. पारंपरिक फिटर-इलेक्ट्रिशियन ट्रेड से आगे बढ़े छात्र, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और आधुनिक मशीनों की ट्रेनिंग से रोजगार की नई राह; ट्रेड 60 से बढ़कर 98 हुईं।
. टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से बन रही टीटीएल लैब, 32 और आईटीआई जुड़ेंगी; कंपनियों की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे तकनीकी युवा
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। कभी आईटीआई का नाम आते ही फिटर, टर्नर, इलेक्ट्रिशियन और वायरमैन जैसे पारंपरिक ट्रेड की तस्वीर सामने आती थी, लेकिन अब औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की पहचान बदल रही है। बदलती औद्योगिक जरूरतों और आधुनिक तकनीक के दौर में छात्रों को रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से प्रदेश की 132 राजकीय आईटीआई को हाईटेक सुविधाओं से लैस किया गया है। इसमें कानपुर के पांडुनगर स्थित मुख्य आईटीआई के साथ घाटमपुर और बिल्हौर आईटीआई भी शामिल हैं।इन संस्थानों में अब छात्रों को अत्याधुनिक मशीनों, कंप्यूटर आधारित तकनीक और इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरणों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री या प्रमाण पत्र तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सीधे उद्योगों की जरूरत के मुताबिक कुशल बनाना है।
60 ट्रेड से बढ़कर 98 तक पहुंचा दायरा
आईटीआई में पहले छात्रों के लिए करीब 60 ट्रेड उपलब्ध थीं। तकनीकी बदलाव और उद्योगों की मांग को देखते हुए अब ट्रेड की संख्या बढ़ाकर 98 कर दी गई है। इससे छात्रों के पास रोजगार से जुड़े नए विकल्प बढ़े हैं।ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनिंग, कंप्यूटर आधारित डिजाइन और आधुनिक उत्पादन तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।प्रदेश सरकार और प्रशिक्षण विभाग का लक्ष्य है कि आईटीआई से निकलने वाले छात्र केवल पारंपरिक नौकरियों तक सीमित न रहें, बल्कि आधुनिक उद्योगों में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में अपनी जगह बना सकें।
टीटीएल लैब से बदलेगा प्रशिक्षण का तरीका
आईटीआई के आधुनिकीकरण में टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के सहयोग से बनाई जा रही टीटीएल लैब (टाटा टेक्नोलॉजी लैब) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।इन लैब में छात्रों को उन मशीनों और तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनका इस्तेमाल देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में किया जाता है। इससे आईटीआई छात्र नौकरी के लिए तैयार होने से पहले ही इंडस्ट्री के कामकाज से परिचित हो रहे हैं।टीटीएल लैब के दूसरे चरण में प्रदेश की 32 और आईटीआई को शामिल किया जा रहा है। इसके लिए टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड के साथ संबंधित संस्थानों का करार हो चुका है।
अनुभवी ट्रेनर देंगे इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण
हाईटेक प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए आईटीआई में प्रोफेशनल इंस्ट्रक्टर भी तैनात किए गए हैं। ये प्रशिक्षक उद्योगों में काम करने का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ हैं, जो आईटीआई के अनुदेशकों के साथ मिलकर छात्रों को आधुनिक तकनीक की जानकारी दे रहे हैं।इससे छात्रों को मशीन संचालन के साथ-साथ उद्योगों में काम करने के तरीके, गुणवत्ता मानक और उत्पादन प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है। आईटीआई के संयुक्त निदेशक केएम सिंह के अनुसार, “कंपनियों में जिस मैकेनिज्म और मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, उसका प्रशिक्षण अब छात्रों को आईटीआई में ही मिल रहा है। समय की जरूरत के अनुसार आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है और अनुदेशकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।”
अपग्रेड आईटीआई से प्रशिक्षण लेने वाले छात्रों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। आधुनिक प्रशिक्षण के बाद छात्र नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बेंगलुरु समेत देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित कंपनियों में काम करने के लिए अधिक सक्षम होंगे। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। मशीनों के डिजिटल संचालन, ऑटोमेशन और नई उत्पादन तकनीकों की जानकारी रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
प्रदेश में आईटीआई का विस्तार
राजकीय आईटीआई: 290
राजकीय आईटीआई में प्रशिक्षण ले रहे छात्र-छात्राएं: करीब 2.70 लाख
निजी आईटीआई: 2932
निजी आईटीआई में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं: करीब 3.43 लाख
आईटीआई प्रवेश का अंतिम मौका
आईटीआई में प्रवेश प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। स्टेट काउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग (एससीवीटी) ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 4 अगस्त निर्धारित की है।प्रवेश के इच्छुक छात्र एससीवीटी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए छात्रों को नाम, माता-पिता का नाम, जन्म तिथि, श्रेणी, आधार नंबर और मोबाइल नंबर समेत अन्य जरूरी जानकारी देनी होगी।
बढ़ी सहूलियतें
- 132 राजकीय आईटीआई का हुआ आधुनिकीकरण- कानपुर, घाटमपुर और बिल्हौर आईटीआई भी शामिल- ट्रेड की संख्या 60 से बढ़कर 98 हुई- 32 और आईटीआई में शुरू होगी टीटीएल लैब- आधुनिक मशीनों और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण पर जोर


