- इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में 40 विद्यार्थियों की 50 म्यूरल पेंटिंग बनीं आकर्षण का केंद्र, देवी-देवताओं, लोक परंपराओं और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का कलात्मक चित्रण, 14 अक्टूबर तक सुबह 11 से शाम पांच बजे तक देख सकेंगे प्रदर्शनी
भारत 19/ कानपुर। रंगों में भारतीय संस्कृति, कलाकृतियों में धार्मिक आस्था और म्यूरल पेंटिंग में लोक परंपराओं की झलक। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में सोमवार को शुरू हुई ‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी 2026–27’ में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के विविध रंग देखने को मिले। बीएफए तृतीय वर्ष के करीब 40 विद्यार्थियों की 50 म्यूरल पेंटिंग दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनीं। इनमें देवी-देवताओं के जीवंत चित्रण से लेकर पारंपरिक प्रतीकों और लोककलाओं की अनूठी अभिव्यक्ति देखने को मिली। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रो. कृष्ण चंद्र वाजपेयी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
देवी-देवताओं और लोक परंपराओं को रंगों में उतारा
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और सृजनात्मक कौशल के जरिए भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत को नया रूप दिया है। देवी-देवताओं के आकर्षक चित्रण, पारंपरिक प्रतीकों और म्यूरल पेंटिंग की बारीकियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। रंगों, आकृतियों और कलात्मक संयोजन के माध्यम से प्रत्येक कलाकृति भारतीय आस्था और परंपराओं से जुड़ी अलग कहानी प्रस्तुत करती नजर आई।
विद्यार्थियों की कला-दृष्टि और रचनात्मकता की सराहना
मुख्य अतिथि प्रो. कृष्णचंद्र वाजपेयी ने विद्यार्थियों की मेहनत, लगन और कलात्मक अभिव्यक्ति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कला प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ कला-दृष्टि विकसित करने का अवसर देती हैं। ऐसे आयोजन नए प्रयोगों और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों की पेंटिंग में देवी-देवताओं के जीवंत एवं आकर्षक चित्रण की सराहना की।
भारतीय लोककलाओं का संरक्षण और संवर्धन जरूरी
इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने कहा कि भारतीय लोककलाएं देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है। विद्यार्थियों को पारंपरिक कलाओं से जोड़ना और उनमें कला के प्रति रुचि विकसित करना संस्थान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां युवा कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के साथ उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाने का मंच भी उपलब्ध कराती हैं।
परंपरा और आधुनिक कला का अनूठा संगम
प्रदर्शनी के संयोजक एवं क्यूरेटर डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि ‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी’ का उद्देश्य भारतीय पारंपरिक और लोककलाओं को आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ना है। विद्यार्थियों की कलाकृतियां उनके निरंतर अभ्यास, कल्पनाशीलता और कला के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं। यह आयोजन युवा कलाकारों को अपनी रचनात्मक दृष्टि विकसित करने और सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का अवसर दे रहा है।
14 अक्टूबर तक सुबह 11 से शाम पांच बजे तक प्रदर्शनी
‘चित्राक्षी समूह कला प्रदर्शनी 2026–27’ का आयोजन 12 से 14 अक्टूबर तक किया जा रहा है। कला प्रेमी और आम दर्शक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक प्रदर्शनी का अवलोकन कर सकते हैं। कार्यक्रम में प्रो. शुभम शिवा, डॉ. राज कुमार सिंह, जे.बी. यादव, तनीषा वधावन, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. विजय त्रिपाठी, विनय सिंह, प्रिया मिश्रा और कीर्ति वर्मा सहित अन्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का योगदान रहा।


