बेटे की मौत के महज एक महीने बाद सास ने बहू को बेटी मानकर कराया दूसरा विवाह, देवर ने भाई बनकर किया कन्यादान
भारत 19
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सास-बहू के रिश्ते की आम धारणा से अलग एक परिवार ने अपनी विधवा बहू के भविष्य को लेकर ऐसा फैसला लिया, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। खतौली के दयालपुरम निवासी सुनीता ने बेटे रोहित की मौत के एक महीने बाद उसकी पत्नी मीनाक्षी की दूसरी शादी करा दी। मीनाक्षी की सहमति से राजस्थान के नारायणपुर निवासी योगेश के साथ उसका विवाह आर्य समाज मंदिर में कराया गया। विवाह में मीनाक्षी के देवर मोहित ने भाई की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया। परिवार के मुताबिक, सुनीता ने बहू को बेटी मानकर उसकी नई जिंदगी की शुरुआत कराई। मीनाक्षी ने भी कहा कि उसने अपनी इच्छा से दूसरा विवाह किया है और उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था।
पति की मौत के बाद बहू के भविष्य की चिंता
मीनाक्षी मूल रूप से हरिद्वार के बहादरपुर की रहने वाली हैं। करीब दस साल पहले उनकी शादी खतौली के दयालपुरम निवासी रोहित से हुई थी। दंपती की दो बेटियां हैं, सात साल की रितु और करीब डेढ़ साल की अविका। अगस्त में परिवार पर लगातार दो मौतों का दुख टूटा। 14 अगस्त को रोहित के पिता ओमपाल का कैंसर से निधन हुआ और अगले दिन 15 अगस्त को रोहित की भी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों में रोहित की मौत को पिता की मृत्यु के सदमे से जोड़कर परिवार की ओर से बताया गया है, जबकि इसकी स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि का विवरण सामने नहीं आया है। पति की मौत के बाद मीनाक्षी के सामने अपनी और दोनों बेटियों की जिंदगी को लेकर बड़ा सवाल था। इसी बीच सास सुनीता ने बहू के भविष्य के बारे में सोचना शुरू किया।
बहू की सहमति से तलाशा गया नया रिश्ता
सुनीता ने छोटे बेटे मोहित और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर मीनाक्षी के लिए नया रिश्ता तलाशना शुरू किया। परिवार को राजस्थान के नारायणपुर निवासी योगेश के बारे में जानकारी मिली। योगेश वहां चाट की दुकान चलाते हैं। रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले मीनाक्षी की सहमति ली गई। उसकी रजामंदी के बाद दोनों परिवारों ने विवाह का फैसला किया। बुधवार को खतौली के आर्य समाज मंदिर में मीनाक्षी और योगेश का विवाह कराया गया। मीनाक्षी ने शादी के बाद कहा कि उसने यह विवाह अपनी मर्जी से किया है और उस पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उसने अपनी सास के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्होंने उसे बहू की जगह बेटी मानकर विदा किया।
देवर ने भाभी को बहन मानकर किया कन्यादान
इस विवाह का सबसे भावुक पहलू मीनाक्षी के देवर मोहित की भूमिका रही। उन्होंने अपनी भाभी को बहन का दर्जा देते हुए भाई की तरह कन्यादान की रस्म निभाई। मोहित के मुताबिक, भाई और पिता की मौत के बाद भाभी के सामने पूरी जिंदगी थी और बच्चों का भविष्य भी जुड़ा था। इसलिए परिवार ने उनकी सहमति से दूसरी शादी कराने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि शादी के बाद भाभी के साथ परिवार का रिश्ता खत्म नहीं होगा। वह आगे भी मीनाक्षी को बहन की तरह मानते हुए उसके साथ खड़े रहेंगे।
सास बोलीं- बहू नहीं बेटी मानकर विदा किया
सुनीता का कहना है कि वह अपनी बहू को बेटी मानती हैं। बेटे की मौत के बाद मीनाक्षी के सामने पूरी जिंदगी बाकी है और उसे अपने भविष्य के बारे में फैसला लेने का अधिकार है। इसी सोच के साथ परिवार ने उसकी सहमति से दूसरा विवाह कराया। शादी के बाद सुनीता ने मीनाक्षी को बेटी की तरह विदा किया। परिवार का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि पति की मौत के तुरंत बाद उन्होंने सामाजिक दबाव के बजाय बहू की आगे की जिंदगी और उसकी इच्छा को प्राथमिकता देने की बात कही।
दोनों बेटियां अब दादी के पास रहेंगी
मीनाक्षी की दोनों बेटियां रितु और अविका अपनी दादी सुनीता के पास रहेंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह फैसला भी मीनाक्षी की सहमति से लिया गया है। परिवार का कहना है कि बेटियों की देखभाल और उनके भविष्य की जिम्मेदारी दादी के पास रहेगी। साथ ही मीनाक्षी और उसके ससुराल पक्ष के बीच रिश्ता भी बना रहेगा। मीनाक्षी के लिए विदाई का पल भावुक रहा। एक ओर वह नए जीवन की शुरुआत कर रही थी, वहीं दूसरी ओर उसकी दोनों बेटियां दादी के पास रह रही थीं।
दूसरी शादी के बाद मीनाक्षी ने जताई खुशी
शादी के बाद मीनाक्षी ने कहा कि वह इस फैसले से खुश है। उसने साफ किया कि दूसरा विवाह उसकी अपनी इच्छा से हुआ है। उसने अपनी सास के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उसके भविष्य के बारे में सोचते हुए उसे बेटी की तरह विदा किया। वहीं, सुनीता और मोहित ने भी कहा कि विवाह के बाद मीनाक्षी से उनका रिश्ता खत्म नहीं होगा। वे उसे आगे भी परिवार का हिस्सा मानते रहेंगे।
एक महीने में गम से नई शुरुआत तक
रोहित और उसके पिता की लगातार हुई मौतों से जिस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, उसी परिवार में करीब एक महीने बाद मीनाक्षी के दूसरे विवाह के साथ नई शुरुआत हुई। इस विवाह में सास का बहू को बेटी मानना, देवर का भाई बनकर कन्यादान करना और मीनाक्षी की अपनी सहमति सबसे अहम पहलू रहे। यही वजह है कि मुजफ्फरनगर का यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


