- अंतिम सुनवाई में कंपनी सचिव ने रखा पक्ष, मंत्रालय की योजना के तहत लंबित रिटर्न और अन्य फॉर्म दाखिल; 23 निदेशकों को नोटिस देकर वर्चुअल सुनवाई में शामिल होने को कहा गया था
भारत 19
राजीव सक्सेना, कानपुर। कानपुर कपड़ा कमेटी के करीब पांच साल से लंबित रिटर्न और कंपनी अधिनियम से जुड़े कथित उल्लंघनों की शिकायतों पर गुरुवार को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई। कमेटी की ओर से कंपनी सचिव आदेश टंडन ने वर्चुअल सुनवाई में पक्ष रखा। कमेटी ने कारपोरेट कार्य मंत्रालय की योजना के तहत पिछले वर्षों के लंबित रिटर्न और अन्य जरूरी फॉर्म दाखिल कर दिए हैं। सुनवाई के बाद आरओसी ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
2017-18 से रिटर्न दाखिल न करने की शिकायत
कानपुर कपड़ा कमेटी कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत है। इस वर्ष की शुरुआत में कमेटी के सदस्य ज्योति प्रकाश नेवटिया ने आरओसी कार्यालय में शिकायत की थी कि कमेटी लंबे समय से अपने रिटर्न और अन्य जरूरी जानकारियां दाखिल नहीं कर रही है। शिकायतकर्ता के मुताबिक करीब 2017-18 से कमेटी ने आरओसी को जरूरी जानकारियां और रिटर्न नहीं दिए थे। कंपनी अधिनियम के उल्लंघन, नियमों के मुताबिक हिसाब-किताब नहीं रखने और कमेटी में हुए बदलावों की जानकारी रजिस्ट्रार को नहीं देने के आरोप भी लगाए गए थे।
डीआईएन रोके गए निदेशकों के काम करने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिन निदेशकों के डीआईएन रोक दिए गए थे, वे भी काम कर रहे थे। इसके अलावा कमेटी के भीतर हुए बदलावों की जानकारी भी आरओसी को नहीं दी गई। सदस्यता शुल्क में बदलाव को लेकर भी शिकायत की गई। आरोप के मुताबिक शुल्क पहले 200 से बढ़ाकर 400 रुपये और फिर 400 से 600 रुपये किया गया, लेकिन इसकी जानकारी आरओसी को नहीं दी गई।
बैठकों और फैसलों की सूचना नहीं देने का आरोप
शिकायतकर्ता ने कमेटी की बैठकों को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक बैठकों की जानकारी और उनमें लिए गए निर्णयों से संबंधित जरूरी सूचनाएं आरओसी को नहीं दी गईं। शिकायतों के आधार पर आरओसी ने जांच शुरू कर कमेटी के निदेशकों से जवाब मांगा था।
23 निदेशकों को जारी किया गया था नोटिस
अंतिम सुनवाई से पहले आरओसी ने कमेटी के सभी 23 निदेशकों को नोटिस जारी किया था। उन्हें वर्चुअल सुनवाई में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया था। गुरुवार शाम हुई सुनवाई में कमेटी की ओर से कंपनी सचिव आदेश टंडन ने पक्ष रखा।
मंत्रालय की योजना से दाखिल किए गए लंबित रिटर्न
कमेटी के निदेशक और पूर्व अध्यक्ष काशी प्रसाद शर्मा ने बताया कि पहले जिस कंपनी सचिव को जरूरी कागजात दाखिल करने की जिम्मेदारी दी गई थी, वह उन्हें जमा नहीं कर सका था। बाद में मंत्रालय की योजना के तहत पिछले वर्षों के छूटे रिटर्न और अन्य फॉर्म दाखिल कर दिए गए। उन्होंने कहा कि शिकायतों में उठाए गए मुद्दों को दूर कर दिया गया है और अंतिम सुनवाई में कमेटी की ओर से यही पक्ष रखा गया।
आरओसी के आदेश पर अब सबकी नजर
अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद अब आरओसी के आदेश का इंतजार है। करीब नौ महीने से चल रहे इस मामले में लंबित रिटर्न, कंपनी अधिनियम के अनुपालन और कमेटी की ओर से दाखिल की गई जानकारियां प्रमुख मुद्दे रहे हैं। हालांकि, कमेटी के पदाधिकारियों के बीच आपसी मतभेद का मुद्दा अलग बना हुआ है। ऐसे में आरओसी के आदेश के बाद कानपुर कपड़ा कमेटी में आगे की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।


