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल में शिक्षा को प्रमुख सूचकांक बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने दूरस्थ और आकांक्षी जिलों में नए डिग्री कॉलेज, बालिका शिक्षा, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल संसाधनों के विस्तार की आवश्यकता बताई। उन्होंने शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद कौशल अंतर को दूर करने पर जोर दिया। बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने को उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण चुनौती बताया गया।
एआई से पहले दिख सकती है बाढ़ और प्रदूषण की मार
ज्ञान सभा में एआई के इस्तेमाल को शिक्षा से बाहर विकास और शहरी प्रबंधन से भी जोड़ा गया। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर सच्चिदानंद त्रिपाठी ने एआई और टिकाऊ शहरों पर चर्चा करते हुए बताया कि एआई आधारित प्रणालियों से वायु प्रदूषण, बाढ़ और यातायात जैसी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिल सकती है। इससे शहरी प्रशासन को जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में तकनीकी सहायता मिलने की संभावना है।
विकास में मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का विकास देश के विकास से जुड़ा है। उन्होंने विकास को केवल आर्थिक और भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार शिक्षा में मूल्य, संस्कार, कर्तव्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व भी शामिल होने चाहिए। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया।
तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर जोर
एचबीटीयू के कुलपति प्रो. शमशेर सिंह ने तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता, अच्छे शिक्षकों और नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तकनीकी संस्थानों में बदलती जरूरतों के अनुरूप शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय को जरूरी बताया। दो दिवसीय ज्ञान सभा में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विभिन्न सत्रों में संवाद में भाग लिया।


