- कानपुर बैराज में गंगा का जलस्तर 10 सेंटीमीटर घटा, खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर नीचे; हरिद्वार-नरौरा से भी कम हुआ डिस्चार्ज, उत्तराखंड में आज बारिश के बाद अगले दो दिन राहत के संकेत
भारत 19
कानपुर। कई दिनों से लगातार बढ़ रही गंगा ने रविवार को कुछ राहत दी। कानपुर बैराज पर गंगा का जलस्तर 10 सेंटीमीटर नीचे आने से कटरी के गांवों में बढ़ते पानी को लेकर बनी दहशत कुछ कम हुई है। शनिवार सुबह 114.750 मीटर रहा जलस्तर रविवार को 114.740 मीटर दर्ज हुआ। खतरे के निशान 115 मीटर से नदी अब 26 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि यह गिरावट इतनी मामूली है कि इसे स्थायी राहत मानना अभी जल्दबाजी होगी। कानपुर में गंगा का अगला रुख अब उत्तराखंड की बारिश और हरिद्वार-नरौरा से आने वाले पानी पर निर्भर करेगा।
कानपुर बैराज पर घटा गंगा का बहाव
कानपुर बैराज पर रविवार सुबह गंगा का डिस्चार्ज 4,20,691 क्यूसेक दर्ज हुआ। शनिवार को यह 4,21,854 क्यूसेक था। यानी एक दिन में बहाव 1,163 क्यूसेक घटा है। खतरे के निशान पर पहुंचने के लिए यहां 5,44,373 क्यूसेक डिस्चार्ज माना गया है। जलस्तर में मामूली गिरावट और डिस्चार्ज में कमी ने फिलहाल राहत की उम्मीद जगाई है। मगर नदी अभी भी खतरे के निशान के बेहद करीब है, इसलिए कटरी के निचले इलाकों में निगरानी कम करने की स्थिति नहीं है। शुक्लागंज में हालांकि जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी हुई है। शनिवार को 113.100 मीटर रहा जलस्तर रविवार को 113.120 मीटर दर्ज हुआ। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का निशान 114 मीटर है। यानी शुक्लागंज में गंगा अभी चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही है। इसलिए कानपुर और आसपास के गंगा कटरी क्षेत्र में राहत के संकेतों के बावजूद स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
हरिद्वार और नरौरा से भी कम आया पानी
कानपुर में गंगा के जलस्तर की दिशा समझने के लिए ऊपरी बैराजों के आंकड़े अहम हैं। रविवार सुबह हरिद्वार बैराज पर 81,135 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज हुआ, जबकि शनिवार को यह 89,197 क्यूसेक था। इसी तरह नरौरा बैराज का डिस्चार्ज 77,819 से घटकर 67,667 क्यूसेक हो गया। दोनों बैराजों से पानी में आई कमी कानपुर के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि यह गिरावट बनी रहती है तो आगे चलकर इसका असर कानपुर बैराज के जलस्तर पर भी पड़ सकता है। कानपुर में गंगा का 10 सेंटीमीटर उतरना अभी बड़ी राहत नहीं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच यह बदलाव महत्वपूर्ण जरूर है। हरिद्वार और नरौरा से कम हुआ डिस्चार्ज इस उम्मीद को मजबूत करता है कि नदी का दबाव आगे और घट सकता है।
उत्तराखंड की बारिश तय करेगी गंगा की चाल
कानपुर में गंगा के जलस्तर को लेकर सबसे अहम सवाल अब उत्तराखंड के मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार 13 सितंबर को उत्तराखंड में बारिश का दौर बना रहेगा और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है। 14 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी नहीं है, हालांकि गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। 15 सितंबर से फिलहाल कोई चेतावनी नहीं दी गई है। इसका मतलब है कि आज का दिन गंगा के लिए अभी अहम है, जबकि 14 और 15 सितंबर से मौसम में राहत की संभावना बन रही है। यदि उत्तराखंड में बारिश का जोर घटता है तो हरिद्वार और नरौरा से आने वाले पानी में और कमी हो सकती है।
यूपी में भारी बारिश का तत्काल खतरा नहीं
उत्तर प्रदेश के लिए भी फिलहाल मौसम की तस्वीर अपेक्षाकृत राहत वाली है। IMD के पूर्वानुमान में 13 से 15 सितंबर तक पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। इससे कानपुर में गंगा के जलस्तर को लेकर अगले कुछ दिनों में स्थानीय बारिश से ज्यादा ऊपरी गंगा बेसिन की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है। हरिद्वार और नरौरा से निकलने वाले पानी का रुझान भी लगातार देखना होगा।
पश्चिमी व पूर्वी यूपी में भी राहत के संकेत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी फिलहाल भारी बारिश की चेतावनी नहीं है। गंगा किनारे के जिलों में स्थानीय बारिश हो सकती है, लेकिन अगले कुछ दिनों में नदी के जलस्तर पर ज्यादा असर ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी का पड़ने की संभावना है। इसलिए बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, रामपुर और आसपास के गंगा क्षेत्र में भी बैराजों के डिस्चार्ज और नदी के जलस्तर पर नजर महत्वपूर्ण रहेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी 13 से 15 सितंबर तक भारी बारिश का तत्काल अलर्ट नहीं है। प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर और बलिया जैसे गंगा किनारे के जिलों में नदी की स्थिति पर नजर बनी रहेगी। खासकर ऊपरी गंगा क्षेत्र में बारिश घटने और बैराजों से पानी कम होने की स्थिति बनी रही तो इसका असर आगे चलकर मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी दिखाई दे सकता है।


