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घुटने के बाद अब कंधे की होगी सटीक रोबोटिक्स सर्जरी

  • सीटी स्कैन से हड्डी का थ्री-डी मॉडल बनाकर पहले होगी सर्जरी की प्लानिंग; इम्प्लांट की पोजिशन और बोन कटिंग में अधिक सटीकता, अनावश्यक हड्डी काटने से बचने में मदद; भारत में 2027 तक रोबोटिक शोल्डर रिप्लेसमेंट का दायरा बढ़ने की उम्मीद, यूपीयूएमएस सैफई में दो रोबोटिक सिस्टम खरीदने की तैयारी

भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, इटावा।
घुटना और कूल्हा प्रत्यारोपण में रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के बाद अब शोल्डर रिप्लेसमेंट में भी यह तकनीक अगला बदलाव लाने की तैयारी में है। अमेरिका में रोबोटिक-असिस्टेड शोल्डर रिप्लेसमेंट का इस्तेमाल शुरू हो चुका है और विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में 2027 तक इसके इस्तेमाल और प्रशिक्षण का दायरा बढ़ सकता है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई में आयोजित ‘चतुर्थ सैफई अर्थ्रोप्लास्टी अपडेट 2024’ के तहत कैडवरिक रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञों ने दी। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने किया।

कुलपति प्रोफ़ेसर (डॉ.) अजय सिंह

सीटी स्कैन से तैयार होगा हड्डी का डिजिटल मॉडल

चंदन अस्पताल, लखनऊ के वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि रोबोटिक तकनीक में मरीज के कंधे का सीटी स्कैन डिजिटल रूप से विश्लेषित कर ऑपरेशन से पहले ही उसकी योजना तैयार की जाती है। इससे इम्प्लांट की स्थिति और हड्डी की तैयारी को अधिक सटीक बनाने में मदद मिल सकती है। शोल्डर रिप्लेसमेंट में मरीज की हड्डी की बनावट और उसमें मौजूद विकृति को समझना सर्जरी की योजना के लिए महत्वपूर्ण होता है। सीटी स्कैन से हड्डी की बारीक तस्वीर मिलने के बाद उसका डिजिटल मॉडल तैयार किया जा सकता है। इस मॉडल के आधार पर सर्जरी से पहले यह तय करने में मदद मिलती है कि इम्प्लांट किस स्थान और कोण पर लगाया जाना है तथा हड्डी का कितना हिस्सा तैयार करना होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के जरिए सीटी स्कैन की जानकारी का विस्तृत विश्लेषण भी किया जा सकता है।

डॉ. नवीन श्रीवास्तव

जरूरत के मुताबिक ही होगी हड्डी की तैयारी

शोल्डर रिप्लेसमेंट में हड्डी की सही तैयारी और इम्प्लांट की सटीक पोजिशनिंग महत्वपूर्ण होती है। रोबोटिक सिस्टम ऑपरेशन से पहले तैयार की गई योजना के अनुसार सर्जन को हड्डी की कटिंग में तकनीकी सहायता देता है। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार इसका उद्देश्य अनावश्यक हड्डी हटाने के बजाय मरीज की anatomy और इम्प्लांट के अनुरूप आवश्यक bone preparation करना है। इससे जटिल मामलों में सर्जन को अधिक नियंत्रित तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि रोबोट अपने आप ऑपरेशन नहीं करता। पूरी सर्जरी सर्जन के नियंत्रण में होती है और रोबोटिक सिस्टम planning तथा surgical execution में सहायता देता है।

डॉ. साहिल गाबा

बुजुर्गों में जटिल सर्जरी की प्लानिंग आसान

उम्र बढ़ने के साथ arthritis, rotator cuff की गंभीर समस्या, हड्डी की क्षति, कुछ जटिल fractures और degenerative conditions के कारण शोल्डर रिप्लेसमेंट की जरूरत पड़ सकती है। बुजुर्ग मरीजों में हड्डी की गुणवत्ता और पहले से मौजूद विकृतियां सर्जरी को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। ऐसे मामलों में सीटी स्कैन आधारित डिजिटल प्लानिंग से सर्जन को मरीज की anatomy पहले से समझने और इम्प्लांट की स्थिति तय करने में मदद मिल सकती है।

रोबोटिक सर्जरी से मिलेगा भविष्य का क्लिनिकल डेटा

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के रोबोटिक्स ज्वाइंट रिप्लेसमेंट हेड डॉ. साहिल गाबा के मुताबिक रोबोटिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट से सर्जरी की planning, हड्डी की तैयारी, इम्प्लांट की position और मरीज के बाद के परिणामों का डेटा व्यवस्थित तरीके से जुटाया जा सकता है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में मरीजों से मिलने वाला clinical data यह समझने में मदद करेगा कि किस तरह की हड्डी में कौन-सी planning प्रभावी रही, इम्प्लांट की position कितनी सटीक रही, recovery में कितना समय लगा और लंबे समय में complications की स्थिति क्या रही। इससे भविष्य में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की तकनीक और बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

भारत में कुछ केंद्र कर रहे रोबोटिक शोल्डर रिप्लेसमेंट

भारत में रोबोटिक शोल्डर रिप्लेसमेंट पूरी तरह नई तकनीक नहीं है। कुछ अस्पताल और विशेषज्ञ robot-assisted shoulder replacement उपलब्ध होने की जानकारी देते हैं। दिल्ली-एनसीआर समेत बड़े शहरों में इस दिशा में गतिविधियां बढ़ रही हैं। हालांकि अभी भारत में ऐसा सार्वजनिक राष्ट्रीय डेटाबेस उपलब्ध नहीं है, जिससे देश या शहरवार शोल्डर रिप्लेसमेंट और उनमें रोबोटिक सर्जरी की संख्या का विश्वसनीय आंकड़ा निकाला जा सके।

यूपीयूएमएस सैफई में दो रोबोटिक सिस्टम की तैयारी

यूपीयूएमएस सैफई के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने बताया कि संस्थान में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए दो रोबोटिक सिस्टम की खरीद प्रक्रिया चल रही है। इनमें से एक रोबोट हड्डी रोग विभाग में जोड़ प्रत्यारोपण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। कार्यशाला में गेस्ट ऑफ ऑनर प्रति कुलपति डॉ. आदेश कुमार रहे। आयोजन हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार ने किया। एनाटॉमी विभागाध्यक्ष एवं आयोजन सह अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नित्यानंद श्रीवास्तव, आयोजन सचिव डॉ. हरीश कुमार और सैफई आर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरएस यादव समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे। कार्यक्रम में देशभर से 100 से अधिक विशेषज्ञों और डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया।

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