- मानसून के बाद कई राज्यों में संक्रमण की पुष्टि; सितंबर में अल्मोड़ा में 36, शिमला में 24 और गाजियाबाद में तीन मामले, चेन्नई में छात्र की मौत; केंद्र के मार्च तक के आंकड़ों में 10,861 केस
भारत 19
नई दिल्ली। मानसून के बाद देश के कई हिस्सों में बुखार के मरीजों की जांच के दौरान स्क्रब टाइफस के मामले सामने आ रहे हैं। सितंबर में उत्तराखंड के अल्मोड़ा में 165 लोगों की जांच में 36 संक्रमित मिले। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में 24 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दो साल के अंतराल के बाद तीन मामले सामने आए। तमिलनाडु के चेन्नई में अन्ना विश्वविद्यालय के एक छात्र की स्क्रब टाइफस से मौत हुई है।
देश में इस बीमारी के सितंबर 2026 के मामलों का कोई एकीकृत राष्ट्रीय आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। केंद्र सरकार के IDSP-IHIP आंकड़ों के अनुसार 6 मार्च 2026 तक 10,861 मामले दर्ज किए गए थे। 2025 में 86,895, 2024 में 70,366, 2023 में 55,077 और 2022 में 32,364 मामले रिपोर्ट हुए थे। केंद्र ने बेहतर जांच सुविधाओं, निगरानी और जागरूकता को रिपोर्टिंग बढ़ने की संभावित वजहों में शामिल किया है।
सितंबर में अल्मोड़ा से गाजियाबाद तक मामले
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में सितंबर में 165 संदिग्ध मरीजों की जांच में 36 संक्रमित मिले। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी 11 ब्लॉकों में निगरानी बढ़ाई है। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में भी सितंबर की शुरुआत तक 24 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में इस साल तीन मामले सामने आए हैं, जबकि 2024 और 2025 में जिले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ था। तमिलनाडु के चेन्नई में अन्ना विश्वविद्यालय के 20 वर्षीय छात्र की सितंबर में मौत हुई। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार डेंगू जांच निगेटिव थी और मरीज में स्क्रब टाइफस के साथ encephalopathy, acute respiratory distress syndrome और multi-organ failure जैसी गंभीर जटिलताएं सामने आई थीं। इन आंकड़ों की भौगोलिक और समयावधि अलग होने के कारण इन्हें जोड़कर किसी राज्य या देश का वर्तमान कुल केस आंकड़ा निकालना उचित नहीं होगा।
बारिश के बाद बढ़ता है मौसमी जोखिम
स्क्रब टाइफस Orientia tsutsugamushi नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित चिगर माइट के लार्वा के काटने से यह मनुष्य तक पहुंचता है। माइट घास, झाड़ियों, खेतों और घनी वनस्पति वाले इलाकों में पाए जाते हैं। बारिश के बाद नमी और वनस्पति बढ़ने से इन माइट के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। खेतों और झाड़ियों में लोगों की आवाजाही बढ़ने पर संक्रमित माइट के संपर्क की संभावना भी बढ़ती है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में हुए अध्ययनों में मानसून और उसके बाद स्क्रब टाइफस के मामलों में मौसमी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि हर मौसमी बुखार स्क्रब टाइफस नहीं होता। डेंगू, मलेरिया, वायरल संक्रमण, टाइफाइड और लेप्टोस्पायरोसिस भी बारिश के मौसम में बुखार के प्रमुख कारण हैं।
पांच दिन बुखार आए तो गंभीरता से लें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन National Centre for Disease Control (NCDC) ने स्क्रब टाइफस को लेकर तकनीकी गाइडलाइन जारी की है। इसके अनुसार बिना स्पष्ट कारण के पांच दिन या उससे अधिक समय तक बुखार रहने पर चिकित्सकों को स्क्रब टाइफस की संभावना को differential diagnosis में शामिल करना चाहिए। बुखार के साथ माइट के काटने की जगह पर eschar यानी काली पपड़ी या घाव दिखाई देना बीमारी की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि यह निशान हर मरीज में मौजूद हो, यह जरूरी नहीं है।
लंबे बुखार के साथ इन लक्षणों पर सतर्कता
स्क्रब टाइफस की शुरुआत सामान्य बुखार जैसी हो सकती है। तेज बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, त्वचा पर चकत्ते और लिम्फ नोड में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। गंभीर संक्रमण में फेफड़े, मस्तिष्क, किडनी और लिवर प्रभावित हो सकते हैं। सांस लेने में परेशानी, भ्रम या बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी और पेशाब कम होने जैसे लक्षण गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
माइट से बचाव संक्रमण रोकने का प्रमुख उपाय
स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए घास, झाड़ियों और खेतों वाले इलाकों में माइट के संपर्क को कम करना जरूरी है। ऐसे क्षेत्रों में जाते समय पूरी आस्तीन के कपड़े, लंबी पैंट और ढके हुए जूते पहनना उपयोगी है। उपयुक्त insect repellent का इस्तेमाल किया जा सकता है। घर के आसपास घनी घास और झाड़ियों की सफाई रखने तथा ऐसे इलाकों से लौटने के बाद शरीर और कपड़ों की सफाई पर ध्यान देने से भी जोखिम कम किया जा सकता है। लगातार बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
देश में रिपोर्टिंग बढ़ी, वास्तविक संक्रमण का आकलन अलग
केंद्र के उपलब्ध आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों में रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या बढ़ी है। हालांकि सरकार ने बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाओं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, निगरानी और जागरूकता को भी इस बढ़ोतरी की वजह बताया है। इसलिए रिपोर्टेड केस बढ़ने को वास्तविक संक्रमण में उसी अनुपात की वृद्धि का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता। सितंबर में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सामने आए मामले तथा चेन्नई में हुई मौत यह संकेत देती है कि मानसून के बाद लंबे समय तक रहने वाले बुखार की जांच में स्क्रब टाइफस को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। *समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।


