कानपुर के परमट प्राथमिक विद्यालय में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाए जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया। मामले को लेकर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए समान मामलों में अलग-अलग रवैये का आरोप लगाया है।
KANPUR/ कानपुर में सरकारी विद्यालय में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाने का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है। 1 जुलाई को आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र के परमट प्राथमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक नवीन कुमार त्रिपाठी को निलंबित कर दिया।
यह कार्रवाई कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने तथा प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक की भूमिका सामने आने के बाद की गई।
क्या हुआ था?
जानकारी के अनुसार, सपा विधायक अमिताभ बाजपेई 1 जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर परमट प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर में जन्मदिन से संबंधित बैनर लगाए गए, केक काटा गया और विद्यालय के बच्चों को बैग वितरित किए गए। विधायक ने कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किए, जिसके बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आया।
कब और कहां हुई घटना?
यह कार्यक्रम 1 जुलाई को कानपुर के परमट प्राथमिक विद्यालय में आयोजित हुआ। अगले ही दिन 2 जुलाई को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए। जांच पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
कार्रवाई क्यों हुई?
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिओम सिंह के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जानकारी मिली थी। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में प्रधानाध्यापक को विभागीय नियमों के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई।
हालांकि विभाग ने विस्तृत जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है।
सपा विधायक ने उठाए सवाल
दैनिक भास्कर से बातचीत में विधायक अमिताभ बाजपेई ने बिना किसी का नाम लिए इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता भी सरकारी स्कूल पहुंचे थे और बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर “न से नरेंद्र” और “म से मोदी” लिखकर पढ़ाया था। विधायक का सवाल था कि उस समय संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
विधायक का कहना है कि प्रशासन को सभी मामलों में समान मापदंड अपनाने चाहिए और किसी भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अलग-अलग रवैया नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज
प्रधानाध्यापक के निलंबन के बाद यह मामला शिक्षा व्यवस्था और सरकारी विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहस का विषय बन गया है। एक पक्ष सरकारी संस्थानों में राजनीतिक कार्यक्रमों को अनुचित बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कार्रवाई में समानता और निष्पक्षता की मांग कर रहा है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि विभागीय नियमों के अनुरूप कार्रवाई की गई है, जबकि राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क रख रहे हैं।
कानपुर के सरकारी विद्यालय में आयोजित जन्मदिन कार्यक्रम के बाद हुई कार्रवाई ने शिक्षा संस्थानों में राजनीतिक गतिविधियों की सीमा और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल प्रधानाध्यापक का निलंबन प्रभावी है और मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यदि आगे विभागीय जांच या अन्य प्रशासनिक निर्णय सामने आते हैं, तो इस प्रकरण में नई जानकारी जुड़ सकती है।

