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क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर दक्षिण में, कमेटी में प्रतिनिधित्व शून्य

  • 39 सदस्यीय भाजपा कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्रीय कमेटी में दक्षिण से कोई पदाधिकारी नहीं; झांसी महानगर से पांच और झांसी जिले से तीन नाम, कानपुर की तीन इकाइयों को कुल सात स्थान

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राजीव सक्सेना, कानपुर। भाजपा के कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्रीय कार्यालय का पता कानपुर दक्षिण है, लेकिन नई क्षेत्रीय कमेटी में इसी जिले की हिस्सेदारी शून्य है। 39 सदस्यीय कमेटी में दक्षिण से एक भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को जगह नहीं मिली। जिले का प्रतिनिधित्व दिखाने के लिए शामिल किए गए आदित्य त्रिवेदी और निधि राजपाल भी पार्टी नेताओं के मुताबिक दक्षिण में नहीं, बल्कि रतनलाल नगर में रहते हैं, जो गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र के साथ संगठनात्मक रूप से कानपुर उत्तर में आता है। ऐसे में कमेटी के गठन को लेकर दक्षिण जिले के समर्पित कार्यकर्ताओं में नाराजगी के साथ यह चर्चा भी है कि जिस जिले में क्षेत्रीय कार्यालय है, वही प्रतिनिधित्व के मामले में सबसे पीछे कैसे रह गया। क्षेत्रीय कार्यालय दक्षिण जिले में होने से यहां के पदाधिकारियों की भूमिका सामान्य संगठनात्मक प्रतिनिधित्व से कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण रहती है। पार्टी नेताओं के मुताबिक क्षेत्रीय कार्यालय में किसी पदाधिकारी की तत्काल जरूरत होने या कोई जरूरी काम आने पर दक्षिण जिले में रहने वाले पदाधिकारी को ही तुरंत भेजा जाता है। ऐसे में क्षेत्रीय कमेटी में इसी जिले की हिस्सेदारी शून्य होना संगठन के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है।

17 संगठनात्मक जिलों के बीच बराबर प्रतिनिधित्व नहीं

कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र में 14 प्रशासनिक जिले हैं, लेकिन भाजपा की संगठनात्मक संरचना के हिसाब से इनकी संख्या 17 जिला इकाइयों की है। कानपुर में उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण तीन संगठनात्मक जिले हैं, जबकि झांसी में भी दो संगठनात्मक इकाइयां हैं। बाकी प्रशासनिक जिलों में एक-एक संगठनात्मक जिला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि 17 संगठनात्मक जिला इकाइयों को देखते हुए 39 सदस्यीय कमेटी में प्रत्येक जिले को कम से कम दो स्थान दिए जा सकते थे। कुछ जिलों को तीन प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन भी बनाया जा सकता था। इससे कमेटी में सभी जिलों की अपेक्षाकृत समान भागीदारी सुनिश्चित होती। लेकिन मौजूदा गठन में ऐसा नहीं हुआ।

दक्षिण के नाम पर दो, दोनों का ठिकाना उत्तर में

कमेटी में दक्षिण जिले के प्रतिनिधित्व को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा आदित्य त्रिवेदी और निधि राजपाल के नाम पर है। दोनों को दक्षिण जिले का बताया गया है, लेकिन पार्टी नेताओं के अनुसार दोनों का वर्तमान निवास रतनलाल नगर में है, जो कानपुर उत्तर जिले में आता है। आदित्य त्रिवेदी पहले बर्रा में रहते थे, जो दक्षिण जिले का हिस्सा था। पार्टी नेताओं के मुताबिक पिछले कई वर्षों से उनका निवास रतनलाल नगर में है। निधि राजपाल भी रतनलाल नगर में रहती हैं। ऐसे में दक्षिण जिले के नेताओं का कहना है कि कागज पर प्रतिनिधित्व दिखने के बावजूद जमीनी स्तर पर दक्षिण की हिस्सेदारी शून्य है। इस गणना के कारण कमेटी में कानपुर उत्तर के प्रतिनिधित्व को लेकर भी अलग चर्चा है। पार्टी नेताओं के अनुसार वास्तविक सूची में उत्तर जिले से चार लोग हैं, जबकि दक्षिण के दो नामों को भी उत्तर का माना जाए तो यह संख्या छह तक पहुंचती है।

झांसी से आठ, कानपुर से सात प्रतिनिधित्व

क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू झांसी महानगर से हैं। कमेटी में झांसी महानगर से उनके अलावा मंत्री मनीष तिवारी, मनजीत सिंह, अमित चिरवारिया और रामनरेश तिवारी शामिल हैं। इस तरह झांसी महानगर से कुल पांच लोग कमेटी में हैं। इसके अलावा झांसी जिले से भी तीन लोगों को जगह दी गई है। यानी क्षेत्रीय अध्यक्ष के गृह क्षेत्र झांसी से कुल आठ प्रतिनिधित्व है। इसके मुकाबले क्षेत्र के सबसे बड़े प्रशासनिक और आबादी वाले जिले कानपुर की तीन संगठनात्मक इकाइयों उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण से कुल सात लोगों को जगह मिली है।

कानपुर दक्षिण खाली, महाना की सीट भी इसी जिले में

दक्षिण जिले को पूरी तरह प्रतिनिधित्व से बाहर किए जाने की चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना इसी जिले की महाराजपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतते हैं। इसके बावजूद क्षेत्रीय कमेटी में दक्षिण जिले का कोई पदाधिकारी शामिल नहीं है। कानपुर ग्रामीण की स्थिति भी पार्टी के कुछ नेताओं के लिए सवाल का विषय है। ग्रामीण क्षेत्र की तीनों विधानसभा सीटें भाजपा या उसके सहयोगी दल के पास हैं। इसके बावजूद पिछली कमेटी में शामिल पवन प्रताप को ही इस बार भी जगह मिली है। ग्रामीण से किसी नए चेहरे को कमेटी में शामिल नहीं किया गया।

इटावा, हमीरपुर और महोबा को भी एक-एक स्थान

कानपुर ग्रामीण की तरह इटावा, हमीरपुर और महोबा को भी कमेटी में केवल एक-एक स्थान मिला है। पार्टी नेताओं के मुताबिक 39 पदाधिकारी और सदस्यों वाली कमेटी में कम से कम दो स्थान प्रत्येक संगठनात्मक जिले को दिए जा सकते थे। एक-एक स्थान देना इसलिए जरूरी माना गया क्योंकि सभी जिलों का प्रतिनिधित्व कमेटी में दिखाना था। हालांकि कमेटी की तस्वीर अभी पूरी तरह अंतिम नहीं मानी जा रही है। सात स्थान अभी खाली हैं, जिन्हें बाद में भरा जाना है। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि इन रिक्त स्थानों में कम प्रतिनिधित्व वाले जिलों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

सात रिक्त पदों पर टिकी जिलों की उम्मीद

पार्टी नेताओं के मुताबिक बाकी पदों के लिए नाम भी तय किए जा चुके हैं और अब लखनऊ से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। ऐसे में दक्षिण, ग्रामीण, इटावा, हमीरपुर और महोबा जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले जिलों की नजर अब इन सात रिक्त पदों पर है। क्षेत्रीय कमेटी के गठन ने फिलहाल भाजपा के भीतर प्रतिनिधित्व के संतुलन, संगठनात्मक जिले और वास्तविक निवास के आधार पर हिस्सेदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जिस जिले में भाजपा का क्षेत्रीय कार्यालय है, उसी जिले को कमेटी में वास्तविक प्रतिनिधित्व से बाहर रखने का आधार क्या है।

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