- नई दिल्ली घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा; आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस से लेकर स्वास्थ्य, स्टार्टअप, कृषि और ऊर्जा सहयोग तक कई फैसले, 2027 में चीन संभालेगा अध्यक्षता
भारत 19
नई दिल्ली। नई दिल्ली में दो दिन तक चली BRICS की कूटनीतिक कवायद रविवार को खत्म हो गई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समापन पर संगठन के सामने अगली चुनौती भी रख दी। उन्होंने कहा कि BRICS में बने सहयोग के ढांचों और साझा संकल्पों को अब ठोस नतीजों में बदलना होगा, ताकि फैसलों का असर बैठकों और दस्तावेजों से बाहर लोगों की जिंदगी में दिखाई दे। भारत की अध्यक्षता में स्वास्थ्य, तकनीक, कृषि, स्टार्टअप, लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा समेत कई नए सहयोग क्षेत्रों को आगे बढ़ाया गया।
मोदी ने बताई BRICS की अगली कसौटी
समापन संबोधन में मोदी ने कहा कि बदलती दुनिया को पुराने संस्थानों के सहारे नहीं चलाया जा सकता। वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम बनाने की प्रक्रिया को आज की वास्तविकताओं के अनुरूप बदलना जरूरी है। उन्होंने BRICS के भीतर बनी सहमति को आगे ले जाने के लिए निरंतरता और क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने इसके लिए BRICS Continuity and Implementation Mechanism का प्रस्ताव भी रखा, ताकि अध्यक्षता बदलने के साथ पहले से शुरू पहलों की रफ्तार न थमे।
ग्लोबल साउथ को सिर्फ आवाज नहीं, हिस्सेदारी
भारत की अध्यक्षता का एक बड़ा फोकस ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाना रहा। मोदी ने कहा कि विकासशील देश वैश्विक संकटों की पहली कतार में हैं, लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में उनकी हिस्सेदारी अब भी कम है। उन्होंने मौजूदा “पिरामिड ऑफ प्रिविलेज” को “प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप” में बदलने की जरूरत बताई। BRICS के जरिए भविष्य की तकनीक और वैश्विक नियमों को तय करने में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
आतंकवाद पर BRICS की एकजुटता, पहलगाम का जिक्र
समिट की सबसे अहम राजनीतिक उपलब्धियों में नई दिल्ली घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा रही। घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों को आपराधिक और अनुचित बताया गया तथा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई गई। घोषणा में आतंकियों और उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराने, आतंक के सुरक्षित ठिकानों और वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया गया। साथ ही आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या जातीय समूह से जोड़ने से इनकार किया गया।
युद्ध और टैरिफ पर भी साझा चिंता
नई दिल्ली घोषणा में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते संघर्षों पर चिंता जताई गई। BRICS देशों ने विवादों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अधिकतम संयम की अपील की गई। एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के असर पर भी चिंता जताते हुए बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई।
स्वास्थ्य से स्टार्टअप तक, भारत ने रखा सहयोग का एजेंडा
भारत ने BRICS सहयोग को रोजमर्रा की चुनौतियों से जोड़ने के लिए कई पहल सामने रखीं। इनमें संक्रामक बीमारियों के लिए इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम, लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन सहयोग, स्टार्टअप इनोवेशन फंड और MSME सहयोग पोर्टल प्रमुख हैं। कृषि में Agro-Ecology और Regenerative Agriculture के लिए Centres of Excellence, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण से जुड़े सहयोग की दिशा भी तय की गई।
तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स के हथियारीकरण पर चेतावनी
मोदी ने समिट में तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स के हथियारीकरण को लेकर चेताया। उनका संदेश था कि तकनीकी क्षमता और महत्वपूर्ण संसाधन वैश्विक विकास में सहयोग का आधार बनें, दबाव या टकराव का हथियार नहीं। BRICS के स्तर पर AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुख रहा। चीन ने भी AI और नई औद्योगिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
20 साल का BRICS, भारत ने बढ़ाया दायरा
BRICS के गठन के 20 साल पूरे होने के मौके पर भारत ने अपनी अध्यक्षता को व्यापक और परिणामोन्मुख बनाने की कोशिश की। भारत के मुताबिक अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम आयोजित हुए। भारत की अध्यक्षता का थीम था—Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability। इसका फोकस सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, तकनीक, पर्यावरण, कृषि और लोगों के बीच संपर्क तक BRICS की पहुंच बढ़ाने पर रहा।
अब चीन के हाथ में BRICS की कमान
भारत की अध्यक्षता खत्म होने के साथ 2027 में चीन BRICS की कमान संभालेगा और 19वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। नई दिल्ली घोषणा में सदस्य देशों ने चीन की अध्यक्षता को पूर्ण समर्थन दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने BRICS को बहुपक्षीय व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने वाला मंच बनाने पर जोर दिया। चीन ने AI, औद्योगिक सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही।
मोदी-शी मुलाकात ने भी खींचा ध्यान
BRICS समिट के दौरान मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बातचीत भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम रही। दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिरता, सीमा पर शांति और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के मुद्दे बातचीत के केंद्र में रहे। समिट के मंच पर दोनों नेताओं की मौजूदगी ने BRICS के भीतर भारत-चीन संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया।
समिट खत्म, अब फैसलों के अमल की परीक्षा
नई दिल्ली समिट ने आतंकवाद, ग्लोबल साउथ, वैश्विक शासन सुधार, व्यापार, स्वास्थ्य, तकनीक और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर साझा रुख दर्ज किया है। लेकिन भारत की अध्यक्षता का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि सहमति को परिणाम में बदलना ही अगले चरण की असली चुनौती है। भारत ने एजेंडा और कई नए सहयोग ढांचे सामने रख दिए हैं। अब चीन की अध्यक्षता में यह देखना अहम होगा कि इनमें से कितनी पहल संस्थागत रूप लेती हैं और कितनी जमीन पर दिखाई देती हैं।


