- एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट में 4.63 लाख रुपये के 1323 जाली नोट मिले; 186 शाखाओं से जुड़े कैश रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस, STF और क्राइम ब्रांच, कुछ नोट असली-नकली हिस्से जोड़कर बनाए जाने की आशंका
भारत 19
मेरठ। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली करेंसी मिलने के बाद अब मेरठ में एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से 4.63 लाख रुपये के 1323 नकली नोट मिलने से बैंकिंग सिस्टम में जाली नोटों की आमद को लेकर जांच तेज हो गई है। मंगलपांडे नगर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले कुछ नोटों को असली और नकली हिस्सों को जोड़कर तैयार किए जाने की बात भी सामने आई है। करीब 186 एक्सिस बैंक शाखाओं से जुड़े इस करेंसी चेस्ट तक नकली नोट किस रास्ते से पहुंचे, इसका पता लगाने के लिए पुलिस के साथ एसटीएफ और क्राइम ब्रांच रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। सहारनपुर और मेरठ के मामलों में फिलहाल किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। मेरठ में जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि नकली नोट बैंकिंग चैनल में किस स्तर पर दाखिल हुए और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने से पहले वे किन-किन हाथों से गुजरे।
13 महीने की जांच में मिले 1323 नकली नोट
बैंक की शिकायत के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में 1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच विभिन्न शाखाओं से आई नकदी की जांच के दौरान नकली नोट सामने आए। कुल 1323 जाली नोट मिले, जिनकी कीमत 4,63,650 रुपये बताई गई है। इनमें 500, 200, 100 और 50 रुपये के नोट शामिल हैं। बैंक प्रबंधक सरताज सिंह ने 16 सितंबर को मेरठ के एसएसपी को शिकायत दी थी। इसके बाद 22 सितंबर को सिविल लाइंस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर दिलीप सेंगर को सौंपी गई है।
कुछ नोट असली-नकली हिस्से जोड़कर बने
जांच में कुछ ऐसे नोट भी मिलने की बात सामने आई है, जिन्हें दो हिस्सों को जोड़कर तैयार किया गया बताया जा रहा है। इनमें एक हिस्सा असली नोट का और दूसरा नकली नोट का होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब इन नोटों की तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन्हें किस तरीके से तैयार किया गया और क्या ऐसे नोट जानबूझकर बैंकिंग चैनल में चलाए गए थे। यह भी जांच का हिस्सा है कि ऐसे नोट बैंक की सामान्य करेंसी जांच प्रक्रिया से कैसे गुजर गए।
186 शाखाओं के कैश रिकॉर्ड की पड़ताल
मंगलपांडे नगर स्थित एक्सिस बैंक की करेंसी चेस्ट से करीब 186 शाखाओं का नकदी लेनदेन जुड़ा है। यही वजह है कि नकली नोटों के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच का दायरा काफी बड़ा हो गया है। पुलिस संबंधित अवधि में करेंसी चेस्ट में नकदी भेजने वाली शाखाओं की सूची और उनके कैश रिकॉर्ड का मिलान कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि 1323 नकली नोट किसी एक शाखा से आए या अलग-अलग शाखाओं के जरिए करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। इसके लिए शाखावार नकदी, जमा रकम और करेंसी चेस्ट में प्राप्त रकम के रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।
STF और क्राइम ब्रांच भी जुटी जांच में
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के साथ एसटीएफ और क्राइम ब्रांच भी जांच में शामिल हैं। एजेंसियां नकली नोटों के स्रोत और बैंकिंग सिस्टम में उनके प्रवेश के रास्ते का पता लगाने में जुटी हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नकली नोट किसी ग्राहक से जमा हुई रकम के जरिए बैंकिंग सिस्टम में पहुंचे या किसी शाखा से करेंसी चेस्ट भेजी गई नकदी में शामिल थे। इसके अलावा बैंकिंग चैनल के किसी अन्य स्तर पर नोटों के मिलाए जाने की आशंका की भी जांच की जा रही है।
सहारनपुर में 17.29 करोड़ की नकली करेंसी
मेरठ का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से 17.29 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकली करेंसी मिलने का मामला जांच के दायरे में है। सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी करेंसी चेस्ट में यह मामला सामने आने के बाद जांच एनआईए को सौंपी गई थी। एनआईए ने मामले में बैंक के पूर्व करेंसी चेस्ट मैनेजर अमित कुमार और संविदा चालक आदेश चौधरी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी नकली करेंसी के स्रोत और बैंकिंग सिस्टम में उसके प्रवेश की कड़ियों को खंगाल रही है। हालांकि, अभी तक मेरठ में मिले 4.63 लाख रुपये के नकली नोटों को सहारनपुर के 17.29 करोड़ रुपये वाले मामले से जोड़ने वाला कोई पुष्ट तथ्य सामने नहीं आया है।
अब नकली नोटों के स्रोत की तलाश
मेरठ पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है कि 4.63 लाख रुपये के नकली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे। इसके लिए 186 शाखाओं के कैश रिकॉर्ड और संबंधित अवधि में करेंसी चेस्ट में पहुंची रकम का मिलान किया जा रहा है। साथ ही असली और नकली हिस्सों को जोड़कर बनाए गए नोटों की तकनीकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सभी जाली नोट एक ही स्रोत से आए या अलग-अलग जगहों से बैंकिंग सिस्टम में दाखिल हुए। जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट होगा कि मामला अलग-अलग स्तर पर बैंकिंग चैनल में पहुंचे नकली नोटों का है या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल पुलिस, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की जांच का केंद्र नकली नोटों का स्रोत और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने का पूरा रास्ता है।


