उत्तर प्रदेश में हिंदू और सनातन के मुद्दे पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने सपा पर हिंदू और सनातन को लेकर राजनीतिक स्टंट करने का आरोप लगाया है, जबकि अपने नौ साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए 2027 विधानसभा चुनाव में भी जीत का दावा किया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदू और सनातन का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि हिंदू और सनातन को लेकर उसका बदला हुआ रुख केवल राजनीतिक स्टंट है। भाजपा का कहना है कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक चरित्र हमेशा से सनातन और हिंदू विरोधी रहा है और अब बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए वह अपनी छवि सुधारने के लिए दिखावटी राजनीति कर रही है। पार्टी का दावा है कि प्रदेश की जनता इस बदलाव के पीछे की राजनीतिक मंशा को अच्छी तरह समझ चुकी है।
अखिलेश की बयानबाजी पर भाजपा का पलटवार
भाजपा ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की हालिया बयानबाजी को राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष के पास जनता के बीच ले जाने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह धार्मिक और भावनात्मक विषयों को लेकर नई राजनीतिक जमीन तलाशने का प्रयास कर रहा है। भाजपा का दावा है कि वर्ष 2022 की तुलना में 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की स्थिति और कमजोर होगी, क्योंकि जनता अब केवल नारों और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय विकास और सुशासन के आधार पर निर्णय ले रही है।
‘नौ साल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने’
भाजपा ने अपने नौ वर्षों के शासन को उपलब्धियों का आधार बताते हुए कहा कि सरकार ने जनप्रतिनिधियों और आम जनता से लगातार संवाद कायम रखा। इन्हीं सुझावों और जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाई गईं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। पार्टी का दावा है कि इसी मॉडल ने प्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी है।
‘बीमारू’ से ‘रेवेन्यू सरप्लस’ तक का सफर
भाजपा के अनुसार, कभी ‘बीमारू राज्य’ की पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश आज ‘रेवेन्यू सरप्लस’ राज्य बन चुका है। निवेश, औद्योगिक विकास, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, बेहतर कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण प्रदेश देश की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। पार्टी का कहना है कि यह बदलाव केवल सरकारी दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, रोजगार के अवसरों और बुनियादी ढांचे के विस्तार में भी दिखाई दे रहा है।
‘विकास बनाम तुष्टिकरण’ की लड़ाई
भाजपा ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी विकास की राजनीति के बजाय तुष्टिकरण और भावनात्मक मुद्दों के सहारे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि जनता अब इस राजनीति को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और वह विकास, सुशासन तथा सुरक्षा को ही अपना सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा मान रही है।
2027 पर भाजपा का दावा
भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रदेश में हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण जनता का विश्वास सरकार पर लगातार मजबूत हुआ है। पार्टी का दावा है कि यही भरोसा 2027 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की सबसे बड़ी ताकत बनेगा और विपक्ष को 2022 की तुलना में अधिक कठिन राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
सियासी तापमान और बढ़ने के संकेत
समाजवादी पार्टी लगातार महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर रही है। वहीं भाजपा अब हिंदू, सनातन और विकास के मुद्दों को केंद्र में रखकर विपक्ष पर जवाबी हमला तेज कर रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और वैचारिक टकराव के और तेज होने के संकेत हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हिंदू और सनातन को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र यह सियासी टकराव और बढ़ सकता है।


