कानपुर साइबर थाने में जूनियर अधिकारी के अधीन तैनाती को लेकर एक वरिष्ठ इंस्पेक्टर ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों ने भी अपनी तैनाती को लेकर आपत्ति जताते हुए स्थानांतरण की मांग की है।
KANPUR/ कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। साइबर थाने में तैनात वरिष्ठ इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने अपने से जूनियर अधिकारी के अधीन कार्य करने पर आपत्ति जताते हुए इस्तीफे की पेशकश कर दी। इस घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में चर्चा और असंतोष दोनों को जन्म दे दिया है। मामला गुरुवार को उस समय सामने आया जब इंस्पेक्टर विनय शर्मा ने डीसीपी क्राइम कार्यालय पहुंचकर अपना प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी तैनाती ऐसे थाना प्रभारी के अधीन की गई है जो उनसे कई वर्ष जूनियर हैं, जबकि सेवा नियमों के अनुसार समान या वरिष्ठ अधिकारी के अधीन तैनाती होनी चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार साइबर थाने के वर्तमान प्रभारी सतीश कुमार अपेक्षाकृत जूनियर बैच के अधिकारी हैं, जबकि इंस्पेक्टर विनय शर्मा वर्ष 2005 बैच से संबंधित बताए जा रहे हैं। विनय शर्मा का कहना है कि उन्हें साइबर थाने में कार्य करने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखने के लिए वरिष्ठता का सम्मान आवश्यक है। उनका तर्क है कि जब वरिष्ठ अधिकारी को ही जूनियर को कार्यप्रणाली समझानी पड़े और बाद में उसी से निर्देश लेने पड़ें तो कार्य व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि उनका मूल स्थानांतरण क्राइम ब्रांच में हुआ था और उन्हें वहीं कार्यरत रहने दिया जाए।
दूसरे इंस्पेक्टर ने भी जताई नाराजगी
विवाद केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। साइबर थाने में तैनात इंस्पेक्टर राजेश शर्मा ने भी विभाग को प्रार्थना पत्र देकर खुद को साइबर थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच में संबद्ध करने की मांग की है। राजेश शर्मा ने भी अपने आवेदन में जूनियर अधिकारी के अधीन कार्य करने को असंतोष का प्रमुख कारण बताया है। इससे स्पष्ट है कि मामला व्यक्तिगत न होकर व्यापक प्रशासनिक असंतोष का रूप ले रहा है।
पुलिस विभाग में बढ़ी चर्चा
इस घटनाक्रम के बाद पुलिस विभाग के भीतर ट्रांसफर और पोस्टिंग नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि वरिष्ठता की अनदेखी से प्रशासनिक अनुशासन प्रभावित हो सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ अन्य थानों में भी ऐसी व्यवस्थाएं लागू हैं, जहां अपेक्षाकृत जूनियर अधिकारियों को थाने की कमान दी गई है और उनके अधीन वरिष्ठ कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
डीसीपी क्राइम ने दिए जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर विनय शर्मा के प्रार्थना पत्र का संज्ञान लिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तथा वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ट्रांसफर-पोस्टिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
इस प्रकरण के बाद पुलिस विभाग की ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिसकर्मियों का कहना है कि वरिष्ठता और अनुभव को ध्यान में रखकर पदस्थापन किया जाना चाहिए ताकि कार्यकुशलता और प्रशासनिक संतुलन बना रहे। हालांकि विभाग की ओर से अभी तक किसी प्रकार की नियमावली के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तैनाती प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।
कानपुर साइबर थाने में वरिष्ठ इंस्पेक्टर द्वारा इस्तीफे की पेशकश ने पुलिस विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और अधिकारी मामले की समीक्षा कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि तैनाती प्रक्रिया नियमों के अनुरूप थी या इसमें किसी प्रकार की प्रशासनिक विसंगति मौजूद है।



