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बैंक हड़ताल से दूर रहेंगी BMS की बैंक यूनियनें

  • NOBW और NOBO ने 28 से 30 सितंबर की हड़ताल से बनाई दूरी, पांच दिन बैंकिंग, PLI और पेंशन अपडेटेशन की मांगों का समर्थन

भारत 19

नई दिल्ली। 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित बैंक हड़ताल को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़ी बैंक यूनियनों ने अलग रुख अपनाया है। नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (NOBW) और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (NOBO) हड़ताल में शामिल नहीं होंगी। दोनों संगठनों ने अपने सदस्यों से भी हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की है। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगों का समर्थन जारी रहेगा, लेकिन हड़ताल को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, पहला नहीं।

हड़ताल नहीं, बातचीत से समाधान पर जोर

NOBW के महासचिव मन मोहन दास और NOBO के महासचिव आदर्श केएन ने संयुक्त पत्र जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया है। दोनों संगठनों का कहना है कि ट्रेड यूनियन की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि कर्मचारियों की समस्याओं का कितना समाधान हुआ, न कि कितनी बार हड़ताल के नोटिस दिए गए। यूनियनों के अनुसार जहां बातचीत से समाधान संभव हो, वहां बातचीत की जानी चाहिए। जहां प्रतिनिधित्व जरूरी हो, वहां मजबूती से पक्ष रखा जाए और औद्योगिक कार्रवाई तभी की जाए जब वास्तव में उसकी जरूरत हो।

पांच दिन बैंकिंग की मांग का समर्थन

NOBW और NOBO ने पांच दिन बैंकिंग की मांग को जायज बताया है। दोनों यूनियनों का कहना है कि वे लगातार इस मुद्दे को उठाती रही हैं। संयुक्त पत्र में 17 अगस्त को BMS की ओर से किए गए अखिल भारतीय आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें पांच दिन बैंकिंग और पेंशन अपडेटेशन को प्रमुख मांगों में शामिल किया गया था। यूनियनों के अनुसार 9 जुलाई को वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में भी इन मुद्दों को विस्तार से उठाया गया था। उनके मुताबिक वित्त मंत्री की ओर से इनके जल्द समाधान को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया गया था।

PLI के मौजूदा स्वरूप पर यूनियनों की आपत्ति

यूनियनों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के उस स्वरूप पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें व्यक्तिगत प्रदर्शन की शर्तों के जरिए द्विपक्षीय समझौते में तय लाभों को प्रभावित किया जा सकता है। NOBW और NOBO का कहना है कि PLI द्विपक्षीय समझौते और संयुक्त नोट में तय व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों को पहले से तय लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों संगठनों ने 29 जून को वित्तीय सेवा विभाग के सामने हुए सामूहिक प्रदर्शन में शामिल होने का भी पत्र में उल्लेख किया है।

पेंशन अपडेटेशन और मेडिकल बीमा भी प्रमुख मांग

NOBW और NOBO ने पेंशन अपडेटेशन और पेंशनरों के लिए बैंक की ओर से मेडिकल बीमा की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ये मुद्दे सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़े हैं। दोनों यूनियनों ने व्यापक पेंशन अपडेटेशन के साथ पेंशनरों के लिए बैंक की ओर से मेडिकल बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था की मांग की है।

‘बार-बार हड़ताल नहीं, परिणाम चाहिए’

संयुक्त पत्र में यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य कर्मचारियों की जायज मांगों से पीछे हटना नहीं है। उनका मानना है कि संस्थागत बातचीत और सामूहिक सौदेबाजी के माध्यम से लंबित मुद्दों का समाधान हासिल किया जाना चाहिए। यूनियनों के अनुसार हड़ताल से एक दिन बैंक शाखाएं बंद हो सकती हैं, जबकि किसी समझौते से कर्मचारियों की स्थिति वर्षों तक बदल सकती है। इसलिए उनका जोर ऐसे माध्यमों के इस्तेमाल पर है, जिनसे मांगों का स्थायी समाधान निकल सके। दोनों संगठनों ने आईबीए, वित्तीय सेवा विभाग, सरकार, सुलह व्यवस्था और द्विपक्षीय मंचों को लंबित मुद्दों के समाधान के लिए उपलब्ध संस्थागत माध्यम बताया है।

बैंक कर्मचारियों से हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील

NOBW और NOBO ने अपने सदस्यों से किसी भी हड़ताल में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और संभावित परिणामों पर विचार करने की अपील की है। पत्र में कर्मचारियों से यह भी विचार करने को कहा गया है कि पिछली हड़तालों से क्या हासिल हुआ और क्या मौजूदा मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए संभव है। यूनियनों का कहना है कि हर हड़ताल में कर्मचारियों की वेतन कटौती, ग्राहकों को असुविधा और जरूरी बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान होता है। इसलिए औद्योगिक कार्रवाई तभी होनी चाहिए, जब वह जरूरी, उचित और ठोस परिणाम देने वाली हो।

लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सरकार से अपील

दोनों यूनियनों ने सरकार से लंबित मुद्दों का संस्थागत और कानूनी माध्यम से समाधान करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे अनावश्यक टकराव से बचा जा सकता है और बैंक कर्मचारी अपनी मूल जिम्मेदारियों के साथ ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

बैंक हड़ताल से दूर रहेंगी BMS की बैंक यूनियनें

  • NOBW और NOBO ने 28 से 30 सितंबर की हड़ताल से बनाई दूरी, पांच दिन बैंकिंग, PLI और पेंशन अपडेटेशन की मांगों का समर्थन

भारत 19

नई दिल्ली। 28 से 30 सितंबर की प्रस्तावित बैंक हड़ताल को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़ी बैंक यूनियनों ने अलग रुख अपनाया है। नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (NOBW) और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स (NOBO) हड़ताल में शामिल नहीं होंगी। दोनों संगठनों ने अपने सदस्यों से भी हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की है। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगों का समर्थन जारी रहेगा, लेकिन हड़ताल को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, पहला नहीं।

हड़ताल नहीं, बातचीत से समाधान पर जोर

NOBW के महासचिव मन मोहन दास और NOBO के महासचिव आदर्श केएन ने संयुक्त पत्र जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया है। दोनों संगठनों का कहना है कि ट्रेड यूनियन की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि कर्मचारियों की समस्याओं का कितना समाधान हुआ, न कि कितनी बार हड़ताल के नोटिस दिए गए। यूनियनों के अनुसार जहां बातचीत से समाधान संभव हो, वहां बातचीत की जानी चाहिए। जहां प्रतिनिधित्व जरूरी हो, वहां मजबूती से पक्ष रखा जाए और औद्योगिक कार्रवाई तभी की जाए जब वास्तव में उसकी जरूरत हो।

पांच दिन बैंकिंग की मांग का समर्थन

NOBW और NOBO ने पांच दिन बैंकिंग की मांग को जायज बताया है। दोनों यूनियनों का कहना है कि वे लगातार इस मुद्दे को उठाती रही हैं। संयुक्त पत्र में 17 अगस्त को BMS की ओर से किए गए अखिल भारतीय आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें पांच दिन बैंकिंग और पेंशन अपडेटेशन को प्रमुख मांगों में शामिल किया गया था। यूनियनों के अनुसार 9 जुलाई को वित्त मंत्री के साथ हुई बैठक में भी इन मुद्दों को विस्तार से उठाया गया था। उनके मुताबिक वित्त मंत्री की ओर से इनके जल्द समाधान को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया गया था।
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PLI के मौजूदा स्वरूप पर यूनियनों की आपत्ति

यूनियनों ने परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) के उस स्वरूप पर भी आपत्ति जताई है, जिसमें व्यक्तिगत प्रदर्शन की शर्तों के जरिए द्विपक्षीय समझौते में तय लाभों को प्रभावित किया जा सकता है। NOBW और NOBO का कहना है कि PLI द्विपक्षीय समझौते और संयुक्त नोट में तय व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए। व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर कर्मचारियों को पहले से तय लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों संगठनों ने 29 जून को वित्तीय सेवा विभाग के सामने हुए सामूहिक प्रदर्शन में शामिल होने का भी पत्र में उल्लेख किया है।

पेंशन अपडेटेशन और मेडिकल बीमा भी प्रमुख मांग

NOBW और NOBO ने पेंशन अपडेटेशन और पेंशनरों के लिए बैंक की ओर से मेडिकल बीमा की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ये मुद्दे सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से जुड़े हैं। दोनों यूनियनों ने व्यापक पेंशन अपडेटेशन के साथ पेंशनरों के लिए बैंक की ओर से मेडिकल बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा की मजबूत व्यवस्था की मांग की है।

‘बार-बार हड़ताल नहीं, परिणाम चाहिए’

संयुक्त पत्र में यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य कर्मचारियों की जायज मांगों से पीछे हटना नहीं है। उनका मानना है कि संस्थागत बातचीत और सामूहिक सौदेबाजी के माध्यम से लंबित मुद्दों का समाधान हासिल किया जाना चाहिए। यूनियनों के अनुसार हड़ताल से एक दिन बैंक शाखाएं बंद हो सकती हैं, जबकि किसी समझौते से कर्मचारियों की स्थिति वर्षों तक बदल सकती है। इसलिए उनका जोर ऐसे माध्यमों के इस्तेमाल पर है, जिनसे मांगों का स्थायी समाधान निकल सके। दोनों संगठनों ने आईबीए, वित्तीय सेवा विभाग, सरकार, सुलह व्यवस्था और द्विपक्षीय मंचों को लंबित मुद्दों के समाधान के लिए उपलब्ध संस्थागत माध्यम बताया है।

बैंक कर्मचारियों से हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील

NOBW और NOBO ने अपने सदस्यों से किसी भी हड़ताल में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और संभावित परिणामों पर विचार करने की अपील की है। पत्र में कर्मचारियों से यह भी विचार करने को कहा गया है कि पिछली हड़तालों से क्या हासिल हुआ और क्या मौजूदा मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए संभव है। यूनियनों का कहना है कि हर हड़ताल में कर्मचारियों की वेतन कटौती, ग्राहकों को असुविधा और जरूरी बैंकिंग सेवाओं में व्यवधान होता है। इसलिए औद्योगिक कार्रवाई तभी होनी चाहिए, जब वह जरूरी, उचित और ठोस परिणाम देने वाली हो।

लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सरकार से अपील

दोनों यूनियनों ने सरकार से लंबित मुद्दों का संस्थागत और कानूनी माध्यम से समाधान करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे अनावश्यक टकराव से बचा जा सकता है और बैंक कर्मचारी अपनी मूल जिम्मेदारियों के साथ ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

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