- सुप्रीम कोर्ट के फैसले में RBI को रिकवरी नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश; कर्ज डिफॉल्ट पर वाहन जब्त करने से पहले नोटिस और तय प्रक्रिया जरूरी
भारत 19
नई दिल्ली। कर्ज की किस्तें नहीं चुकाने पर बैंक और एनबीएफसी अब बलपूर्वक या मनमाने तरीके से वाहन जब्त नहीं कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को दिए अहम फैसले में स्पष्ट किया कि फाइनेंसर को लोन एग्रीमेंट के तहत वाहन पर कब्जा लेने का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसका इस्तेमाल कानून, अनुबंध की शर्तों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के मुताबिक ही किया जा सकता है। अदालत ने RBI को बैंकों और एनबीएफसी में रिकवरी से जुड़े दिशानिर्देशों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश भी दिया है।
आधी रात में ट्रक उठाने से शुरू हुआ मामला
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हरी दत्ता शर्मा के कमर्शियल ट्रक से जुड़े मामले में आया। उन्होंने 2019 में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से करीब 9.36 लाख रुपये का वाहन ऋण लिया था। किस्तों के भुगतान में चूक के बाद कंपनी ने पहले भी वाहन अपने कब्जे में लिया था, लेकिन कुछ भुगतान के बाद उसे वापस कर दिया गया। बाद में दोबारा डिफॉल्ट हुआ। 9 अप्रैल 2023 को रात करीब एक बजे चार अज्ञात लोग ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़कर उसे ले गए। कर्जदार के मुताबिक, वाहन कब्जे में लेने से पहले उसे उचित नोटिस नहीं दिया गया था।
लोन एग्रीमेंट में सात दिन का नोटिस था
सुप्रीम कोर्ट ने लोन एग्रीमेंट की शर्तों की भी जांच की। उसमें वाहन पर कब्जा लेने से पहले सात दिन का नोटिस देने का प्रावधान था। अदालत ने पाया कि संबंधित मामले में ऐसा नोटिस नहीं दिया गया। अदालत ने वाहन कब्जे की प्रक्रिया में बल प्रयोग और अनुबंध में तय प्रक्रिया का पालन न किए जाने को गंभीरता से लिया।
बैंक का वाहन जब्त करने का अधिकार खत्म नहीं
फैसले का मतलब यह नहीं है कि कर्ज डिफॉल्ट होने पर बैंक या एनबीएफसी वाहन जब्त नहीं कर सकते। फाइनेंसर को वैध लोन एग्रीमेंट के तहत वाहन पर कब्जा लेने का अधिकार हो सकता है। हालांकि, इसके लिए नोटिस, अनुबंध की शर्तों और लागू कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी कर्ज की किस्त न चुकाने और वाहन की वैध रिपोजेशन के बीच फर्क रहेगा। फाइनेंसर का अधिकार बना रहेगा, लेकिन वसूली का तरीका कानून के दायरे में होना जरूरी होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने रिकवरी के लिए बताए 10 सिद्धांत
अदालत ने वित्तीय संस्थानों और अदालतों के मार्गदर्शन के लिए रिकवरी और वाहन रिपोजेशन से जुड़े 10 सिद्धांत बताए। इनमें कर्जदार को अनुचित तरीके से परेशान नहीं करना, बल प्रयोग से वाहन जब्त नहीं करना, रिकवरी एजेंटों की उचित जांच और प्रशिक्षण तथा वैध रिपोजेशन क्लॉज का पालन शामिल है। रिपोजेशन क्लॉज में नोटिस की अवधि, वाहन पर कब्जे की प्रक्रिया, बिक्री या नीलामी से पहले कर्जदार को अंतिम अवसर और वाहन वापस करने की प्रक्रिया जैसी बातें स्पष्ट होनी चाहिए।
RBI को नियमों का वास्तविक पालन कराने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RBI के रिकवरी संबंधी दिशानिर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन इस मामले से इनके प्रभावी अनुपालन को लेकर सवाल सामने आते हैं। अदालत ने RBI को बैंकों और एनबीएफसी में इन नियमों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। फैसले की प्रति RBI को भेजने को भी कहा गया है।
ट्रक मालिक को 10 लाख रुपये मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। ट्रक पहले ही बेचा जा चुका था, इसलिए अदालत ने बिक्री को रद्द नहीं किया। हालांकि फाइनेंस कंपनी को 4.50 लाख रुपये की बिक्री राशि छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने, दोनों लोन खाते बंद करने और मानसिक पीड़ा व आजीविका के नुकसान के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके अलावा 50 हजार रुपये मुकदमे का खर्च भी देने को कहा गया।
वाहन मालिकों के लिए फैसले के क्या मायने
फैसले का सीधा असर यह है कि कर्ज डिफॉल्ट होने पर रिकवरी एजेंट मनमाने ढंग से वाहन नहीं उठा सकते। बैंक या एनबीएफसी को लोन एग्रीमेंट, RBI के लागू दिशानिर्देश और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा। खास तौर पर बिना उचित नोटिस, बल प्रयोग या अनुबंध में तय प्रक्रिया से बाहर जाकर वाहन कब्जे में लेने की कार्रवाई पर यह फैसला महत्वपूर्ण कानूनी आधार देता है। वाहन मालिक ऐसी कार्रवाई के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा ले सकते हैं। हालांकि, ये फैसला कर्ज की देनदारी खत्म नहीं करता और न ही वाहन की हर तरह की जब्ती पर रोक लगाता है।


