- कानपुर कैंट में 450 सैनिक परिवारों ने जाना मिलेट्स का महत्व, सीएसए वैज्ञानिकों ने पोषण, खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दी जानकारी
भारत 19
कानपुर। कानपुर कैंट में शनिवार को मिलेट्स यानी श्रीअन्न को लेकर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। 46 COY ASC (SUP) Type ‘A’ के तत्वावधान में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) के सहयोग से हुए कार्यक्रम में करीब 450 सैनिक परिवारों ने हिस्सा लिया। सेमिनार में श्रीअन्न को पोषण, स्वास्थ्य, समृद्धि और टिकाऊ कृषि का आधार बनाने पर जोर दिया गया। विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. महक सिंह ने कहा कि मिलेट्स पोषण सुरक्षा के साथ बदलती जलवायु परिस्थितियों में टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कृषि विज्ञानियों ने बताए श्रीअन्न के फायदे
सेमिनार में सीएसए के वैज्ञानिकों ने मिलेट्स की खेती, पोषण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिए। डॉ. अखिलेश मिश्र ने मिलेट्स को “सुपरफूड और भविष्य का अन्न” बताते हुए इनके पोषण गुणों और स्वास्थ्य उपयोगिता की जानकारी दी। डॉ. विनोद प्रकाश ने श्रीअन्न की प्रमुख फसलों, उनके महत्व और मौजूदा कृषि परिदृश्य में संभावनाओं पर जानकारी दी। वहीं मिलेट ब्रीडर डॉ. श्वेता ने वैज्ञानिक खेती, उत्पादन और टिकाऊ कृषि में श्रीअन्न की भूमिका समझाई।
खेती से प्रसंस्करण तक श्रीअन्न की संभावनाएं समझीं
कार्यक्रम में श्रीअन्न के उत्पादन के साथ उसके प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर भी चर्चा हुई। डॉ. रश्मि सिंह ने मिलेट्स के प्रसंस्करण और उनसे तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मूल्य संवर्धन के जरिए श्रीअन्न को पोषण के साथ आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ा जा सकता है। विशेषज्ञों ने श्रीअन्न की खेती और इसके विभिन्न उत्पादों से जुड़ी संभावनाओं के बारे में सैनिक परिवारों को जानकारी दी।
दैनिक आहार में श्रीअन्न शामिल करने पर संवाद
करीब 450 सैनिक परिवारों ने विशेषज्ञों की जानकारी को रुचि के साथ सुना। कार्यक्रम में श्रीअन्न को दैनिक आहार का हिस्सा बनाने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने को लेकर सैन्य अधिकारियों, सैनिक परिवारों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच संवाद हुआ। सेमिनार में श्रीअन्न के पोषण संबंधी महत्व के साथ इसकी खेती, प्रसंस्करण और उपयोग से जुड़े पहलुओं को भी समझाया गया। कार्यक्रम के समापन पर ब्रिगेडियर ने विश्वविद्यालय से आए वैज्ञानिकों का सम्मान एवं अभिनंदन किया। सेमिनार में श्रीअन्न को पोषण सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और मूल्य संवर्धन से जोड़ने तथा इसके व्यापक उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।


