- INDIA ब्लॉक के 11 नेताओं ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को दी चुनौती, नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं मिले, कोर्ट फीस में ₹220 की कमी समेत रजिस्ट्री ने दर्ज कीं आपत्तियां
भारत 19/ नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के 11 नेताओं की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका प्रक्रियागत आपत्तियों में उलझ गई है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 कमियां दर्ज की हैं। इनमें नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं होना, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी और निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी जैसी आपत्तियां शामिल हैं। ये कमियां याचिका की दाखिला प्रक्रिया से जुड़ी हैं, इन्हें मामले के गुण-दोष पर अदालत का फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
राहुल और खड़गे समेत 11 नेताओं ने किए हस्ताक्षर
याचिका पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, राजद नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत, माकपा महासचिव एमए बेबी, भाकपा नेता डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर ने हस्ताक्षर किए हैं। याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है।
SIR प्रक्रिया पर रोक और स्वतंत्र जांच की मांग
विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है। याचिका में चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड तलब करने, मतदाता सूची का स्वतंत्र ऑडिट कराने और SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने जैसी मांगें की गई हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ये याचिकाकर्ताओं के आरोप और मांगें हैं; इन पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
मार्च के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे विपक्षी नेता
याचिका दाखिल करने से पहले राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने दिल्ली में मंडी हाउस से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग उठाई गई। राहुल गांधी और खड़गे बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और याचिका से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। रजिस्ट्री की आपत्तियों के बाद याचिका पर आगे की प्रक्रिया इन कमियों को दूर किए जाने पर निर्भर करेगी। रजिस्ट्री की आपत्तियों को याचिका खारिज होने या SIR पर अदालत के फैसले के रूप में देखना सही नहीं होगा।
