कानपुर। सुबह के 9 बजते ही सड़कें तपने लगती हैं। दोपहर आते-आते ऐसा महसूस होता है मानो आसमान से आग बरस रही हो। घरों की दीवारें तवे की तरह गर्म हैं, सड़कें धधक रही हैं और गर्म हवाएं लोगों का दम घोंट रही हैं। उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में इस बार गर्मी ने वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि गर्मी बढ़ क्यों रही है, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि आखिर धरती इतनी तेजी से क्यों तप रही है? मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि बदलती जलवायु का खतरनाक संकेत है। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है और इंसानों की गलतियां इसे और भयावह बना रही हैं। पहले मई-जून में पड़ने वाली लू अब अप्रैल से ही कहर बरपाने लगी है।

पेड़ कटे, कंक्रीट बढ़ा..शहर बन गए हीट मशीन
विशेषज्ञ बताते हैं कि शहरों में तेजी से पेड़ों की कटाई हुई है। उनकी जगह सीमेंट-कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए। बड़ी-बड़ी इमारतें दिनभर सूरज की गर्मी सोखती हैं और रातभर उसे छोड़ती रहती हैं। यही कारण है कि अब रात में भी गर्मी कम नहीं होती। कानपुर, लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में हालात सबसे ज्यादा खराब इसलिए हैं क्योंकि यहां हरियाली लगातार कम हुई है। जहां पहले खुले मैदान और पेड़ थे, वहां अब सड़कें, मॉल और इमारतें खड़ी हैं। लोग गर्मी से बचने के लिए AC चला रहे हैं, लेकिन यही AC बाहर और ज्यादा गर्म हवा छोड़ रहे हैं। लाखों वाहन और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं वातावरण को गर्म कर रहा है। इससे धरती के चारों ओर ऐसी परत बन रही है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने देती। इसे वैज्ञानिक ग्रीनहाउस इफेक्ट कहते हैं। यही वजह है कि हर साल तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है।
बारिश कम, लू ज्यादा… मौसम का पूरा सिस्टम बिगड़ा
इस बार पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे और समय पर बारिश नहीं हुई। हवा में नमी कम होने से जमीन तेजी से गर्म हुई और लू का असर कई गुना बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले वर्षों में हीटवेव यानी लू की अवधि और लंबी हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों, मजदूरों और बाहर काम करने वालों पर सबसे ज्यादा खतरा है। लगातार गर्मी से डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि पेड़ों की कटाई, प्रदूषण और बेतहाशा शहरीकरण नहीं रुका तो आने वाले वर्षों में भारत के कई शहर रहने लायक तक नहीं बचेंगे। तापमान 50 डिग्री के पार पहुंचना अब असंभव नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का साफ कहना है “यह सिर्फ मौसम नहीं बदल रहा, इंसान खुद अपनी धरती को भट्ठी बना रहा है।”



