- 6400 नकली ₹20 के सिक्के और छह मशीनें बरामद; रोज 10-12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता, लोहे-जस्ता बेस पर पीतल की कोटिंग कर तैयार करते थे नकली सिक्के
भारत 19
सहारनपुर में पुलिस ने नकली सिक्के बनाने और उन्हें कई राज्यों में खपाने वाले इंटरस्टेट गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस की संयुक्त टीम ने एक ऐसे ठिकाने का खुलासा किया है, जहां मशीनों के जरिए बड़ी संख्या में नकली ₹20 के सिक्के तैयार किए जा रहे थे। मौके से 6,400 नकली सिक्के, छह मशीनें, सिक्के बनाने की डाई और बड़ी मात्रा में उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक इस सेटअप में रोजाना करीब 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता थी।
जांच में नकली सिक्के तैयार करने का तरीका भी सामने आया है। आरोपी पहले लोहे-जस्ता की प्लेट से सिक्के का बेस तैयार करते थे। इसके बाद उस पर पीतल की कोटिंग की जाती थी और मशीन व डाई की मदद से सिक्के पर डिजाइन और निशान बनाए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद सिक्के को देखने में असली जैसा बनाना था।
मशीन, डाई और ओवन तक मिला पूरा सेटअप
पुलिस की कार्रवाई में सिर्फ तैयार नकली सिक्के ही नहीं मिले, बल्कि उन्हें बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पूरा सेटअप भी बरामद हुआ। छह सिक्का बनाने वाली मशीनों के साथ लोहे की डाई, बिना मोहर वाली डाई, मोहर लगी डाई, डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के उपकरण, ओवन और इलेक्ट्रॉनिक कांटा भी मिला है। मौके से मिले उपकरणों से पुलिस को अंदाजा है कि यह काम छोटे स्तर पर कुछ सिक्के तैयार करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके लिए बाकायदा उत्पादन व्यवस्था तैयार की गई थी।
लोहे-जस्ता प्लेट से बनाते थे सिक्के का बेस
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी सबसे पहले लोहे और जस्ता मिश्रित प्लेट की कटिंग कर सिक्के का आधार तैयार करते थे। इसके बाद उस पर पीतल की परत चढ़ाई जाती थी। अंतिम चरण में मशीन और डाई की सहायता से सिक्के पर डिजाइन और जरूरी निशान उकेरे जाते थे। इस तरह तैयार सिक्के को सामान्य नकदी के बीच चलाने की कोशिश की जाती थी। यही प्रक्रिया इस मामले को खास बनाती है, क्योंकि गिरोह के पास सिक्के तैयार करने से लेकर उनकी फिनिशिंग तक के लिए अलग-अलग उपकरण मौजूद थे।
रोज 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता
पुलिस के अनुसार बरामद मशीनों की क्षमता से प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार किए जा सकते थे। इस क्षमता ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस सेटअप से वास्तव में कितने सिक्के तैयार किए गए और इनमें से कितने बाजार में पहुंचाए जा चुके हैं।
शराब ठेकों और टोल प्लाजा पर खपाते थे सिक्के
जांच में पुलिस को नकली सिक्कों को बाजार में खपाने के नेटवर्क के बारे में भी जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक गिरोह शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे कारोबारियों के जरिए नकली सिक्कों को चलाने की कोशिश करता था। नकली सिक्के सामान्य नकदी में मिलाकर बाजार में पहुंचाए जाते थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो सके। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो तैयार सिक्कों को अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने और उन्हें चलाने में मदद करते थे।
कई राज्यों तक फैला था नकली सिक्कों का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक पकड़े गए आरोपियों के संपर्क उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब और बिहार समेत अन्य राज्यों तक बताए गए हैं। सहारनपुर में नया ठिकाना तैयार करने की तैयारी के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की। इससे जांचकर्ताओं को आशंका है कि सहारनपुर सिर्फ उत्पादन का नया केंद्र था और गिरोह का सप्लाई नेटवर्क पहले से दूसरे राज्यों में सक्रिय हो सकता है।
सात रजिस्टर खोलेंगे पूरे नेटवर्क का राज
पुलिस को कार्रवाई के दौरान सात हिसाब-किताब रजिस्टर भी मिले हैं। इन रजिस्टरों को जांच में अहम माना जा रहा है। इनमें दर्ज नाम, संपर्क और लेन-देन की जानकारी से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि नकली सिक्के किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
70 करोड़ के दावे की भी होगी जांच
पूछताछ में आरोपियों की ओर से 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि पुलिस के शुरुआती आकलन में यह रकम करीब 10 से 11 करोड़ रुपये बताई गई है। इसलिए 70 करोड़ रुपये के आंकड़े को फिलहाल अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। पुलिस बरामदगी, रजिस्टर, लेन-देन और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर वास्तविक रकम और नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
मुख्य आरोपी का पुराना कनेक्शन भी सामने आया
पुलिस के मुताबिक मामले का मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह पहले भी नकली सिक्कों से जुड़े मामले में जेल जा चुका है। पुलिस उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क और संपर्कों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का फोकस अब सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में सिक्के बनाने, सप्लाई करने और बाजार में चलाने की जिम्मेदारी किन-किन लोगों की थी।
6400 सिक्कों से आगे अब नेटवर्क की तलाश
सहारनपुर की कार्रवाई में 6,400 नकली सिक्कों की बरामदगी तत्काल उपलब्धि है, लेकिन पुलिस के सामने असली चुनौती इस नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचने की है। मशीनों की क्षमता, बरामद डाई, रजिस्टर और दूसरे राज्यों से जुड़े संपर्क इस ओर इशारा करते हैं कि मामला केवल कुछ हजार सिक्कों तक सीमित नहीं हो सकता। अब जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि कितने नकली सिक्के तैयार हुए, कितने बाजार में पहुंचे और इस खेल में कितने लोग शामिल हैं।


