– एआई मंथन 2.0 में आईआईटी मंडी के विशेषज्ञ ने कहा- ब्लू-कॉलर और व्हाइट-कॉलर का फर्क घट रहा, सोचने-समझने वाले काम भी एआई के दायरे में; शिक्षा, रोजगार और सेवा क्षेत्र में तेजी से बढ़ेगा असर
भारत 19
कानपुर। मशीनों ने औद्योगिक दौर में इंसान के शारीरिक श्रम का विकल्प तैयार किया था। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई इंसान के सोचने, विश्लेषण करने और निर्णय लेने वाले कामों में दखल बढ़ा रही है। इसका असर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजगार, शिक्षा और रोजमर्रा की सेवाओं तक पहुंचने वाला है। आईआईटी मंडी के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स से जुड़े डॉ. अमित शुक्ला ने एआई मंथन 2.0 में तकनीक के इस बदलते स्वरूप की तस्वीर सामने रखी।
उन्होंने कहा कि मानव समाज हर दौर में तकनीकी बदलावों के साथ खुद को ढालता रहा है। पहले रोजगार को ब्लू-कॉलर और व्हाइट-कॉलर के रूप में बांटकर देखा जाता था, लेकिन एआई के दौर में यह विभाजन तेजी से अप्रासंगिक हो रहा है। अब वे काम भी एआई के दायरे में आ रहे हैं, जिनमें मानवीय सोच, विश्लेषण और निर्णय क्षमता को जरूरी माना जाता था।
AI नई तकनीक भी विकसित कर रहा
डॉ. शुक्ला के मुताबिक एआई की भूमिका मौजूदा कामों को आसान बनाने तक सीमित नहीं है। इसकी क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं और यह नई तकनीकों तथा समस्याओं के समाधान विकसित करने में भी भूमिका निभा रहा है। इससे भविष्य में संज्ञानात्मक श्रम से जुड़े कई क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल सकते हैं।
किताब से ज्यादा स्क्रीन पर समय, शिक्षा के सामने नई चुनौती
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव पर उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में किताब पढ़ने की आदत घट रही है, जबकि सोशल मीडिया पर समय बढ़ रहा है। दूसरी ओर इंटरनेट और एआई ने विद्यार्थियों को बड़ी मात्रा में अध्ययन सामग्री, व्याख्यान और विशेषज्ञता तक पहुंच उपलब्ध करा दी है। ऐसे में पारंपरिक कक्षा और शिक्षक की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। डॉ. शुक्ला ने कहा कि एआई के दौर में विद्यार्थियों के लिए मूल अवधारणाओं की समझ, पढ़ने की आदत और आलोचनात्मक सोच को मजबूत रखना जरूरी है। तकनीक सीखने का प्रभावी माध्यम हो सकती है, लेकिन उस पर पूरी निर्भरता भविष्य की चुनौतियों का समाधान नहीं है।
सुरक्षा में ड्रोन का बढ़ेगा इस्तेमाल
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अस्पताल, होटल और सेवा क्षेत्र समेत रोजमर्रा की जिंदगी में रोबोट की मौजूदगी बढ़ेगी। सुरक्षा और निगरानी में एआई आधारित ड्रोन का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। ऐसे में चुनौती एआई को रोकने की नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं और सीमाओं को समझकर उसका मानव हित में जिम्मेदार इस्तेमाल सुनिश्चित करने की है।


