- 18 किलोमीटर पैदल चलकर 18 जुलाई को डीएम तक पहुंची थी फरियाद; दो महीने बाद डीएम खुद पहुंचे घर, पक्का मकान, रोजगार और सरकारी योजनाओं का मिला सहारा
भारत 19
कानपुर। 18 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी फरियाद जिलाधिकारी तक पहुंचाने वाली रिंकी मिश्रा की जिंदगी में दो महीने में बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। 18 जुलाई को घाटमपुर के संपूर्ण समाधान दिवस में रिंकी अपनी समस्याएं लेकर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह से मिली थी। शनिवार को वह खुद बिरसिंहपुर स्थित उसके घर पहुंचे। यहां कच्चे मकान की जगह हो रहे पक्के निर्माण का काम देखा और परिवार का हाल जाना। जन सहयोग से बन रहे मकान की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और जल्द लिंटर डाले जाने की तैयारी है। रिंकी के लिए आवास के साथ रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं का भी इंतजाम हुआ है।
पति की मौत के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी
41 वर्षीय रिंकी के पति राजीव मिश्रा की करीब 10 वर्ष पहले आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। बड़ी बेटी 16 वर्ष की है और दिव्यांग होने के कारण उसे लगातार देखभाल की जरूरत है। छोटी बेटी अदिति 14 वर्ष की है। स्थायी आय का साधन नहीं होने से परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ बेटियों की पढ़ाई, इलाज और भविष्य की चिंता थी।
रिंकी को मिला घर के पास रोजगार
रिंकी को घर के नजदीक प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के रूप में रोजगार मिला है। इससे परिवार के लिए नियमित आय का जरिया बना है और रिंकी को आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला है। प्रशासन की पहल के बाद परिवार को पात्रता के अनुसार कई सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। अंत्योदय राशन कार्ड, रसोई गैस कनेक्शन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान कार्ड का लाभ परिवार को मिल रहा है। दिव्यांग बेटी का यूडीआईडी कार्ड भी बन गया है। दोनों बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से भी जोड़ा जा रहा है।
अदिति ने पढ़ाई में हासिल किया पहला स्थान
आर्थिक परेशानियों के बावजूद अदिति की पढ़ाई जारी रही। डीएम की पहल पर उसका पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में प्रवेश कराया गया और फीस भी जमा कराई गई। कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया। जिलाधिकारी के घर पहुंचने पर उसने आगे चलकर डीएम बनने और लोगों की मदद करने की इच्छा जताई।
18 जुलाई को पैदल पहुंची थी घाटमपुर
रिंकी की डीएम से पहली मुलाकात 18 जुलाई को घाटमपुर तहसील के संपूर्ण समाधान दिवस में हुई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद वह अपनी गाड़ी की ओर बढ़ रहे थे, तभी रिंकी उनसे मिलने पहुंची। वह बिरसिंहपुर से करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर आई थी। उसके पास प्रार्थना पत्र तक नहीं था। गांव के लोगों और शुभचिंतकों की सलाह पर वह अपनी समस्या बताने के लिए जिलाधिकारी तक पहुंची थी।
डीएम के निर्देश पर उसी दिन एसडीएम घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह रिंकी के घर पहुंचे। परिवार की तत्काल जरूरतों को देखते हुए मदद उपलब्ध कराने के साथ पात्रता के अनुसार योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब दो महीने बाद रिंकी के घर में पक्का मकान आकार ले रहा है, उसके पास रोजगार है और परिवार को सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं मिल रही हैं। जिलाधिकारी की शनिवार की मुलाकात में इस बदलाव की तस्वीर सामने आई।


