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मध्य यूपी में बारिश का अलर्ट, कानपुर बैराज पर बढ़ा दबाव

  • 2.97 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज, जलस्तर अभी चेतावनी सीमा से नीचे; औरैया में यमुना का जलस्तर घटने से राहत

भारत 19
कानपुर
। मध्य उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच बारिश का अलर्ट है और दूसरी ओर नदियों तथा बैराजों के जलस्तर पर निगरानी बढ़ गई है। कानपुर समेत आसपास के जिलों में अगले कुछ घंटों में बारिश और गरज-चमक की संभावना के बीच कानपुर बैराज से 2,96,693 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि बैराज का जलस्तर अभी चेतावनी सीमा से नीचे है। औरैया में यमुना का जलस्तर भी घट रहा है।

फ्लड कंट्रोल ऑफिस, एलजीसी कानपुर के 20 अगस्त सुबह आठ बजे के आंकड़ों के मुताबिक कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में जलस्तर 113.620 मीटर रहा। बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर निर्धारित है। यानी पानी चेतावनी स्तर से अभी 38 सेंटीमीटर नीचे है। डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 113.470 मीटर दर्ज किया गया। कानपुर बैराज से 2,96,693 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बैराज के खतरे के स्तर पर निर्धारित डिस्चार्ज 5,44,373 क्यूसेक है। मौजूदा डिस्चार्ज इस सीमा का करीब 54.5 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि फिलहाल बैराज की स्थिति खतरे के स्तर तक नहीं पहुंची है। लेकिन करीब तीन लाख क्यूसेक पानी के प्रवाह और मौसम विभाग के बारिश अलर्ट को देखते हुए गंगा के डाउनस्ट्रीम इलाकों में निगरानी जरूरी है। बारिश का असर स्थानीय नालों और छोटी नदियों के साथ-साथ गंगा के जलस्तर पर भी पड़ सकता है। इसलिए अगले 24 से 48 घंटे कानपुर और आसपास के नदी किनारे के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

शुक्लागंज में भी पानी चेतावनी स्तर से नीचे

शुक्लागंज गेज पर सुबह आठ बजे जलस्तर 112.240 मीटर दर्ज हुआ। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। इस तरह जलस्तर चेतावनी सीमा से करीब 76 सेंटीमीटर नीचे है। फिलहाल शुक्लागंज में भी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। हालांकि कानपुर बैराज से छोड़े जा रहे पानी और आगे होने वाली बारिश के कारण गंगा के जलस्तर में बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा।

औरैया में यमुना घटने से फिलहाल राहत

मध्य यूपी में बाढ़ की स्थिति के लिहाज से औरैया से राहत की खबर है। जिले में यमुना का जलस्तर सुबह आठ बजे 104.790 मीटर दर्ज किया गया और नदी का ट्रेंड घटता हुआ रहा। यमुना का चेतावनी स्तर 112 मीटर और खतरे का स्तर 113 मीटर है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी सीमा से 7.21 मीटर नीचे है। सुबह की रिपोर्ट में बारिश भी शून्य दर्ज की गई। औरैया में यमुना का अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 118.51 मीटर है, जो 6 अगस्त 2021 को दर्ज किया गया था। मौजूदा जलस्तर इससे काफी नीचे है।

नरौरा से 1.34 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज

फ्लड कंट्रोल ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक नरौरा बैराज से 1,34,584 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है। हरिद्वार बैराज से भी 91,940 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। मध्य यूपी के लिहाज से नरौरा से निकलने वाले पानी की निगरानी महत्वपूर्ण है। गंगा के प्रवाह में ऊपर से आने वाले पानी का असर आगे के हिस्सों में पड़ सकता है। हालांकि किसी इलाके में जलस्तर कितनी तेजी से बदलेगा, यह स्थानीय बारिश, नदी की मौजूदा स्थिति और प्रवाह की गति पर भी निर्भर करेगा।

पश्चिमी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का अनुमान जताया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। पूर्वी यूपी में भी भारी बारिश की संभावना है। मध्य यूपी के जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा की गतिविधि देखने को मिल सकती है। ऐसे में शहरी इलाकों में जलभराव, बिजली आपूर्ति प्रभावित होने और पेड़ या कमजोर ढांचे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

कानपुर मंडल के लिए बारिश के साथ नदी भी अहम

कानपुर, औरैया, इटावा और आसपास के जिलों में मौसम की मौजूदा तस्वीर दो स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, बारिश का पूर्वानुमान और दूसरा, नदियों तथा बैराजों का जलस्तर। कानपुर बैराज में अपस्ट्रीम जलस्तर चेतावनी सीमा के काफी करीब है, जबकि डिस्चार्ज करीब तीन लाख क्यूसेक है। दूसरी ओर औरैया में यमुना का जलस्तर घट रहा है। यानी फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन बारिश बढ़ने पर नदी और बैराज के आंकड़े तेजी से बदल सकते हैं।

अभी बाढ़ नहीं, निगरानी का दौर अहम

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर मध्य यूपी में तत्काल बाढ़ की स्थिति नहीं है। कानपुर बैराज और शुक्लागंज दोनों जगह जलस्तर चेतावनी स्तर से नीचे है और औरैया में यमुना घट रही है। लेकिन मौसम विभाग का बारिश अलर्ट और बैराजों से जारी पानी का प्रवाह आने वाले घंटों को महत्वपूर्ण बनाता है। खासकर कानपुर बैराज से करीब तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर नजर रखना जरूरी है।

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