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कानपुर में विद्यार्थियों ने सीखी भारत की प्राचीन युद्धकला कलारीपयट्टू

कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन ने विष्णुपुरी स्थित सेठ मोतीलाल खेड़िया सनातन धर्म इंटर कॉलेज में एक दिवसीय कलारीपयट्टू प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की। इसमें विद्यार्थियों को आत्मरक्षा, लाठी संचालन और पारंपरिक भारतीय युद्धकला का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, शारीरिक दक्षता तथा आत्मरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। राष्ट्रीय खिलाड़ी सैयद अयूब ने प्रशिक्षण सत्र का संचालन किया।

KANPUR/ कानपुर में विद्यार्थियों को भारत की प्राचीन युद्धकला कलारीपयट्टू से परिचित कराने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 28 जून को विष्णुपुरी स्थित सेठ मोतीलाल खेड़िया सनातन धर्म इंटर कॉलेज में कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन की ओर से आयोजित हुआ।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्हें आत्मरक्षा, लाठी संचालन और शारीरिक संतुलन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

आत्मरक्षा और अनुशासन पर रहा विशेष जोर

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मरक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करना था। इसके साथ ही उन्हें भारतीय पारंपरिक युद्धकला के महत्व से भी अवगत कराया गया।

आयोजकों ने बताया कि आधुनिक समय में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रत्येक छात्र-छात्रा के लिए उपयोगी है। इसलिए ऐसी कार्यशालाएं युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

राष्ट्रीय खिलाड़ी सैयद अयूब ने दिया प्रशिक्षण

कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी सैयद अयूब ने विशेष प्रशिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कलारीपयट्टू की मूल तकनीकों के साथ लाठी (स्टाफ) संचालन, संतुलन, आक्रमण और बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाए।

इसके अलावा विद्यार्थियों को आत्मरक्षा के ऐसे कौशल भी बताए गए, जिनका उपयोग आपात परिस्थितियों में किया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अभ्यास किया और विभिन्न तकनीकों को सीखा।

कलारीपयट्टू केवल युद्धकला नहीं, जीवनशैली भी

प्रशिक्षण के दौरान सैयद अयूब ने कहा कि कलारीपयट्टू केवल एक प्राचीन युद्धकला नहीं है। यह अनुशासन, साहस, आत्मविश्वास, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास करने की सलाह दी। साथ ही कहा कि आत्मरक्षा का ज्ञान जीवन के हर चरण में उपयोगी साबित हो सकता है।

अतिथियों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम में विद्यालय के सचिव कमल किशोर गुप्ता और प्रधानाचार्या सुमन चंदोला ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण बेहद आवश्यक हो गया है।

वहीं, कानपुर ओलंपिक संघ के सचिव रजत आदित्य दीक्षित ने विद्यार्थियों को खेलों से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एसोसिएशन ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यशाला का आयोजन कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन के अध्यक्ष रमन श्रीवास्तव और सचिव अनिल कुशवाहा के नेतृत्व में किया गया।

आयोजन को सफल बनाने में महिला विंग इंचार्ज प्रीति शुक्ला, मोहम्मद जीशान, स्वाती कुशवाहा, ओम प्रकाश, सूरजभान, अभिषेक बाजपेई, विराट, अभ्युदय शुक्ला, विक्रांत सिंह, सोनम, शिवानी और दिलीप गौर ने सक्रिय सहयोग दिया।

भविष्य में भी होंगे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम

कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों ने सभी प्रतिभागियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और आत्मरक्षा के गुण विकसित करते हैं।

कानपुर कलारीपयट्टू एसोसिएशन ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया। आयोजकों का मानना है कि इससे अधिक से अधिक युवा भारत की प्राचीन युद्धकला से जुड़ सकेंगे।

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