- गुरुवंदन-2026 में बोले- स्वस्थ संबंधों से मजबूत होगी शिक्षा व्यवस्था और समाज; कानपुर में 51 शिक्षक-शिक्षिकाएं व प्रधानाचार्य सम्मानित
भारत 19
कानपुर। शिक्षक और छात्र के बीच स्वस्थ संबंध शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बदलते सामाजिक परिवेश में शिक्षक को विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद और स्वस्थ संबंध बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चिंतक एवं विचारक और पूर्व राज्यसभा सदस्य डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने शनिवार को कानपुर में आयोजित गुरुवंदन-2026 में यह बात कही।
गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज सभागार में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कानपुर संभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के सामने समय के साथ नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। समाज में बदलाव के बावजूद शिक्षक को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी उसकी भूमिका अहम है।
शिक्षक का आचरण विद्यार्थियों के लिए बने उदाहरण
डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने शिक्षक के व्यक्तित्व और आचरण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस प्रकार राजा के आदर्श व्यक्तित्व में उपभोग शून्य स्वामित्व की अवधारणा होती है, उसी तरह शिक्षक को भी उपभोग शून्य व्यक्तित्व का निर्वाह करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के साथ स्वस्थ संबंध बनाए रखने और बदलते समय की जरूरतों को समझने पर जोर दिया। उनके अनुसार शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को आकार देने में भी उसकी भूमिका होती है।
शिक्षक की भूमिका को बताया समाज निर्माण से जुड़ा
डॉ. सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि शिक्षक का कार्य समाज के सम्मानपूर्ण और स्वाभिमानपूर्ण कार्यों में शामिल है। शिक्षण संस्थानों में कितनी भी चुनौतियां हों या समाज में कितने भी बदलाव आएं, शिक्षक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने शिक्षक-छात्र संबंधों को शिक्षा के व्यापक उद्देश्य से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ वातावरण विद्यार्थियों के विकास के लिए जरूरी है और इसका प्रभाव आगे समाज पर भी पड़ता है।
51 शिक्षक-शिक्षिकाएं और प्रधानाचार्य सम्मानित
गुरुवंदन-2026 में प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च संवर्ग के 51 शिक्षक-शिक्षिकाओं और प्रधानाचार्यों** को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की गतिविधियों, संगठन की भूमिका और शिक्षकों की समस्याओं से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के प्रधान संरक्षक डॉ. दिलीप सरदेसाई ने संगठन की उपलब्धियों, रीति-नीति और गतिविधियों पर विचार रखे। संयोजक डॉ. शैलेन्द्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की परंपरा और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर बात रखी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविंद चतुर्वेदी ने की। संचालन डॉ. विपिन कौशिक और डॉ. पवन कुमार मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में आदित्य द्विवेदी, शैलेन्द्र अवस्थी, डॉ. राहुल मिश्रा, प्रो. मनोज अवस्थी, प्रो. एबी जायसवाल, चंद्रदीप सिंह यादव, श्रीओम तिवारी, अरविंद दुबे, संजय तिवारी समेत अन्य शिक्षक और पदाधिकारी मौजूद रहे।


