पिछले दो महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी ₹46,500 प्रति किलो और सोना ₹12,800 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है। वैश्विक आर्थिक संकेतों, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सराफा बाजार में कारोबार और खरीदारी दोनों धीमी पड़ गई हैं।
कानपुर/ पिछले दो महीनों में सराफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है। एक ओर चांदी अपने उच्च स्तर से फिसलकर ₹46,500 प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई है, वहीं सोना भी ₹12,800 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है। लगातार बदलते भावों के कारण बाजार में असमंजस का माहौल बना हुआ है। इसका असर कारोबारियों और ग्राहकों दोनों पर साफ दिखाई दे रहा है।
सोना-चांदी के ताजा भाव
सराफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून को चांदी का भाव ₹2,70,500 प्रति किलो था, जो 1 अगस्त तक घटकर ₹2,24,000 प्रति किलो रह गया। यानी दो महीनों में चांदी ₹46,500 प्रति किलो सस्ती हो गई।
वहीं सोने की कीमत भी इसी अवधि में ₹1,59,300 प्रति 10 ग्राम से घटकर ₹1,46,500 प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस तरह सोने में ₹12,800 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।
क्यों गिर रहे हैं सोने और चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सराफा बाजार की दिशा तय कर रही हैं। अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की धीमी विकास दर, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ रहा है।
आमतौर पर वैश्विक संकट के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन हाल के महीनों में मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और निवेश रणनीतियों में बदलाव के कारण कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। वहीं औद्योगिक मांग से जुड़ी चांदी पर वैश्विक विनिर्माण गतिविधियों की सुस्ती का भी असर देखा जा रहा है।
सहालग से पहले बाजार में असमंजस
आने वाले सहालग सीजन को देखते हुए ज्वैलर्स आभूषण निर्माण की तैयारी तो कर रहे हैं, लेकिन नए स्टॉक की खरीद में सतर्कता बरत रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि ऊंचे भाव पर स्टॉक खरीद लिया और कीमतें आगे भी गिरती रहीं, तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दूसरी ओर शादी-ब्याह की तैयारी कर रहे परिवार भी फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं। कई ग्राहक उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में कीमतों में और नरमी आ सकती है।
यूपी सराफा एसोसिएशन के सचिव राम किशोर मिश्रा का कहना है कि फिलहाल बाजार में कुछ स्थिरता के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं होता, तो कीमतें संतुलित रह सकती हैं। हालांकि सहालग के दौरान मांग बढ़ने से सीमित तेजी आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि लगातार उतार-चढ़ाव के कारण ज्वैलर्स नया स्टॉक लेने में सावधानी बरत रहे हैं, जबकि ग्राहक भी खरीदारी के लिए सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में सोने और चांदी की कीमतें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर काफी हद तक निर्भर करेंगी। ऐसे में सराफा बाजार की दिशा तय करने में घरेलू मांग से अधिक अंतरराष्ट्रीय संकेत अहम भूमिका निभाएंगे।
पिछले दो महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। जहां खरीदार बेहतर कीमत की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं, वहीं कारोबारी भी सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं तो सहालग के दौरान बाजार में सीमित तेजी देखने को मिल सकती है, लेकिन निवेशकों और ग्राहकों की नजर फिलहाल अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।


