- तरंग शक्ति अभ्यास में पहली बार भारत पहुंचे अमेरिकी स्टील्थ फाइटर, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की टिप्पणी चर्चा में, बोले- कॉकपिट तक नहीं दिखाते अमेरिकी, भारत को F-35 बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं
भारत 19/ जोधपुर। भारत में अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों की पहली भागीदारी के बीच वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की एक टिप्पणी चर्चा में है। बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ के दौरान उन्होंने अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ कमांडर की मौजूदगी में कहा कि अमेरिकी अधिकारी भारतीय पक्ष को विमान के करीब तक नहीं जाने देते, जबकि भारत को इसे बेचने की बात की जा रही है। उनकी इस टिप्पणी ने भारत को F-35 की संभावित बिक्री और इस अत्याधुनिक विमान तक पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘विमान के पास नहीं आने देते, बेचने की बात करते हैं’
जोधपुर में अभ्यास के समापन के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एपी सिंह के साथ अमेरिकी प्रशांत वायुसेना कमान (PACAF) के प्रमुख जनरल केविन श्नाइडर भी मौजूद थे। F-35 की भारत को बिक्री के संभावित प्रस्ताव पर सवाल पूछे जाने पर सिंह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अमेरिकी पक्ष भारतीय अधिकारियों को विमान के पास तक नहीं आने देता, जबकि उसे भारत को बेचने की बात की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय अधिकारियों को F-35 का कॉकपिट नहीं दिखाया गया। हालांकि, भारतीय विमानों को अमेरिकी F-35 के साथ करीबी फॉर्मेशन में उड़ान भरने का अवसर मिला। अमेरिकी कमांडर ने संवेदनशील सैन्य तकनीक तक पहुंच के सवाल पर कहा कि सुरक्षा वर्गीकरण और तकनीक साझा करने के नियम तय करते हैं कि किस तरह की जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
भारत को F-35 बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं
वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने भारत को F-35 लड़ाकू विमान बेचने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं दिया है। यह बयान उन अटकलों के बीच महत्वपूर्ण है, जिनमें भारत की ओर से अमेरिकी स्टील्थ फाइटर खरीदने या प्रस्ताव ठुकराने की चर्चा हो रही थी। आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिलने की स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि भारत ने F-35 की खरीद का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। F-35 पांचवीं पीढ़ी का बहुउद्देशीय स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कम रडार दृश्यता, उन्नत सेंसर और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता इसे आधुनिक हवाई अभियानों के लिए अहम बनाती है। हालांकि, किसी विमान की खरीद का फैसला केवल उसकी तकनीकी क्षमता के आधार पर नहीं होता। इसमें लागत, परिचालन जरूरतों, तकनीक तक पहुंच और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों की भी भूमिका होती है।
तरंग शक्ति में पहली बार शामिल हुए छह F-35
अमेरिकी वायुसेना के छह F-35A लड़ाकू विमानों ने ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास में हिस्सा लिया। यह भारत में किसी सैन्य अभ्यास में F-35 की पहली भागीदारी थी। बहुराष्ट्रीय अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, परिचालन अनुभव साझा करना और आपसी तालमेल बेहतर करना था। अभ्यास में F-35 की मौजूदगी ने आधुनिक लड़ाकू विमान तकनीक और भारत की भविष्य की हवाई युद्ध क्षमता पर चर्चा को भी तेज किया। हालांकि, किसी अभ्यास में विमान की भागीदारी को उसकी खरीद के लिए औपचारिक पेशकश या भारत की ओर से खरीद संबंधी निर्णय नहीं माना जा सकता।
रूस के Su-57 पर भी अभी फैसला नहीं
वायुसेना प्रमुख ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रूस की ओर से प्रस्ताव दिए जाने की जानकारी है, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि विमान का मूल्यांकन किया जाएगा या नहीं। सरकार से निर्णय मिलने के बाद ही वायुसेना उसकी क्षमताओं और अपनी जरूरतों के अनुरूप उपयोगिता का आकलन कर सकेगी। भारत अपनी भविष्य की लड़ाकू विमान जरूरतों पर विचार करने के साथ स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है। ऐसे में F-35 और Su-57 को लेकर किसी संभावित खरीद पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले सरकारी निर्णय, तकनीकी मूल्यांकन और वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं को समझना जरूरी है।


