Hot Topics

टाटा संस में चंद्रशेखरन के विस्तार को ट्रस्ट्स ने दी चुनौती

  • बोर्ड ने 4-1 से मंजूर किया प्रस्ताव, नोएल टाटा ने किया विरोध; टाटा ट्रस्ट्स ने पुनर्नियुक्ति को ‘गैरकानूनी’ और कानूनी रूप से अमान्य बताया, लिस्टिंग की दिशा में भी बढ़ा बोर्ड

भारत 19

नई दिल्ली। टाटा संस में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर गुरुवार को बड़ा कॉरपोरेट घटनाक्रम सामने आया। टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन को पांच साल के नए कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने का प्रस्ताव 4-1 से मंजूर कर दिया, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले को चुनौती देते हुए इसे ‘illegal’ और ‘legal nullity’ बताया है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने बोर्ड बैठक में पुनर्नियुक्ति के खिलाफ वोट किया।

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है। उन्होंने 12 अगस्त को इसके बाद पुनर्नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होने की इच्छा जताई थी। बाद में बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। 17 सितंबर की बैठक में चंद्रशेखरन ने पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव स्वीकार किया और बोर्ड ने उनके नए पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दी।

नोएल टाटा का विरोध, ट्रस्ट्स ने बताया ‘कानूनी रूप से अमान्य’

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव टाटा संस के Articles of Association के तहत वैध नहीं है। ट्रस्ट्स के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए ट्रस्ट के नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है। नोएल टाटा, जो ट्रस्ट के नामित निदेशकों में शामिल हैं, ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। ट्रस्ट्स का यह भी कहना है कि चंद्रशेखरन का अगस्त में पुनर्नियुक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होने का फैसला स्पष्ट रूप से व्यक्त और स्वीकार किया जा चुका था। इसलिए बाद में पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव उस प्रक्रिया के विपरीत है। यह ट्रस्ट्स का पक्ष है; बोर्ड ने बहुमत से प्रस्ताव पारित किया है।

टाटा संस की लिस्टिंग पर भी आगे बढ़ा बोर्ड

इसी बैठक में बोर्ड ने टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया। टाटा संस को RBI ने अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है और RBI की ओर से पंजीकरण से बाहर निकलने की उसकी कोशिश को मंजूरी नहीं मिलने के बाद लिस्टिंग का मुद्दा फिर महत्वपूर्ण हो गया है। टाटा संस ने लिस्टिंग संबंधी नियामकीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और RBI, टाटा ट्रस्ट्स तथा अन्य संबंधित पक्षों से मार्गदर्शन लेने की बात कही है। फिलहाल IPO की तारीख या आकार की घोषणा नहीं हुई है।

विवाद अब सिर्फ चेयरमैन पद तक सीमित नहीं

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में बोर्ड के बहुमत वाले फैसले और प्रमुख शेयरधारक ट्रस्ट्स के विरोध के बीच पैदा हुआ मतभेद अब कंपनी के नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस का बड़ा मुद्दा बन गया है। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर ट्रस्ट्स की आपत्ति के कारण आगे की कॉरपोरेट और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। वहीं लिस्टिंग का फैसला टाटा संस के स्वामित्व और गवर्नेंस ढांचे में संभावित बदलाव का रास्ता खोल सकता है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News