NEW DELHI/ भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि उनके मामले की जांच और मूल्यांकन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि विनेश फोगाट को वर्ष 2026 के एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने का अवसर मिले। अदालत की इस टिप्पणी को भारतीय कुश्ती जगत के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
खिलाड़ियों के हित सबसे ऊपर: हाई कोर्ट
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के रवैये पर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि आखिर किन आधारों पर विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि खिलाड़ियों और खेल संघों के बीच किसी भी प्रकार का विवाद खेल के विकास में बाधा नहीं बनना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर खेल और खिलाड़ियों का हित होना चाहिए। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय कुश्ती पिछले कई महीनों से विवादों और प्रशासनिक खींचतान के कारण सुर्खियों में रही है।
पहले अंतरिम राहत देने से किया था इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले 19 मई को हुई सुनवाई में विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने उस समय कहा था कि चूंकि विनेश को घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है, इसलिए तत्काल अंतरिम राहत देना उचित नहीं होगा। हालांकि मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने अब केंद्र सरकार को विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देकर राहत का रास्ता खोला है।
क्या है पूरा विवाद?
विनेश फोगाट ने अदालत में WFI की चयन नीति और 9 मई को जारी किए गए नोटिस को चुनौती दी थी। WFI ने अपने नोटिस में विनेश फोगाट को 26 जून तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया था। इस प्रतिबंध में नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट भी शामिल था। महासंघ का आरोप है कि विनेश फोगाट ने अनुशासनहीनता की तथा कुछ आवश्यक एंटी-डोपिंग प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। दूसरी ओर विनेश फोगाट का पक्ष है कि महासंघ की नई चयन नीति कई अनुभवी खिलाड़ियों के साथ अन्याय कर सकती है और उन्हें निष्पक्ष अवसर नहीं मिल रहा है।
WFI ने क्या दिया तर्क?
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का कहना है कि यदि कोई खिलाड़ी संन्यास लेने के बाद दोबारा प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी करता है तो यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के नियमों के अनुसार उसे कम से कम छह महीने पहले इसकी सूचना देनी होती है। महासंघ के अनुसार विनेश फोगाट ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसी कारण उन्हें प्रतियोगिताओं में शामिल करने को लेकर आपत्ति जताई गई। WFI का यह भी कहना है कि नियमों का पालन सभी खिलाड़ियों के लिए समान रूप से आवश्यक है और किसी को विशेष छूट नहीं दी जा सकती।
चयन नीति पर उठे गंभीर सवाल
मामले का सबसे बड़ा विवाद WFI की नई चयन नीति को लेकर है। नई नीति के अनुसार हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ही एशियन गेम्स चयन ट्रायल में भाग लेने की पात्रता दी जाएगी। पुराने प्रदर्शन या अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को चयन का आधार नहीं माना जाएगा। यही वह बिंदु है जिस पर कई खिलाड़ी और खेल विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके अनुभवी खिलाड़ियों को पूरी तरह नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। विनेश फोगाट ने भी इसी नीति को अदालत में चुनौती देते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों के करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मातृत्व अवकाश को भी माना महत्वपूर्ण पहलू
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि विनेश फोगाट फिलहाल मातृत्व अवकाश पर हैं। कोर्ट ने कहा कि महिला खिलाड़ियों के व्यक्तिगत और पारिवारिक हालात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि खेल और देश के व्यापक हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की यह टिप्पणी भविष्य में महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और अवसरों को लेकर महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
भारतीय कुश्ती पर क्या पड़ेगा असर?
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय कुश्ती प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि खिलाड़ियों को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए और खेल संघों के फैसलों की पारदर्शिता भी जरूरी है। यदि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट विनेश फोगाट के पक्ष में जाती है तो न केवल उन्हें चयन ट्रायल में मौका मिल सकता है बल्कि भविष्य में चयन प्रक्रियाओं को लेकर भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा विनेश फोगाट को दी गई राहत भारतीय खेल जगत में चर्चा का विषय बन गई है। अदालत ने खिलाड़ियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार को विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया है। अब सभी की निगाहें समिति की रिपोर्ट और WFI के अगले कदम पर टिकी हैं। यह मामला केवल एक खिलाड़ी का नहीं बल्कि भारतीय कुश्ती की पारदर्शिता और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।



