- 22 अगस्त से बीजिंग में 2,056 ह्यूमनॉइड रोबोट दिखाएंगे दम; फुटबॉल-दौड़ से आगे घर, होटल और फैक्टरी के कामों की होगी परीक्षा
भारत 19
बीजिंग/ बीजिंग में 22 अगस्त से शुरू होने वाले विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेल 2026 में विज्ञान-कथा फिल्मों की दुनिया हकीकत के करीब आती नजर आएगी। यहां ह्यूमनॉइड रोबोट सिर्फ दौड़ेंगे, फुटबॉल खेलेंगे या भार उठाएंगे ही नहीं, बल्कि घर, होटल, लाइब्रेरी, फैक्टरी और लॉजिस्टिक्स जैसे रोजमर्रा के काम करके भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। यानी यह मुकाबला केवल यह तय करने के लिए नहीं है कि कौन-सी मशीन तेज या ताकतवर है, बल्कि यह परखने का मंच भी है कि भविष्य की मशीनें इंसानों के साथ कितनी कुशलता और स्वायत्तता से काम कर सकती हैं।
दूसरा विश्व ह्यूमनॉइड रोबोट खेल 22 से 26 अगस्त तक बीजिंग के राष्ट्रीय स्पीड स्केटिंग ओवल, यानी ‘आइस रिबन’, में आयोजित होगा। इसमें 16 देशों की 666 टीमें और 2,056 ह्यूमनॉइड रोबोट हिस्सा ले रहे हैं। पिछले साल हुए पहले आयोजन के मुकाबले इस बार रोबोटों की संख्या करीब चार गुना हो गई है। कुल 51 स्पर्धाओं में 1,301 मुकाबले होंगे।
मैदान में खेल, बाहर जिंदगी की तैयारी
आयोजन का सबसे दिलचस्प हिस्सा खेलों के अलावा होने वाली प्रतियोगिताएं हैं। इस बार वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित 21 परिदृश्य आधारित प्रतियोगिताएं रखी गई हैं, जबकि पिछले साल ऐसी केवल छह स्पर्धाएं थीं। इन्हें नौ तरह की वास्तविक परिस्थितियों में आयोजित किया जाएगा। रोबोटों को घर में सामान व्यवस्थित करने, होटल के कमरे तैयार करने, लाइब्रेरी में किताबें रखने, फैक्टरी में काम करने, सामान पैक करने, रिटेल सेवाएं देने और आपातकालीन बचाव जैसे कार्य करने होंगे। कुछ कार्यों में रोबोट अकेले नहीं, बल्कि टीम बनाकर काम करेंगे। यहीं से इस आयोजन की असली कहानी शुरू होती है। मशीन को सिर्फ चलना नहीं है, उसे परिस्थिति समझनी है, वस्तु पहचाननी है, उसे उठाना है, सही जगह रखना है और काम पूरा करना है। यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर, मोटर, संतुलन और निर्णय लेने की क्षमता एक साथ परीक्षा में होगी।
रोबोट की रफ्तार से ज्यादा उसकी उपयोगिता अहम
फुटबॉल, दौड़, टेबल टेनिस, मार्शल आर्ट, डांस, लंबी कूद, भारोत्तोलन और रस्साकशी जैसी स्पर्धाएं भी आकर्षण का केंद्र होंगी। लेकिन इन खेलों से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि रोबोट वास्तविक दुनिया में कितनी विश्वसनीयता से काम करता है। इसीलिए इस बार प्रतियोगिता के नियम भी कठिन किए गए हैं। 100 मीटर दौड़ की समय सीमा तीन मिनट से घटाकर एक मिनट और 1,500 मीटर की सीमा 40 मिनट से घटाकर 15 मिनट कर दी गई है। अधिकांश ट्रैक और प्रतिस्पर्धी स्पर्धाओं में रोबोटों को पूरी तरह स्वायत्त होकर काम करना होगा।
चीन के 1,975 रोबोट, दुनिया देखेगी अगला कदम
इस प्रतियोगिता में चीन का दबदबा साफ दिखाई देता है। चीन की 641 टीमें और 1,975 रोबोट हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 157 कंपनियों और 27 विश्वविद्यालयों की भागीदारी है। अमेरिका, जर्मनी, जापान और ब्राजील समेत अन्य देशों की टीमें भी मुकाबले में हैं। चीन की रोबोटिक्स कंपनियों के लिए यह आयोजन तकनीकी प्रदर्शन से आगे बढ़कर व्यावसायिक उपयोग की परीक्षा भी है। उद्योग अब यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि ह्यूमनॉइड रोबोट केवल प्रदर्शनी में दिखने वाली मशीन नहीं, बल्कि फैक्टरी, लॉजिस्टिक्स, होटल और अन्य क्षेत्रों में वास्तविक काम करने वाला उपकरण बन सकता है।
आज प्रतियोगिता, कल कार्यस्थल का साथी
यही इस आयोजन को सामान्य खेल प्रतियोगिता से अलग करता है। यदि कोई रोबोट होटल का कमरा व्यवस्थित कर सकता है, फैक्टरी में सामान पहुंचा सकता है, लाइब्रेरी में किताबें व्यवस्थित कर सकता है या आपात स्थिति में बचाव कार्य कर सकता है, तो उसका महत्व पदक से कहीं आगे चला जाता है। भविष्य की अर्थव्यवस्था में रोबोट केवल इंसानों की जगह लेने वाली मशीन होंगे या इंसानों के साथ मिलकर काम करने वाले सहयोगी—इसका जवाब ऐसी ही प्रतियोगिताओं से धीरे-धीरे सामने आएगा। बीजिंग में होने वाले ये खेल उसी बदलाव की एक प्रयोगशाला हैं।
भारत की नजर भी इस बदलती दुनिया पर
2026 के आयोजन में भारत की आधिकारिक टीम या किसी भारतीय रोबोट की भागीदारी की पुष्टि उपलब्ध प्रमुख स्रोतों में अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए भारत को प्रतिभागी देश के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। हालांकि ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की वैश्विक दौड़ भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। रोबोट बनाने की तकनीक में एआई, सेंसर, बैटरी, मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर की भूमिका बढ़ रही है। ऐसे में बीजिंग की प्रतियोगिता भारत जैसे देशों के लिए यह संकेत देती है कि भविष्य की रोबोटिक्स केवल मशीन बनाने की दौड़ नहीं होगी, बल्कि चिप, सेंसर, नियंत्रण प्रणाली, एआई और सॉफ्टवेयर से लेकर वास्तविक उपयोग तक पूरे तकनीकी इकोसिस्टम की प्रतिस्पर्धा होगी।


