- महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ और दिल्ली में 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं; 30 सितंबर तक दावा-आपत्ति का मौका, 4 नवंबर को अंतिम सूची
भारत 19
नई दिल्ली। महाराष्ट्र और दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद करोड़ों नामों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ और दिल्ली में 47.56 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन मतदाताओं का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से कट गया है। चुनाव आयोग ने 30 सितंबर 2026 तक दावा-आपत्ति का मौका दिया है। दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट से बाहर
महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले करीब 9.78 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से लगभग 7.71 करोड़ मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म्स (Enumeration Forms) प्राप्त हुए और उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया गया। करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त नहीं हो सके या वे ‘ अनकलेक्टेबल ईएफ (Uncollectable EF)’ श्रेणी में रहे। यही वजह है कि इन मतदाताओं के नाम मौजूदा ड्राफ्ट सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा स्थायी रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं है। पात्र मतदाता दावा दाखिल कर अपना नाम अंतिम सूची में शामिल करा सकते हैं।
दिल्ली में 47.56 लाख मतदाता सूची से बाहर
दिल्ली में SIR से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे। इनमें लगभग 97.53 लाख मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म्स प्राप्त और डिजिटाइज किए गए। ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47,56,722 नाम शामिल नहीं हैं। यह दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग एक-तिहाई है। ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं आने के पीछे मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित, अनुपस्थित, डुप्लीकेट और अन्य श्रेणियों के रिकॉर्ड बताए गए हैं। इन मामलों में अंतिम निर्णय दावा-आपत्ति और सत्यापन प्रक्रिया के बाद होगा।
नाम नहीं है तो मतदाता क्या करें
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिलने पर मतदाता को इसे अंतिम फैसला नहीं मानना चाहिए। SIR प्रक्रिया में दावा दाखिल करने का अधिकार दिया गया है। पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत फार्म 6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा दाखिल कर सकते हैं। वहीं ड्राफ्ट सूची में किसी अपात्र व्यक्ति का नाम होने पर आपत्ति भी दर्ज कराई जा सकती है। दावे की जांच संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी करेंगे। दस्तावेज और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं।
30 सितंबर तक दावा-आपत्ति का मौका
महाराष्ट्र और दिल्ली में ड्राफ्ट सूची जारी होने के साथ दावा और आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक अपने नाम से संबंधित दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस दौरान मतदाताओं को अपनी जानकारी, पता और मतदाता सूची में दर्ज विवरण की जांच कर लेनी चाहिए। नाम नहीं मिलने पर निर्धारित समयसीमा के भीतर दावा दाखिल करना महत्वपूर्ण होगा।
चार नवंबर को आएगी अंतिम वोटर लिस्ट
ड्राफ्ट सूची के बाद दावा-आपत्तियों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम SIR मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। इसलिए फिलहाल महाराष्ट्र के 2.07 करोड़ और दिल्ली के 47.56 लाख के आंकड़े को अंतिम रूप से बाहर किए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जा सकता। अंतिम सूची में कितने नाम जुड़ते या बाहर रहते हैं, यह दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
SIR में किन नामों की होती है जांच
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और ऐसे रिकॉर्ड की पहचान करना है जो अब पात्र नहीं हैं। इसमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाता, डुप्लीकेट प्रविष्टियां और अन्य संदिग्ध या अपात्र रिकॉर्ड की जांच की जाती है। इसके लिए बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं से Enumeration Form प्राप्त करते हैं और उपलब्ध पुराने चुनावी रिकॉर्ड से उनका मिलान किया जाता है। जिन रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं हो पाता, वे ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो सकते हैं। लेकिन ड्राफ्ट सूची से बाहर रह जाना अंतिम निष्कासन नहीं है। दावा और सत्यापन की प्रक्रिया इसी वजह से महत्वपूर्ण है।
महाराष्ट्र-दिल्ली के आंकड़ों पर सियासत तेज
दोनों राज्यों की ड्राफ्ट सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम नहीं आने से SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज होना तय माना जा रहा है। विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका जताता रहा है। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अन्य अपात्र रिकॉर्ड की पहचान करना है। अब राजनीतिक दावों के बीच असली तस्वीर 30 सितंबर तक आने वाले दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद सामने आएगी।
करोड़ों नाम बाहर, लेकिन अंतिम फैसला बाकी
महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ और दिल्ली में 47.56 लाख नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होना चुनावी लिहाज से बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इसे सीधे तौर पर “करोड़ों वोटरों के नाम काट दिए गए” कहना अभी सही नहीं होगा। क्योंकि मौजूदा सूची ड्राफ्ट है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया है। अब 30 सितंबर तक आने वाले दावों और उसके बाद होने वाली जांच यह तय करेगी कि इन आंकड़ों में से कितने नाम अंतिम मतदाता सूची में वापस शामिल होते हैं।

