- DSGMC की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया केस, गुरुद्वारा परिसर में कथित राजनीतिक नारेबाजी और सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के आरोप, 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ विवाद
भारत 19/ नई दिल्ली। दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि पार्टी से जुड़े लोगों ने गुरुद्वारा परिसर में राजनीतिक नारेबाजी की और धार्मिक स्थल की मर्यादा का उल्लंघन किया। शिकायत में घटना से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कथित तौर पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के साथ सौंपे गए वीडियो की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।
CEC के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ विवाद
विवाद 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में सामने आई। घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों, AAP नेताओं और गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से अलग-अलग दावे किए गए। इसी घटनाक्रम के बाद DSGMC ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की
DSGMC ने शिकायत में लगाए गंभीर आरोप
DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारियों ने 11 अक्टूबर को नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपी। कमेटी ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो भी उपलब्ध कराए और फुटेज में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की। शिकायत के मुताबिक, AAP से जुड़े कार्यकर्ता और समर्थक कथित तौर पर गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए, बैनर-पोस्टर निकाले और राजनीतिक नारे लगाए। कमेटी का आरोप है कि इससे धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ और गुरु घर की मर्यादा का उल्लंघन हुआ। DSGMC ने पुलिस से यह भी पता लगाने की मांग की कि प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने के लिए किसने संगठित किया था।
सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने का भी आरोप
DSGMC ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि AAP नेताओं और विधायकों ने घटना से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट साझा कर पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से पेश किया और गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया। शिकायत में अरविंद केजरीवाल पर भी कथित तौर पर इस नैरेटिव का समर्थन करने और उसे आगे बढ़ाने का आरोप लगाया गया है। कमेटी ने पुलिस से वीडियो की जांच कर संबंधित व्यक्तियों की पहचान करने और यह पता लगाने की मांग की है कि घटना के पीछे किसकी भूमिका थी। पुलिस अब उपलब्ध फुटेज और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।
पुलिस के प्रवेश को लेकर AAP और DSGMC आमने-सामने
विवाद का दूसरा पहलू गुरुद्वारा परिसर में पुलिसकर्मियों के प्रवेश से जुड़ा है। AAP नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए गुरुद्वारे में दाखिल हुई। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। दूसरी ओर, DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि पुलिसकर्मी मुख्य दरबार हॉल में नहीं गए थे, बल्कि उस साझा रास्ते से गुजरे थे जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने के स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं। दिल्ली पुलिस ने भी स्पष्ट किया कि उसके कर्मी मुख्य दरबार हॉल में प्रवेश नहीं कर रहे थे, बल्कि साझा रास्ते से गुजरे थे। हालांकि, कालका ने पुलिसकर्मियों के वर्दी में परिसर में आने पर आपत्ति जताई।
AAP ने कमेटी की भूमिका पर उठाए सवाल
इस मामले में AAP नेताओं ने भी DSGMC के रुख पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं ने कमेटी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया। इस तरह मामला केवल गुरुद्वारा परिसर में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।
FIR के बाद वीडियो और भूमिका की जांच
FIR दर्ज होने के बाद दिल्ली पुलिस की जांच में अब यह स्पष्ट होना है कि गुरुद्वारा परिसर में क्या हुआ, प्रदर्शनकारियों के प्रवेश की परिस्थितियां क्या थीं और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में घटना को किस तरह प्रस्तुत किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में FIR की धाराओं और सभी नामजद व्यक्तियों की पूरी सूची का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों को अभी जांच के दायरे में ही देखा जाना चाहिए। पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयानों से मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।


