- हाई कोर्ट ने डीजीपी से BNSS की धारा 180 के तहत बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा, लागू होने पर पुलिस विवेचना और अदालत में बयान की पड़ताल का तरीका बदल सकता है।
भारत 19
प्रयागराज। आपराधिक मामलों की जांच में गवाह ने पुलिस के सामने वास्तव में क्या कहा था, इसे लेकर उठने वाले सवालों पर अब तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से BNSS की धारा 180 के तहत दर्ज होने वाले सभी बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। साथ ही जमानत और दूसरी न्यायिक कार्यवाहियों के दौरान अदालत के सामने बयान का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
अभी क्या व्यवस्था है, पहले इसे समझना जरूरी
BNSS की धारा 180(3) के तहत विवेचक को गवाह का बयान ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्ड करने की अनुमति है। BNSS Rules, 2024 के नियम 20(1) में भी इसका प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में डीजीपी के 21 जुलाई 2025 के परिपत्र के तहत दुष्कर्म पीड़िता के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई थी, जबकि धारा 180 के तहत दूसरे बयानों की रिकॉर्डिंग को विकल्प के रूप में रखा गया था।
अगर अनिवार्य हुआ तो हर बयान का रिकॉर्ड बनेगा
हाई कोर्ट के निर्देश पर यदि डीजीपी इस व्यवस्था को अनिवार्य करते हैं तो धारा 180 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किए जाने वाले गवाहों के बयानों के साथ ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड भी तैयार होगा। इससे केवल विवेचक की लिखित रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं रहेगी, बल्कि बयान दिए जाने के समय की रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित रह सकती है।
बयान बदलने या लिखने को लेकर विवाद में मदद
अदालत के सामने कई बार FIR, पुलिस विवेचना के दौरान दर्ज बयान और बाद में सामने आने वाले तथ्यों में अंतर का सवाल आता है। ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग होने पर यह जांचना संभव होगा कि गवाह ने वास्तव में क्या कहा था और लिखित बयान में वही बात दर्ज की गई या नहीं। हालांकि रिकॉर्डिंग अपने आप में किसी बयान को अंतिम या सत्य साबित नहीं करती। अदालत को उसकी विश्वसनीयता और अन्य साक्ष्यों के साथ उसकी संगति का परीक्षण करना होगा।
पुलिस पर बयान दर्ज करने की जवाबदेही बढ़ सकती है
हाई कोर्ट ने जांच अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि विवेचक का काम केवल आरोपी के खिलाफ सामग्री जुटाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सत्य तक पहुंचना है। ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग लागू होने पर बयान दर्ज करने की प्रक्रिया का भी एक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे विवेचना की प्रक्रिया की बाद में जांच किए जाने की संभावना बढ़ेगी।
गवाह से पुलिस क्या पूछती है, यह भी अहम
हाई कोर्ट ने धारा 180 के तहत बयान दर्ज करने के तरीके पर भी जोर दिया है। विवेचक को गवाह के सामने आरोपी के खिलाफ आपत्तिजनक या आरोप सिद्ध करने वाले सवाल सुझाने के बजाय गवाह द्वारा अपनी भाषा में बताए गए घटनाक्रम को दर्ज करना चाहिए। केवल आवश्यक बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। इसलिए हाई कोर्ट के निर्देश का असर केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है। इसका संबंध इस बात से भी है कि गवाह का संस्करण पुलिस किस तरीके से दर्ज करती है।
अदालत में जमानत सुनवाई के दौरान मिल सकता है फायदा
हाई कोर्ट ने माना कि ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जमानत और अन्य न्यायिक कार्यवाहियों में अदालत के लिए उपयोगी हो सकती है। FIR और धारा 180 के बयान में अंतर होने पर अदालत के पास बयान दर्ज होने की वास्तविक रिकॉर्डिंग देखने का अतिरिक्त आधार उपलब्ध हो सकता है।
ई-साक्ष्य एप के इस्तेमाल पर भी जोर
हाई कोर्ट ने विवेचकों को निर्देश दिया है कि जहां संभव हो, गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए ई-साक्ष्य एप का इस्तेमाल किया जाए और जरूरत पड़ने पर रिकॉर्डिंग अदालत के सामने उपलब्ध कराई जाए। स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने की कोशिश करने को भी कहा गया है।
आरोपी के पक्ष के साक्ष्य की भी जांच जरूरी
अदालत ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल आरोपी के खिलाफ सामग्री जुटाना नहीं होना चाहिए। यदि आरोपी अपनी बेगुनाही के समर्थन में कोई साक्ष्य विवेचक के सामने प्रस्तुत करता है तो उसकी भी सावधानी से जांच की जानी चाहिए।
मामला क्या था, जिससे हाई कोर्ट ने निर्देश दिए
ये निर्देश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने चंद्रकांता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में महिला आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए। सुनवाई के दौरान मौजूद विवेचक ने स्वीकार किया कि प्रथम सूचनाकर्ता का धारा 180 BNSS के तहत बयान दर्ज करते समय ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की गई थी।
सबसे अहम बात, अभी डीजीपी को करना है फैसला
हाई कोर्ट का आदेश अपने आप पूरे उत्तर प्रदेश में धारा 180 के प्रत्येक बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को तत्काल अनिवार्य नहीं करता। अदालत ने डीजीपी को इसे अनिवार्य करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। इसलिए आगे की वास्तविक व्यवस्था डीजीपी स्तर से जारी होने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगी।
एक नजर में क्या बदलेगा
गवाह का बयान : लिखित रिकॉर्ड के साथ ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकता है।
विवेचक की जवाबदेही : बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की बाद में जांच संभव होगी।
अदालत : जमानत और अन्य कार्यवाहियों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड अतिरिक्त सामग्री के रूप में उपलब्ध हो सकता है।
गवाह का संस्करण : पुलिस को गवाह के बताए घटनाक्रम को उसके अपने संस्करण में दर्ज करने पर जोर रहेगा।
वर्तमान स्थिति : अभी इसे पूरे प्रदेश में तत्काल अनिवार्य व्यवस्था कहना सही नहीं होगा; हाई कोर्ट ने डीजीपी को अनिवार्यता पर विचार करने का निर्देश दिया है।


