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आसमान में जीवन बचाती ओजोन, धरती पर बनती जहरीली

  • विश्व ओजोन दिवस पर CSJMU में विशेषज्ञ व्याख्यान, समतापमंडल की ओजोन सूर्य की हानिकारक UV किरणों से बचाती है, जबकि धरातलीय ओजोन स्वास्थ्य और वनस्पतियों के लिए बनती है खतरा

भारत 19
कानपुर।
ओजोन एक ही गैस है, लेकिन वायुमंडल में इसकी ऊंचाई बदलते ही इसका असर बिल्कुल अलग हो जाता है। आसमान में समतापमंडल की ओजोन पृथ्वी पर जीवन के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है, वहीं धरातल के करीब बनने वाली ओजोन वायु प्रदूषण का हिस्सा बनकर स्वास्थ्य और वनस्पतियों के लिए नुकसानदेह हो सकती है। विश्व ओजोन दिवस पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज में आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में ओजोन के इसी दोहरे स्वरूप और इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा हुई।

समतापमंडल में ओजोन जीवन की ढाल

ओजोन तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी गैस है, जिसे रासायनिक रूप से O₃ कहा जाता है। वायुमंडल के समतापमंडल में मौजूद ओजोन सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी यानी UV किरणों के बड़े हिस्से को अवशोषित करती है। इससे पृथ्वी पर मौजूद मनुष्यों, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों को इन किरणों के नुकसान से सुरक्षा मिलती है।

धरातल पर ओजोन प्रदूषक बन जाती है

इसके विपरीत जमीन के करीब बनने वाली ओजोन सीधे वातावरण में छोड़ा गया प्रदूषक नहीं है। वाहनों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) तेज धूप की मौजूदगी में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे धरातलीय ओजोन बन सकती है। इसकी अधिक मात्रा सांस और आंखों से जुड़ी समस्याओं के साथ वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

ओजोन परत बचाने के लिए वैश्विक प्रयास

विशेषज्ञ ने बताया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) समेत ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के इस्तेमाल ने समतापमंडलीय ओजोन के क्षरण में भूमिका निभाई। इनके नियंत्रण के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ओजोन संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण काम हुआ है।

रोजमर्रा की आदतों से भी पर्यावरण संरक्षण

व्याख्यान में ओजोन परत के संरक्षण के साथ वायु प्रदूषण कम करने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा की बचत, प्रदूषणकारी उत्सर्जन में कमी, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली, ओजोन-क्षयकारी पदार्थों के नियंत्रण और सामुदायिक भागीदारी को जरूरी बताया गया। इसके साथ ओजोन प्रबंधन की प्रभावी कार्ययोजना अपनाने की जरूरत भी रेखांकित की गई।

‘शीतल ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई’ रहा विषय

कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण विज्ञान विभाग और एनएसएस विस्वेश्वरैया यूनिट-4 ने संयुक्त रूप से किया। इस वर्ष की थीम ‘शीतल ग्रह के लिए वैश्विक कार्रवाई’ के तहत विशेषज्ञ व्याख्यान का विषय ‘आकाश में जीवन रक्षक, धरातल पर महाप्रदूषक’ रखा गया। मुख्य वक्ता बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के स्कूल ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र कुमार रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक मुख्य संरक्षक, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा संरक्षक, स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, उपनिदेशक प्रो. अंजू दीक्षित तथा समन्वयक डॉ. द्रौपदी यादव मौजूद रहीं।

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