- अनधिकृत ऐप से टोल वसूली का खेल, 14 ठिकानों पर छापे; 1.03 करोड़ रुपये नकद और डिजिटल सबूत मिले
भारत 19
नई दिल्ली। देशभर के NHAI टोल प्लाजा पर चल रहे कथित फर्जीवाड़े की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अहम सुराग मिले हैं। एजेंसी की जांच में सामने आया है कि करीब 100 टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर और मोबाइल ऐप के जरिए टोल वसूली की जा रही थी। इस नेटवर्क के खिलाफ कई राज्यों में की गई कार्रवाई के दौरान ED ने नकदी, बैंक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं। जांच एजेंसी ने आठ बैंक लॉकर भी फ्रीज किए हैं।
मिर्जापुर के टोल प्लाजा से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के अतरैला टोल प्लाजा से जुड़े कथित फर्जी टोल कलेक्शन मामले से हुई थी। जनवरी 2025 में यूपी एसटीएफ की कार्रवाई के बाद अनधिकृत तरीके से टोल वसूली किए जाने का मामला सामने आया था। इसी आधार पर दर्ज मामले और सामने आए वित्तीय लेनदेन की जांच ED ने PMLA के तहत शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी को कथित नेटवर्क के दूसरे टोल प्लाजा से जुड़े होने के संकेत मिले।
अनधिकृत ऐप से होती थी टोल की वसूली
जांच में सामने आया कि कुछ टोल प्लाजा पर अधिकृत व्यवस्था के समानांतर अनधिकृत ऐप और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। इनके जरिए वाहन चालकों से टोल की रकम वसूली जाती और रसीद भी जारी की जाती थी। आरोप है कि इस तरह की वसूली का पूरा ब्योरा NHAI के अधिकारिक सिस्टम में दर्ज नहीं होता था। खासकर बिना FASTag या पर्याप्त बैलेंस वाले वाहनों से होने वाली नकद वसूली जांच के दायरे में है।
14 ठिकानों पर पहुंची ED की कार्रवाई
ED ने इस मामले में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 14 ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर से जुड़े परिसरों तक पहुंची। तलाशी के दौरान 1.03 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, अकाउंट बुक और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
आठ बैंक लॉकर भी किए गए फ्रीज
जांच एजेंसी ने कार्रवाई के दौरान आठ बैंक लॉकर फ्रीज किए हैं। ED अब इन खातों और लॉकर से जुड़े लेनदेन की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित तौर पर टोल से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची और इस रकम का इस्तेमाल किन लोगों या संस्थाओं ने किया।
100 टोल प्लाजा तक फैला नेटवर्क
ED को जब्त डिजिटल उपकरणों और रिकॉर्ड की शुरुआती जांच में करीब 100 NHAI से जुड़े टोल प्लाजा पर इसी तरह की अनधिकृत व्यवस्था के संकेत मिले हैं। एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि अलग-अलग टोल प्लाजा पर इस्तेमाल हो रही व्यवस्था के पीछे कोई साझा नेटवर्क था या अलग-अलग स्तर पर इसकी व्यवस्था की गई थी। इसके साथ टोल कलेक्शन एजेंसियों और संबंधित लोगों की भूमिका भी जांची जा रही है।
NHAI के राजस्व में सेंध की जांच
जांच का अहम पहलू कथित तौर पर NHAI के राजस्व को हुए नुकसान का आकलन करना है। इसके लिए आधिकारिक टोल रिकॉर्ड और कथित समानांतर वसूली के डिजिटल आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। ED बैंक लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और टोल प्लाजा के कलेक्शन डेटा को जोड़कर पूरे मामले की वित्तीय कड़ी तलाश रही है।
बिचौलियों से लेकर टोल एजेंसियां जांच के घेरे में
जांच एजेंसी यह भी पता कर रही है कि टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर किस माध्यम से पहुंचा और इसे संचालित करने में किन लोगों की भूमिका थी। संबंधित टोल संचालन एजेंसियों, तकनीकी लोगों और कथित बिचौलियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल जांच जारी है और कथित फर्जीवाड़े से NHAI को हुई कुल वित्तीय क्षति का अंतिम आंकड़ा सामने नहीं आया है।

