- कानपुर की आयुध इकाई में सालाना 30 करोड़ राउंड छोटे कैलिबर के गोला-बारूद के उत्पादन की क्षमता; रक्षा निर्यात में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को SIDM चैंपियन अवार्ड 2026, देश का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर
भारत 19/ कानपुर। कानपुर की आयुध निर्माण इकाई अब अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की रक्षा विनिर्माण क्षमता के साथ उसके निर्यात प्रदर्शन की पहचान भी बन रही है। छोटे कैलिबर के गोला-बारूद के सालाना 30 करोड़ राउंड उत्पादन की क्षमता वाले इस संयंत्र की अहमियत ऐसे समय में बढ़ी है, जब भारत अपने रक्षा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में जगह मजबूत कर रहा है। रक्षा निर्यात में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कंपनी को लगातार दूसरे साल SIDM चैंपियन अवार्ड मिला है। यह सम्मान वर्ष 2025 में कानपुर की इकाई को मिले विनिर्माण संबंधी पुरस्कार से अलग है और इस बार निर्यात प्रदर्शन पर केंद्रित है।
निर्यात प्रदर्शन पर अदाणी को लगातार दूसरे साल सम्मान
नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) के आठवें वार्षिक सत्र में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कंपनी को SIDM चैंपियन अवार्ड 2026 प्रदान किया। कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु भी मौजूद रहे। वर्ष 2025 में कानपुर की इकाई को डिजाइन, विनिर्माण और परीक्षण में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया था। इस बार कंपनी को रक्षा निर्यात में बेहतर प्रदर्शन के लिए पुरस्कार मिला है। लगातार दूसरे साल मिली पहचान कंपनी की रक्षा विनिर्माण और निर्यात गतिविधियों को रेखांकित करती है।
30 करोड़ राउंड सालाना उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र
कानपुर स्थित अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस का आयुध निर्माण परिसर छोटे कैलिबर के गोला-बारूद का महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र है। कंपनी के अनुसार, यहां सालाना 30 करोड़ राउंड बनाने की क्षमता है। संयंत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ रक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जरूरतों के अनुरूप गोला-बारूद तैयार किया जाता है। यहां उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के मानकों के अनुरूप उत्पादों का निर्माण भी किया जाता है। रक्षा निर्यात में विस्तार के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उत्पादों की गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों का पालन और तय समय पर आपूर्ति भी महत्वपूर्ण हैं। कानपुर की इकाई की उत्पादन क्षमता और परीक्षण सुविधाएं इसी जरूरत के लिहाज से कंपनी के लिए अहम हैं।
AI आधारित जांच और डिजिटल निगरानी से गुणवत्ता नियंत्रण
संयंत्र में स्वचालित उत्पादन प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित गुणवत्ता निरीक्षण, रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी के मुताबिक, खतरनाक सामग्रियों की मैनुअल हैंडलिंग घटाने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियां लागू की गई हैं। उत्पादन के विभिन्न चरणों की डिजिटल ट्रेसबिलिटी से विनिर्माण प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखने और गुणवत्ता की निगरानी करने में मदद मिलती है। परिसर में इलेक्ट्रॉनिक प्रेशर, वेलोसिटी एंड एक्शन टाइम (EPVAT) प्रणाली से लैस बैलिस्टिक परीक्षण रेंज भी है। कंपनी के अनुसार, इस सुविधा को नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (NABL) से मान्यता प्राप्त है। यहां गोला-बारूद का तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता आकलन किया जाता है।
भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पर
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने वर्ष 2029 तक सालाना रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप रक्षा उत्पाद तैयार करने और विदेशी बाजारों में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी मजबूत करने पर जोर है। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस को मिला पुरस्कार इसी विस्तार के बीच कंपनी के निर्यात प्रदर्शन को मिली पहचान है।
स्वदेशी विनिर्माण से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने पर जोर
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष राजवंशी ने कहा कि अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बदलती जरूरतों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उत्पादों के विकास और भारत में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कानपुर की औद्योगिक भूमिका अब स्थानीय उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां की आयुध इकाई की क्षमता, तकनीकी परीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्थाएं कंपनी के रक्षा विनिर्माण ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लगातार दूसरे साल मिला सम्मान कानपुर और भारत के रक्षा निर्यात के बीच इस औद्योगिक कड़ी को रेखांकित करता है।


