LUCKNOW/ लखनऊ नगर निगम की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और मेयर के अधिकार फ्रीज किए जाने के बाद आखिरकार लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने फैजुल्लागंज वार्ड से समाजवादी पार्टी (सपा) के पार्षद घोषित किए गए ललित तिवारी को शपथ दिला दी। इस शपथ ग्रहण के साथ ही मेयर के फ्रीज किए गए अधिकार भी बहाल हो गए। यह मामला केवल एक पार्षद के शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायालय के आदेशों के पालन, स्थानीय निकाय प्रशासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई इस कार्रवाई ने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। नगर निकाय चुनाव 2023 में फैजुल्लागंज वार्ड से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला को विजयी घोषित किया गया था। हालांकि चुनाव परिणाम के बाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
चुनाव परिणाम को दी गई थी चुनौती
ललित तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला ने चुनावी हलफनामे में अपनी दूसरी शादी की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने इसे चुनावी नियमों का उल्लंघन बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच की और आरोपों को गंभीर माना। इसके बाद कोर्ट ने प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन रद्द करते हुए ललित तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कई महीनों तक ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ नहीं दिलाई गई। इसे लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
कोर्ट ने माना आदेश की अवहेलना
जब लंबे समय तक शपथ ग्रहण नहीं कराया गया तो मामला पुनः न्यायालय पहुंचा। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए महापौर के अधिकारों को फ्रीज करने का आदेश दिया। यह एक असामान्य और दुर्लभ कार्रवाई मानी जा रही है, क्योंकि स्थानीय निकाय के इतिहास में ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिले हैं जब न्यायालय ने किसी मेयर के प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाई हो। अधिकार फ्रीज होने के बाद महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अपने कार्यालय में ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नगर आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। शपथ पूरी होने के बाद मेयर के फ्रीज किए गए अधिकार बहाल कर दिए गए। शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि शपथ ग्रहण में देरी जानबूझकर नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले उनका मुंबई में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम था। इसके बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते उन्हें सेना के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के अगले ही दिन उन्होंने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर दी।
ललित तिवारी ने कहा- यह न्याय की जीत
शपथ लेने के बाद ललित तिवारी ने इसे लोकतंत्र और न्यायपालिका की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब उनके कंधों पर फैजुल्लागंज वार्ड की जनता की जिम्मेदारी है और वह क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर उठाएंगे। ललित तिवारी ने कहा कि वार्ड में सड़क, सफाई, जलनिकासी और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी कई समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए वह लगातार प्रयास करेंगे।
राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह मामला स्थानीय निकाय राजनीति में न्यायपालिका की भूमिका को भी रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया कि उसके आदेशों का पालन हर स्थिति में किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में चुनावी हलफनामों में सही जानकारी देने और न्यायालय के आदेशों का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा। लखनऊ नगर निगम का यह घटनाक्रम केवल एक शपथ ग्रहण का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्यायिक जवाबदेही का उदाहरण बन गया है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सपा पार्षद ललित तिवारी को शपथ दिलाई गई और मेयर सुषमा खर्कवाल के अधिकार बहाल हो गए। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि फैजुल्लागंज वार्ड के विकास और स्थानीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।



