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यूपी की दुग्ध इकाइयों में दो ग्लाइकोल पर रोक

  • दूध और दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग में कूलेंट के इस्तेमाल पर FSDA का फैसला, प्रोपिलीन ग्लाइकोल होगा विकल्प

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग करने वाली इकाइयों में एथिलीन ग्लाइकोल और डायएथिलीन ग्लाइकोल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पाश्चुरीकरण और रेफ्रिजरेशन जैसी प्रक्रियाओं में कूलेंट के तौर पर इनके इस्तेमाल को लेकर यह फैसला किया है। विभाग के मुताबिक कुछ इकाइयों में इन रसायनों का इस्तेमाल सामने आया था।

कूलिंग सिस्टम में इस्तेमाल पर रोक

दूध की प्रोसेसिंग में पाश्चुरीकरण के बाद उसे तेजी से ठंडा करना और पूरी कोल्ड-चेन में निर्धारित तापमान बनाए रखना जरूरी होता है। इसके लिए हीट-एक्सचेंज और कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इन सिस्टम में कूलेंट सामान्य तौर पर अलग सर्किट में रहता है। लेकिन उपकरण में तकनीकी खराबी या लीकेज की स्थिति में कूलेंट के दूध के संपर्क में आने और क्रॉस-कंटैमिनेशन का जोखिम पैदा हो सकता है। इसी संभावित खाद्य-सुरक्षा जोखिम को देखते हुए FSDA ने दोनों रसायनों पर रोक लगाई है।

दोनों रसायनों से जुड़ी स्वास्थ्य चिंता

एथिलीन ग्लाइकोल का इस्तेमाल औद्योगिक कूलेंट और एंटीफ्रीज के रूप में किया जाता है। अमेरिकी एजेंसी फॉर टॉक्सिक सब्सटेंसेज एंड डिजीज रजिस्ट्री (ATSDR) के अनुसार इसके सेवन से गंभीर विषाक्तता हो सकती है। इसके प्रभाव से मेटाबॉलिक एसिडोसिस, तंत्रिका तंत्र पर असर और किडनी को नुकसान जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। डायएथिलीन ग्लाइकोल भी विषैला औद्योगिक रसायन है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों और किडनी को नुकसान के जोखिम को दर्ज किया है। हालांकि, किसी प्रसंस्करण इकाई में इन रसायनों का कूलेंट के रूप में इस्तेमाल होना अपने आप में वहां तैयार दूध या दुग्ध उत्पादों के दूषित होने का प्रमाण नहीं है।

प्रोपिलीन ग्लाइकोल होगा विकल्प

FSDA ने प्रोपिलीन ग्लाइकोल को इनके विकल्प के तौर पर बताया है। विभाग के अनुसार कई दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयां पहले से इसका इस्तेमाल कर रही हैं। प्रोपिलीन ग्लाइकोल एथिलीन ग्लाइकोल से अलग रासायनिक पदार्थ है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के दस्तावेजों में इसे INS 1520 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है और इसके लिए शुद्धता संबंधी मानक निर्धारित हैं। इसलिए इसके इस्तेमाल में भी निर्धारित गुणवत्ता और उपयुक्त ग्रेड का पालन जरूरी होगा।

कार्रवाई का फोकस उत्पादन प्रक्रिया

FSDA की कार्रवाई को दूध में एथिलीन ग्लाइकोल या डायएथिलीन ग्लाइकोल की व्यापक मिलावट मिलने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मुद्दा दुग्ध प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले कूलेंट की सुरक्षा से जुड़ा है। फैसले के बाद संबंधित इकाइयों को अपने कूलिंग सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की समीक्षा कर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। इससे उत्पादन प्रक्रिया में संभावित रासायनिक जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

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