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आजम खां पर ED का शिकंजा, जौहर की फंडिंग पर नजर


– रामपुर से दिल्ली तक 10 ठिकानों पर तलाशी, सरकारी ठेकों की रकम के कथित डायवर्जन से ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी तक पहुंची रकम की पड़ताल

भारत 19
रामपुर/लखनऊ। आजम खां से जुड़ी मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट की वित्तीय कहानी बुधवार को फिर जांच एजेंसियों के घेरे में आ गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में करीब 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी शुरू की। इस बार जांच का अहम सिरा केवल ट्रस्ट के खातों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के कथित डायवर्जन और उसके बाद इस धन के ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों में इस्तेमाल तक पहुंच रहा है।

ED ने यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत की है। एजेंसी की टीमें वित्तीय दस्तावेज, बैंकिंग लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। तलाशी अभियान बुधवार को जारी था और देर दोपहर तक एजेंसी की ओर से बरामदगी का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया था।

ठेकों की रकम से संपत्तियों तक पहुंची कथित कड़ी

कार्रवाई का सबसे अहम पहलू सरकारी ठेकों से जुड़े धन का कथित रास्ता है। ED की जांच में यह देखा जा रहा है कि निजी ठेकेदारों के जरिए सरकारी ठेकों से हासिल रकम कथित तौर पर किस तरह आगे पहुंची और क्या उसका इस्तेमाल जौहर ट्रस्ट अथवा यूनिवर्सिटी से जुड़ी संपत्तियों और निर्माण कार्यों में हुआ। यानी जांच का फोकस सिर्फ यह पता लगाने पर नहीं है कि पैसा किस खाते में आया। एजेंसी कथित तौर पर पैसे के स्रोत, उसके हस्तांतरण और अंतिम इस्तेमाल के बीच वित्तीय कड़ी तलाश रही है। यही कड़ी अगर दस्तावेजों से स्थापित होती है तो मौजूदा मनी लॉन्ड्रिंग जांच के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि अभी यह जांच का विषय है और इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

जांच का दायरा रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली तक 

ED की कार्रवाई का दायरा जौहर यूनिवर्सिटी के रामपुर परिसर तक सीमित नहीं रहा। एजेंसी ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली के जामिया नगर में जुड़े परिसरों को तलाशी के दायरे में लिया। कुल करीब 10 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की गई। सहारनपुर और दिल्ली के परिसरों को जांच में शामिल किए जाने से संकेत मिलता है कि एजेंसी कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े व्यापक नेटवर्क और संबंधित लोगों के रिकॉर्ड को भी जोड़कर देख रही है।

जौहर यूनिवर्सिटी पहले से जांचों के घेरे में

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना 2006 में हुई थी और इसे आजम खां से जुड़े जौहर ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। यूनिवर्सिटी लंबे समय से जमीन, निर्माण, प्रशासन और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े विवादों के कारण जांच एजेंसियों के रडार पर रही है। जून में आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद भी ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति को लेकर दबाव बढ़ा था। द पायनियर की जून की रिपोर्ट के अनुसार आयकर विभाग ने ट्रस्ट की 12A कर-छूट स्थिति वापस लेने की कार्रवाई की थी और विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोप सामने आने की बात कही गई थी।

38 इमारतों का विवाद भी पृष्ठभूमि में

ED की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब जौहर यूनिवर्सिटी पहले से ही निर्माण संबंधी विवाद का सामना कर रही है। यूनिवर्सिटी परिसर की 38 इमारतों को लेकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का मामला सामने आया था, जिस पर बाद में अंतरिम राहत मिली। इस तरह यूनिवर्सिटी के आसपास चल रहे कानूनी विवादों में अब वित्तीय लेन-देन और कथित मनी ट्रेल का पहलू भी प्रमुख हो गया है।

तलाशी के नतीजे तय करेंगे अगली कार्रवाई

फिलहाल ED की कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तलाशी के दौरान मिलने वाले दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य हैं। यदि एजेंसी को ऐसे रिकॉर्ड मिलते हैं जो कथित ठेका राशि, निजी ठेकेदारों, ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों के बीच वित्तीय संबंध स्थापित करते हैं, तो जांच आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर, सिर्फ तलाशी को आरोप साबित होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

ED की कार्रवाई के साथ सियासी तापमान भी बढ़ा

छापेमारी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि भाजपा की ओर से जांच एजेंसी की कार्रवाई को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच का हिस्सा बताया गया है। फिलहाल आज की कार्रवाई का असली महत्व 10 ठिकानों पर हुई तलाशी से ज्यादा उस कथित मनी ट्रेल में है, जिसे ED जोड़ने की कोशिश कर रही है। अगर ठेकों की रकम से लेकर जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों तक धन के प्रवाह का दस्तावेजी आधार मिलता है, तो आज की छापेमारी इस मामले में जांच की दिशा बदलने वाली कार्रवाई साबित हो सकती है।

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