- अर्धवार्षिक बंदी के दिन हड़ताल से खातों के मिलान, प्रावधान, ट्रेजरी और सेटलमेंट पर असर; कंपनियों के भुगतान और बैंक-बुक मिलान का काम भी खिसक सकता है
भारत 19
नई दिल्ली। 30 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल इस बार सामान्य बैंकिंग सेवाओं के व्यवधान से अलग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन बैंकों की अर्धवार्षिक लेखा-बंदी होगी। सितंबर की छमाही की अंतिम तारीख होने के कारण बैंकों में खातों का मिलान, प्रावधान, ट्रेजरी और बाजार से जुड़े कामकाज समेत कई महत्वपूर्ण वित्तीय प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल होने पर इन प्रक्रियाओं में व्यवधान आ सकता है। इसका असर बैंकों के साथ कंपनियों और कारोबारियों के भुगतान, बैंक खातों के मिलान और वित्तीय रिकॉर्ड को अंतिम रूप देने पर भी पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने भी 30 सितंबर को इन गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण तारीख बताया है।
30 सितंबर को छमाही का हिसाब होगा बंद
30 सितंबर बैंकों के लिए सिर्फ महीने का अंतिम दिन नहीं, बल्कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही की अंतिम तारीख भी है। इस दिन तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक अपने खातों और विभिन्न वित्तीय मदों का मिलान करते हैं। एक अक्टूबर से नई छमाही शुरू हो जाती है। इसलिए 30 सितंबर तक हुए लेन-देन और उनके निपटारे की स्थिति का सही लेखांकन महत्वपूर्ण रहेगा। हड़ताल के कारण कर्मचारी उपलब्ध नहीं होने पर ऐसे काम अगले कार्यदिवस में पूरे करने पड़ सकते हैं। इससे 30 सितंबर की क्लोजिंग और एक अक्टूबर से शुरू हुई नई छमाही के काम को अलग-अलग संभालने का अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
खातों के मिलान का काम बढ़ाएगा दबाव
अर्धवार्षिक बंदी के दौरान बैंक अपने खातों के अलावा दूसरे बैंकों और संबंधित संस्थाओं से जुड़े लेन-देन का भी मिलान करते हैं। किसी लेन-देन में अंतर या लंबित प्रविष्टि होने पर उसकी जांच और निपटारा किया जाता है। 30 सितंबर को काम प्रभावित होने पर अगले कार्यदिवस में पुराने लेन-देन और नई छमाही में शुरू हुए लेन-देन का अलग-अलग मिलान करना पड़ सकता है। इससे बैंक के बैक ऑफिस और लेखा विभाग पर अतिरिक्त काम बढ़ सकता है।
कर्ज खातों के प्रावधान का काम भी अहम
छमाही के अंत में बैंक कर्ज खातों की स्थिति और जोखिम का आकलन करते हैं तथा आवश्यक प्रावधान से जुड़े काम पूरे किए जाते हैं। वित्त मंत्रालय ने provisioning को भी 30 सितंबर की महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल किया है। हड़ताल से इन प्रक्रियाओं के समय पर निपटारे में व्यवधान आने पर बैंकों को बाद में लंबित काम पूरा करना होगा।
ट्रेजरी और बाजार संचालन पर भी असर
बैंकों के ट्रेजरी विभाग और बाजार से जुड़े संचालन भी 30 सितंबर की महत्वपूर्ण गतिविधियों में शामिल हैं। छमाही के अंतिम दिन इनसे जुड़े लेन-देन, हिसाब और रिकॉर्ड का महत्व बढ़ जाता है। हड़ताल के कारण कर्मचारी-निर्भर प्रक्रियाओं में देरी होने पर इनका निपटारा अगले कार्यदिवस में करना पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने ट्रेजरी और मार्केट ऑपरेशंस को भी 30 सितंबर के संवेदनशील कामों में गिना है।
चेक क्लियरिंग और सेटलमेंट में आ सकती है देरी
हड़ताल का असर चेक क्लियरिंग, भुगतान के सेटलमेंट और अन्य शाखा-निर्भर सेवाओं पर पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर डिजिटल भुगतान रुक जाएगा। जिन कामों में बैंक कर्मचारियों या शाखा स्तर की प्रक्रिया जरूरी है, उनमें देरी की आशंका अधिक रहेगी। चेक क्लियरिंग और सेटलमेंट में व्यवधान आने पर लंबित लेन-देन का निपटारा बाद में करना पड़ सकता है।
कंपनियों के बैंक-बुक मिलान पर बढ़ेगा दबाव
30 सितंबर कंपनियों के लिए भी छमाही की अंतिम तारीख है। कंपनियों को अपने बैंक खातों में उपलब्ध राशि, किए गए भुगतान, प्राप्तियों और बकाया का अपनी लेखा पुस्तकों से मिलान करना होता है। यदि 30 सितंबर का कोई भुगतान बैंकिंग स्तर पर लंबित रहता है तो कंपनी की पुस्तकों और बैंक रिकॉर्ड में अस्थायी अंतर दिखाई दे सकता है। बाद में लेखा विभाग को इसकी reconciliation करनी पड़ेगी।
सप्लायर और कारोबारी भुगतान भी खिसक सकते हैं
छमाही के अंतिम दिन कंपनियां सप्लायर, विक्रेता, ठेकेदार और अन्य कारोबारी देनदारियों का भुगतान करती हैं। यदि किसी भुगतान के लिए बैंक शाखा या कर्मचारी की प्रक्रिया जरूरी है और वह 30 सितंबर को पूरी नहीं हो पाती तो भुगतान का निपटारा अगले कार्यदिवस तक खिसक सकता है। इससे भुगतान पाने वाले कारोबारियों की नकदी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और भुगतान करने वाली कंपनी को भी अपने खातों में उसका मिलान करना पड़ेगा।
भुगतान की तारीख को लेकर रहेगी तकनीकी सावधानी
30 सितंबर को शुरू किया गया या निर्देशित किया गया हर भुगतान अपने आप एक अक्टूबर का लेन-देन नहीं माना जाएगा। संबंधित लेन-देन की value date, settlement date और बैंक की accounting treatment के आधार पर उसका लेखांकन होगा। हालांकि 30 सितंबर की कटऑफ पर सेटलमेंट लंबित रहने से बैंक और कंपनियों को पुरानी और नई छमाही के आंकड़ों का अतिरिक्त मिलान करना पड़ सकता है।
सरकारी लेन-देन में भी देरी की आशंका
वित्त मंत्रालय ने बैंक हड़ताल के संभावित असर में सरकारी लेन-देन को भी शामिल किया है। बैंक कर्मचारियों की भूमिका वाले भुगतान और अन्य बैंकिंग प्रक्रियाओं में देरी होने पर उनका निपटारा आगे खिसक सकता है। इसका असर संबंधित सरकारी विभागों और भुगतान पाने वाले संस्थानों या लाभार्थियों पर पड़ सकता है।
विदेशी कारोबार वाली कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव
आयात-निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए बैंकिंग से जुड़े भुगतान और प्राप्तियां महत्वपूर्ण होती हैं। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग परिचालन में कर्मचारी-निर्भर प्रक्रिया प्रभावित होने पर कुछ भुगतान या सेटलमेंट में देरी हो सकती है। इससे विदेशी कारोबार से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और भुगतान के मिलान का काम भी प्रभावित हो सकता है।
डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जारी रहने की उम्मीद
हड़ताल के बावजूद इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है। एटीएम और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट के माध्यम से नकदी उपलब्ध कराने के लिए बैंकों को तैयारी करने को कहा गया है। हालांकि चेक, नकद जमा-निकासी, दस्तावेज आधारित काम, ऋण प्रक्रिया और अन्य शाखा-निर्भर सेवाओं में दिक्कत आ सकती है।
हड़ताल के बाद पुराने हिसाब का दबाव बढ़ेगा
30 सितंबर की बैंक हड़ताल का असर केवल शाखाओं में ग्राहकों की सामान्य बैंकिंग जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा। उसी दिन वित्तीय वर्ष की पहली छमाही भी समाप्त हो रही है, इसलिए बैंकों को अर्धवार्षिक हिसाब से जुड़े लंबित काम भी निपटाने होंगे। वहीं कंपनियों और कारोबारियों को भुगतान, बैंक-बुक मिलान और सेटलमेंट की स्थिति को अंतिम रूप देने में अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है। एक अक्टूबर से नई छमाही शुरू होने के कारण 30 सितंबर तक के लेन-देन और नई छमाही के लेन-देन का सही लेखांकन और मिलान विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।


