- खरगे ने शिक्षा-रोजगार के लिए ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ पर जोर दिया, राम मंदिर चंदे और सीमा सुरक्षा के मुद्दे भी उठे; पार्टी अब हमले को जमीनी अभियान में बदलने की तैयारी में
भारत 19 डेस्क
नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बुधवार को हुई बैठक ने पार्टी के अगले राजनीतिक अभियान की दिशा काफी हद तक साफ कर दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने युवा, शिक्षा और रोजगार से लेकर राम मंदिर के चंदे और चीन सीमा तक के मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा। सबसे अहम संकेत यह रहा कि कांग्रेस अब युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ तैयार करने पर जोर दे रही है। यानी पार्टी केवल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के बजाय शिक्षा से रोजगार तक अपनी वैकल्पिक रूपरेखा सामने रखने की कोशिश करेगी।
युवा और रोजगार को कांग्रेस ने बनाया बड़ा मोर्चा
CWC में खरगे ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और रोजगार के सवाल को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतियों का सबसे ज्यादा असर युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। इसी के साथ उन्होंने कांग्रेस से युवाओं के लिए समयबद्ध और व्यापक ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ तैयार करने को कहा। यह कांग्रेस की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। बेरोजगारी को लंबे समय से विपक्ष का मुद्दा माना जाता रहा है, लेकिन अब कांग्रेस इसे शिक्षा, कौशल और नौकरी के अवसरों की पूरी श्रृंखला से जोड़कर पेश करने की तैयारी में है। इसका सीधा निशाना युवा मतदाता हैं, खासकर वह वर्ग जो भर्ती परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर लगातार असंतोष जाहिर करता रहा है।
राम मंदिर चंदे के आरोप से राजनीतिक तापमान बढ़ाने की तैयारी
बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा। खरगे ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की। कांग्रेस का यह रुख राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि राम मंदिर भाजपा के सबसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में रहा है। कांग्रेस के लिए यहां रणनीतिक चुनौती भी है। मंदिर के मुद्दे से सीधे टकराने के बजाय पार्टी ने दान, पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को अपना आधार बनाया है। हालांकि जिन गड़बड़ियों के आरोपों का कांग्रेस ने उल्लेख किया है, वे फिलहाल राजनीतिक आरोप हैं; उन्हें किसी न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
चीन और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी हमले में जोड़ा
CWC में चीन सीमा पर कथित अतिक्रमण और उससे जुड़े सवाल भी उठाए गए। खरगे ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार से अधिक पारदर्शिता की मांग की। यह कांग्रेस की रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा है। रोजगार और महंगाई जैसे घरेलू मुद्दों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को जोड़कर पार्टी सरकार के खिलाफ अपने राजनीतिक हमले का दायरा बढ़ाना चाहती है। हालांकि इस मोर्चे पर कांग्रेस के लिए चुनौती बड़ी है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों में गिनी जाती है।
CWC का संदेश, मुद्दों से आंदोलन तक जाने की कोशिश
बैठक में कांग्रेस के सामने मूल चुनौती केवल सरकार की आलोचना करने की नहीं, बल्कि अपने मुद्दों को जनता के बीच अभियान में बदलने की है। छात्र असंतोष, नौकरी, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं को एक साथ जोड़कर कांग्रेस युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। CWC से पहले भी पार्टी की रणनीति में छात्र और रोजगार के मुद्दे प्रमुखता से सामने आए थे। यही वजह है कि ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट रोडमैप’ महज एक नारा नहीं, बल्कि कांग्रेस की आगामी राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यदि पार्टी इसे ठोस नीतियों, आंकड़ों और राज्यों में जमीनी अभियानों से जोड़ पाती है तो इसका असर व्यापक हो सकता है।
कांग्रेस के सामने विपक्षी भूमिका मजबूत करने की चुनौती
CWC की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश समेत वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहे। राजनीतिक रूप से देखें तो कांग्रेस ने एक ही बैठक में युवा और रोजगार, धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अलग-अलग वर्गों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को एक साथ रखा है। अब असली परीक्षा इन मुद्दों को संसद और पार्टी मंचों से निकालकर राज्यों और जिलों तक पहुंचाने की होगी।
