- 2027 का विधानसभा चुनाव लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा बताया, नेताजी की चौथी पुण्यतिथि पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, बोले- वोटर लिस्ट में किसका नाम रहेगा, यह भी आप तय कर रहे हैं
भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, इटावा। समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि पर सैफई में समाधि स्थल पहुंचे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा बताते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के शासन में लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदान के अधिकार पर खतरा है। अखिलेश ने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी भाजपा जीत गई तो भविष्य में लोगों से वोट डालने का अधिकार तक छिन सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि करीब 50 दिन बाद वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तारीख सामने आ जाएगी। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश का आगामी चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की भी परीक्षा होगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से सक्रिय रहने तथा भाजपा को हराने के लिए जनसंपर्क तेज करने का आह्वान किया।
चुनाव आयोग पर सवाल, वोटर लिस्ट को लेकर आरोप
सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने और हटाने के मामले में मनमानी हो रही है। उन्होंने कहा, “आप तय कर रहे हैं कि किसका नाम वोटर लिस्ट में होगा और किसका नहीं।” उन्होंने चुनाव आयोग में बैठे लोगों पर बेईमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान के रास्ते पर नहीं चल रही है और उसका कथित भेदभावपूर्ण रवैया लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चल रहे राजनीतिक विरोध का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल इस आंदोलन में शामिल हैं और अब आम जनता को भी इस विषय की गंभीरता समझनी होगी।
बंगाल चुनाव का जिक्र कर चुनाव आयोग को घेरा
अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को बलपूर्वक हराया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सवाल चुनाव आयोग की भूमिका पर है, तो इस मामले में भाजपा बीच में क्यों आ रही है? उनके इन आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सियासी बहस को और तेज किया है। अखिलेश ने संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची, मतदान के अधिकार और चुनावी निष्पक्षता जैसे मुद्दे समाजवादी पार्टी के प्रमुख राजनीतिक एजेंडे में शामिल रहेंगे। हालांकि, भाजपा की जीत के बाद मतदान का अधिकार छिनने की आशंका अखिलेश यादव का राजनीतिक दावा है। इसे किसी तय घटनाक्रम या चुनाव आयोग के घोषित फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


