- इखलाक के सरेंडर के बाद बांसमंडी से आमिर गिरफ्तार, 19 नए बैंक खाते मिले; चमनगंज-कलक्टरगंज के कारोबारियों के खातों और फर्मों की भी पड़ताल, जांच में अब 96 खाते
भारत 19
कानपुर। करीब 5600 करोड़ रुपये के वित्तीय ट्रेल वाले साइबर फर्जीवाड़े की जांच अब कानपुर के कुछ बड़े कारोबारियों तक पहुंच रही है। शाहजेब और सलमान की गिरफ्तारी के चौथे दिन फरार आरोपी इखलाक हुसैन पुत्र ताजदार हुसैन ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। उसके बयानों के आधार पर पुलिस ने बांसमंडी से आमिर नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में चमनगंज और कलक्टरगंज के कुछ कारोबारियों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिली है। इसी पूछताछ में 19 नए बैंक खातों का भी पता चला है।
इखलाक के खातों में करोड़ों का लेनदेन
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, इखलाक के पिता ताजदार हुसैन पुलिस विभाग में दरोगा रहे हैं और उन्नाव से सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह के सिंडीकेट में बेटे का नाम सामने आने के बाद ताजदार ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की, जिसके बाद इखलाक ने सरेंडर किया। अब उससे बैंक खातों, फर्जी फर्मों, होटल कारोबार और गिरोह के अन्य फरार सदस्यों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इखलाक के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में 1.84 करोड़, एसबीआई में 1.09 करोड़, एचडीएफसी में 1.10 करोड़ और आईसीआईसीआई बैंक के खाते में 3.50 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है।
इखलाक ने दावा किया है कि आमिर ने उसके खातों का गलत इस्तेमाल किया। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है।इखलाक के पूर्व में कुछ होटल संचालित करने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। इन परिसरों का कथित तौर पर सट्टेबाजी और हवाला से जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ था या नहीं, इसकी पड़ताल की जा रही है। उसकी जीएसटी फर्म के पंजीकरण, कारोबार, रिटर्न और बैंकिंग गतिविधियों को भी जांचा जा रहा है।
आमिर से 19 नए बैंक खातों का पता चला
इखलाक के बयान के आधार पर पुलिस ने बांसमंडी से आमिर को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में अतहर और रिट्ज फैशन नाम से संचालित फर्मों से जुड़े करीब 19 बैंक खातों की जानकारी मिली है। इनमें छह खाते एक ही पैन नंबर पर क्लस्टर के रूप में खोले जाने की बात सामने आई है। एचडीएफसी और आईडीबीआई बैंक के खाते भी इनमें शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ खातों की जानकारी बैंकों से मिल चुकी है और इनमें से कुछ के अब भी संचालित होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, खाते खोलने में आठ अलग-अलग पैन नंबर और पांच मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए गए। अब इन विवरणों के आधार पर खातों को खोलने और संचालित करने वालों की पहचान की जा रही है।
77 खातों में मिला था 5600 करोड़ का वित्तीय ट्रेल
जांच के शुरुआती चरण में पुलिस को विभिन्न फर्जी फर्मों से जुड़े 77 बैंक खातों की जानकारी मिली थी। इन खातों में करीब 5600 करोड़ रुपये के लेनदेन का वित्तीय ट्रेल मिलने की जानकारी पुलिस ने दी थी। तीन खातों में 200 करोड़ रुपये से अधिक और छह खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया है। अब 19 नए खातों की जानकारी मिलने के बाद जांच के दायरे में आए खातों की संख्या 96 हो गई है। पुलिस इन खातों के लेनदेन का मिलान कर पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ी जोड़ रही है।
हवाला, सट्टेबाजी और साइबर निवेश के एंगल
पुलिस इन खातों के कथित हवाला कारोबार, सट्टेबाजी, साइबर निवेश और जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है। जांच में देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेश, खासकर दुबई में बैठे लोगों से जुड़े लेनदेन का एंगल भी सामने आया है। पुलिस को आशंका है कि फर्जी फर्मों के खातों में रकम आने के बाद उसे अलग-अलग खातों, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों से आगे भेजा जाता था। कुछ रकम नकदी के रूप में निकालकर कथित हवाला चैनल के जरिए दूसरे स्थानों तक पहुंचाए जाने की भी जांच की जा रही है।
ऑनलाइन गेमिंग खातों में 1037 करोड़
जांच में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े 16 खातों में करीब 1037 करोड़ रुपये के लेनदेन का उल्लेख सामने आया है। वहीं आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक के कुछ प्रमुख खातों में करीब 3000 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी पहले सामने आ चुकी है। पुलिस अब इन लेनदेन के स्रोत, रकम आगे भेजने के निर्देश और अंतिम लाभार्थियों की पहचान पर फोकस कर रही है।
चमनगंज-कलक्टरगंज के कारोबारी जांच में
इखलाक और आमिर से पूछताछ में सामने आए कारोबारियों में चमनगंज और कलक्टरगंज क्षेत्र के कुछ नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस इनके बैंक खातों, फर्मों, जीएसटी रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े लोगों के साथ हुए वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। फिलहाल इन कारोबारियों की भूमिका जांच का विषय है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी फर्मों के जरिए खोले गए खाते
जांच में कानपुर और उन्नाव में बड़ी संख्या में ऐसी फर्मों का पता चला है, जिनके जरिए बैंक खाते खोले गए। कुछ फर्मों के पते संदिग्ध या सत्यापन में गलत पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन फर्मों के पंजीकरण दस्तावेज, जीएसटी विवरण और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में नेटवर्क के तार निवेश पर अधिक रिटर्न का झांसा देने, ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और अन्य साइबर अपराधों से जुड़े बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इस नेटवर्क से जुड़ी 80 से अधिक शिकायतें मिलने और इसके तार 18 से अधिक राज्यों तक जुड़े होने की बात पुलिस ने कही है।
बैंकिंग सिस्टम की भूमिका भी जांच में
बड़े पैमाने पर हुए लेनदेन के बाद बैंकिंग सिस्टम की निगरानी व्यवस्था और कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एक बैंक सर्वेयर द्वारा कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दिलाने का मामला भी सामने आया है। अब पुलिस 96 खातों की पूरी मनी ट्रेल तैयार कर रही है। जांच का फोकस रकम के स्रोत से लेकर उसके अंतिम गंतव्य और खातों के वास्तविक संचालकों की पहचान पर है। इससे नेटवर्क में शामिल लोगों और उनकी भूमिका को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


