- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिए गए थे तीनों नेता, कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद मिली रिहाई; एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
भारत 19/ नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहाई मिली। तीनों नेताओं को शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचे विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले हुई थी कार्रवाई
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपनी मांगें उठाना चाहती थी। दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। शनिवार को दिल्ली पहुंचने पर पुलिसकर्मी विमान में दाखिल हुए और तीनों नेताओं को अपने साथ ले गए। इस कार्रवाई के बाद पार्टी ने हिरासत पर सवाल उठाए थे। पुलिस ने नेताओं के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की थी और रविवार को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
CJP की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों नेताओं को एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया। यह कार्रवाई निवारक निरोध से जुड़ी थी, जिसका उद्देश्य संभावित रूप से शांति भंग होने की आशंका को रोकना होता है। इसे किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
हिरासत के विरोध में प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान
तीनों नेताओं की हिरासत के बाद CJP ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया था। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। ऐसे में नेताओं की रिहाई के बावजूद दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद जारी रहने की संभावना है।


