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एनालॉग डेयरी डिशेज पर जोमैटो की जीरो-टॉलरेंस

  • प्लेटफॉर्म से एनालॉग पनीर-चीज वाली डिशेज तत्काल हटाईं, रेस्तरां को प्राकृतिक डेयरी अपनाने या मेन्यू आइटम हटाने के निर्देश

भारत 19

नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने एनालॉग डेयरी डिशेज को लेकर जीरो-टॉलरेंस नीति लागू कर दी है। कंपनी ने अपने रेस्तरां पार्टनर्स द्वारा एनालॉग डेयरी इस्तेमाल की घोषणा वाली डिशेज को तत्काल प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। साथ ही रेस्तरां संचालकों को प्राकृतिक डेयरी उत्पादों पर स्विच करने या एनालॉग डेयरी वाली डिशेज को मेन्यू से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का पालन जारी नहीं रखने वाले रेस्तरां को प्लेटफॉर्म से डिलिस्ट किया जा सकता है।

एनालॉग पनीर-चीज वाली डिशेज पर सीधी कार्रवाई

जोमैटो के मुताबिक जिन रेस्तरां पार्टनर्स ने अपनी डिशेज में एनालॉग डेयरी इस्तेमाल होने की जानकारी दी थी, उनकी संबंधित लिस्टिंग तत्काल हटा दी गई हैं। कंपनी ने साफ किया है कि प्लेटफॉर्म पर एनालॉग डेयरी से तैयार डिशेज की बिक्री को लेकर जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। इस दायरे में एनालॉग पनीर, एनालॉग चीज और दूसरे डेयरी विकल्पों से तैयार व्यंजन आते हैं। कंपनी का कहना है कि यह कदम ग्राहकों के हित, खाद्य गुणवत्ता और प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों की पारदर्शी जानकारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

रेस्तरां को तुरंत क्या करना होगा

जोमैटो ने अपने रेस्तरां पार्टनर्स को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है। इसके तहत उन्हें:

  • प्राकृतिक डेयरी उत्पादों पर स्विच करना होगा।
  • अगर तुरंत ऐसा करना संभव नहीं है तो एनालॉग डेयरी वाली डिश को मेन्यू से हटाना होगा।
  • सप्लायर से मिले उत्पादों के लेबल और सामग्री की घोषणा की जांच करनी होगी।
  • यह सुनिश्चित करना होगा कि जो सामग्री इस्तेमाल हो रही है, उसका सही विवरण जोमैटो के मेन्यू में दिया गया हो।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले रेस्तरां को प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।

एनालॉग डेयरी क्या होती है

एनालॉग डेयरी ऐसे उत्पादों को कहा जाता है जो दूध या दुग्ध उत्पादों जैसी बनावट, उपयोग या विशेषताएं देने के लिए तैयार किए जाते हैं, लेकिन उनमें दूध से प्राप्त एक या अधिक प्रमुख घटकों की जगह गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल होता है। इन उत्पादों में वनस्पति वसा, स्टार्च, वनस्पति प्रोटीन, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री इस्तेमाल हो सकती है। इसलिए हर एनालॉग उत्पाद को सीधे “नकली” या “जहरीला” कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। असली मुद्दा उत्पाद की सही पहचान, लेबलिंग और उपभोक्ता को उसकी वास्तविक सामग्री की जानकारी देना है। FSSAI के दस्तावेजों में डेयरी एनालॉग के लिए अलग लेबलिंग आवश्यकताओं का उल्लेख है।

पनीर के नाम पर एनालॉग इस्तेमाल पर सख्ती

खाद्य सुरक्षा को लेकर FSSAI पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि चीज एनालॉग को पनीर के रूप में इस्तेमाल या प्रस्तुत करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। अप्रैल 2026 के FSSAI पश्चिमी क्षेत्र के सार्वजनिक नोटिस में खाद्य प्रतिष्ठानों को एनालॉग चीज के इस्तेमाल और उसे पनीर आधारित डिश के नाम से बेचने को लेकर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस में खाद्य प्रतिष्ठानों को खरीदे गए कच्चे माल की निगरानी, सप्लायर से मिलने वाली जानकारी की जांच और जहां एनालॉग इस्तेमाल हो, वहां उसे मेन्यू या डिस्प्ले पर स्पष्ट रूप से बताने की जरूरत पर जोर दिया गया था।

ग्राहक को मिलेगा सामग्री का स्पष्ट संकेत

जोमैटो के फैसले का सीधा असर ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा। अब रेस्तरां को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेन्यू में जिस खाद्य सामग्री का उल्लेख है, डिश में वास्तव में उसी के अनुरूप सामग्री इस्तेमाल हो। अगर किसी रेस्तरां में एनालॉग डेयरी का इस्तेमाल जारी रहता है और वह निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करता, तो संबंधित डिश हटाने के साथ रेस्तरां की पूरी लिस्टिंग भी प्लेटफॉर्म से हटाई जा सकती है।

खाद्य सुरक्षा जांच के बीच बड़ा फैसला

जोमैटो का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में एनालॉग पनीर और दूसरे डेयरी विकल्पों को लेकर खाद्य सुरक्षा जांच बढ़ी है। महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई और दिल्ली में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के बीच एनालॉग डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता, इस्तेमाल और लेबलिंग पर ध्यान बढ़ा है। ऐसे माहौल में जोमैटो की नीति को उसके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध भोजन की सामग्री को लेकर अतिरिक्त पारदर्शिता और निगरानी की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

जोमैटो ने क्यों लिया फैसला

जोमैटो के सीईओ आदित्य मंगला ने कहा कि कंपनी का उद्देश्य ग्राहकों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के साथ उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा और प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध खाद्य पदार्थों के लिए स्पष्ट मानक बनाए रखना है। कंपनी ने इस नीति को खाद्य गुणवत्ता और पारदर्शिता से जोड़ा है। कंपनी ने हालांकि यह नहीं बताया है कि इस कार्रवाई से कितने रेस्तरां या कितनी डिशेज प्रभावित हुई हैं। फिलहाल कार्रवाई उन डिशेज पर की गई है जिन्हें संबंधित रेस्तरां पार्टनर्स ने स्वयं एनालॉग डेयरी युक्त बताया था।

मेन्यू से लेकर सप्लायर तक जिम्मेदारी

नई नीति के बाद रेस्तरां संचालकों के लिए सिर्फ डिश की तैयारी ही नहीं, बल्कि कच्चे माल की खरीद और ऑनलाइन मेन्यू में उसकी सही जानकारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। सप्लायर के लेबल और सामग्री की घोषणा की जांच, डिश में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद की सही पहचान और ऑनलाइन मेन्यू में उसका सही उल्लेख करने को लेकर सभी स्तरों पर सावधानी बरतनी होगी।

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