- दो दिवसीय चिंतन शिविर में सरकार के कामकाज की मध्यावधि समीक्षा; सुशासन, योजनाओं की डिलीवरी, महिलाओं-युवाओं तक पहुंच और विकसित भारत@2047 की अगली प्राथमिकताओं पर मंथन
भारत 19
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के दो दिवसीय चिंतन शिविर में सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ ‘जन विश्वास से जन आधार’ को आगे की शासन-रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में सामने रखा गया। 23 और 24 सितंबर को नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में हुए मंथन में सुशासन, प्रशासनिक सुधार, सरकारी योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी, महिलाओं और युवाओं तक पहुंच तथा विकसित भारत@2047 की अगली प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। यह कवायद सरकार के मौजूदा कार्यकाल के अगले चरण के लिए प्राथमिकताएं तय करने की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा है।
‘जन विश्वास से जन आधार’ पर क्यों हुआ मंथन
चिंतन शिविर में ‘जन विश्वास से जन आधार’ को प्रमुख चर्चा के विषयों में रखा गया। इसके तहत सरकार की योजनाओं और नीतियों को लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने, सरकारी सेवाओं की डिलीवरी बेहतर करने और नागरिकों के साथ शासन के भरोसे को मजबूत करने के तरीकों पर विचार किया गया। इसका मतलब केवल नई योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि मौजूदा योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक लाभ को लेकर भी समीक्षा करना रहा। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक जवाबदेह तथा प्रभावी बने, इस पर जोर रहा।
दूसरे दिन भी मंत्रियों ने प्रस्तुतियां दीं
चिंतन शिविर के पहले दिन मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर चर्चा कराई गई। प्रधानमंत्री मोदी खुद अलग-अलग समूहों के पास पहुंचे और मंत्रियों के साथ सीधे बातचीत की। मंत्रालयों ने अपने कामकाज, उपलब्धियों और आगे की योजनाओं से संबंधित प्रस्तुतियां भी दीं। दूसरे दिन इस मंथन को आगे बढ़ाते हुए सरकार के कामकाज, योजनाओं की प्रगति और आगे की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। यह सामान्य कैबिनेट बैठक के बजाय केंद्र सरकार के कामकाज की व्यापक समीक्षा और विचार-विमर्श के लिए तैयार किया गया प्रारूप था।
योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर
चिंतन शिविर में सरकारी योजनाओं की डिलीवरी और अंतिम व्यक्ति तक पहुंच को महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। इसका उद्देश्य यह देखना रहा कि नीति बनने से लेकर उसके वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचने के बीच आने वाली अड़चनों को कैसे कम किया जाए। सरकार के सामने चुनौती योजनाओं की घोषणा के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी है। इसी वजह से सार्वजनिक सेवा वितरण, नीति लागू करने की गति और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार को चर्चा के केंद्र में रखा गया।
सुशासन और प्रशासनिक सुधार भी एजेंडे में
‘जन विश्वास’ को मजबूत करने के लिए सुशासन और प्रशासनिक सुधार को भी अहम माना गया। चर्चा में सरकारी कामकाज को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने तथा मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर विचार हुआ। सरकार पहले से मंत्रालयों के बीच कामकाज के अलग-अलग स्तरों पर समन्वय बढ़ाने, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और नीतियों के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने पर जोर देती रही है। चिंतन शिविर में इन्हीं प्रयासों को अगले चरण की प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा गया।
महिलाओं और युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी चर्चा
चिंतन शिविर के व्यापक एजेंडे में महिलाओं और युवाओं तक सरकारी योजनाओं की पहुंच भी शामिल रही। सरकार की कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ इन वर्गों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा उनसे संवाद बेहतर करने के तरीकों पर चर्चा हुई। इसके साथ सरकार के काम और योजनाओं की जानकारी लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए कम्युनिकेशन को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया।
विकसित भारत@2047 के लिए अगला रोडमैप
चिंतन शिविर की व्यापक पृष्ठभूमि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य है। सरकार इस लक्ष्य के लिए मंत्रालयों और विभागों की मौजूदा योजनाओं, सुधारों और भविष्य की प्राथमिकताओं को एक साझा दिशा देने की प्रक्रिया में है। मंत्रालयों से उनके कामकाज और उपलब्धियों के साथ भविष्य की योजनाओं पर भी प्रस्तुतियां ली गईं। इसका उद्देश्य मौजूदा योजनाओं की समीक्षा के साथ यह पहचानना है कि सरकार के कार्यकाल के अगले चरण में किन क्षेत्रों में सुधार और तेजी की जरूरत है।
अगला मंथन 30 सितंबर और एक अक्टूबर को
23-24 सितंबर का चिंतन शिविर इस पूरी प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसका अगला दौर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को होने की उम्मीद है। अगले चरण में बाकी विषयों पर चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार मंत्रियों के साथ यह समीक्षा एक चरणबद्ध प्रक्रिया के रूप में कर रही है, जिसमें अलग-अलग विषयों पर चर्चा के बाद अगले चरण की प्राथमिकताओं को आकार दिया जा रहा है।
मध्यावधि समीक्षा से आगे की रणनीति तक
इस चिंतन शिविर की खासियत यह रही कि इसमें सिर्फ मंत्रालयों की उपलब्धियों का हिसाब नहीं लिया गया, बल्कि आगे क्या बदलना है और सरकार की योजनाओं को लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से कैसे पहुंचाना है, इस पर भी चर्चा हुई। पूरी कवायद में ‘जन विश्वास से जन आधार’ का सूत्र योजनाओं की डिलीवरी, सुशासन, प्रशासनिक सुधार और प्रभावी संवाद से जोड़ा गया है। वहीं विकसित भारत@2047 को दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में रखते हुए सरकार अपने मौजूदा कार्यकाल के अगले चरण की प्राथमिकताओं पर मंथन कर रही है।


